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अंतरजातीय विवाह

Byadmin

Jul 4, 2021

:-: अंतरजातीय विवाह :-:
सनातन धर्म में कोई भी अपनी इच्छा से किसी से भी विवाह कर सकता हैं।हमें पढ़ाया गया सन 1955 में विवाह कानून बनाकर,अंतरजातीय विवाह करने की शुरुआत की गई,जो कि पूर्णतः असत्य बात हैं।। आज के शब्दों में रानी दुर्गावती सिंह सामान्य वर्ग(general) से थी और उनके पति दलपतशाह गौंड (sc,st) वर्ग से थे।.
किसी को भी इस विवाह से कोई आपत्ति नहीं थी।आज भी रानी दुर्गावती को लोग सम्मान देते हैं।भारतीय लोगों के उत्पीड़न का खेल 1857 से शुरू होता हैं ।वर वधू दोनों ही योग्य हो,एक दूसरे को समझते हो और एक समान गुण धर्म वाले हो,तो उन दोनों का विवाह हो सकता हैं।
जाति का मतलब व्यवसाय होता हैं।वर्तमान के sc. ,st. , वालों को भी राजा बनने का अधिकार था,तभी तो गौंड साम्राज्य बना।विदेशों में पढ़े महापुरुषों को न तो भारतीय इतिहास की जानकारी थी और न ही भारतीय संस्कृति की,उन्हें तो केवल अपने मालिकों का मिशन पूरा करके उनकी चापलूसी करनी थी। केवल वर्तमान कानून व्यवस्था में ही जज का बेटा जज बनता हैं और नेता का बेटा नेता,नहीं तो मनुस्मृति के शासन में केवल योग्य ही राजा बनता था,चाहे वो राजपूत राजा हो या गौंड राजा।गर्व से कहिए कि आप सनातनी हैं।

धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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