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“अडानी” ओर “अंबानी

Byadmin

Feb 7, 2021

“अडानी” ओर “अंबानी” जिस भी व्यापार में आये तो उस बिजनेस में विदेशी कंपनियों की बैंड बजा दी।बस यही कारण है कि इन विदेशी एजेंटों द्वारा अपने ही देश में अपने लोगों का बहिष्कार हो रहा है।

“Jio” के आने से पहले कितनी लूट थी ??

जब “अडानी एग्रो” शुरू हुआ तो “पेप्सिको, डोमीनोज, वोलमार्ट और मैकडोनाल्ड” आदि को भला क्या तकलीफ हो सकती है ??

वो तो सालों से बड़े बड़े गोदाम लेकर बैठे है.

उसी तरह रिलायंस रिटेल से Amazon और Flipcart को कड़ी टक्कर मिल रही है.।दुनिया को “5G” टेक्नोलॉजी चीन दे रहा है… और, भारत में भी करोड़ों इन्टरनेट ग्राहक है।परन्तु जैसे ही “रिलायंस Jio” ने ये टेक्नोलॉजी विकसित की तो इन “विदेशी एजेंटो” ने तथाकथित किसानों के जरिए उसका बहिष्कार शुरू कर दिया।

क्या अडानी या अंबानी किसी से जबरदस्ती कर रहा है ..??

या फिर वो दूसरी कंपनी से मंहगा है ??

अगर महंगा है तो आप सस्ता वाला ले लो।

20 रुपये लीटर पेप्सी का पानी जो फाइव स्टार होटल में 200 से 250 रुपये लीटर मिलता है वो हमें पसन्द है।

ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार वाले।

तो अपने ही देश का बहिष्कार क्यूँ ..?? 🤔🤔

उसी तरह.पतंजलि वाला आपको जबरदस्ती कोई प्रोडक्ट नहीं बेचता हाँ… वो HUL, COLGATE, ITC जैसी विदेशी कंपनियों को टक्कर जरुर देता है…!

फिर, पतंजलि नफरत क्यों और उसके खिलाफ दुष्प्रचार क्यों???🤔

ये विदेशी कंपनियां भारत से अरबों, खरबो रुपये का बिजनेस करती हैहर महीने करोड़ो के विज्ञापन मीडिया को देती है तो क्या वो देशी कंपनियों को बदनाम करने के लिए कुछ करोड़ इन नेताओं ओर लीडरों को नहीं दे सकती ..??

ये विपक्षी समर्थक सिर्फ मोदी विरोध के चक्कर में आखिर अपने ही देश का बहिष्कार क्यों करते है ..??

क्या अडानी या अम्बानी नरेन्द्र मोदी (2014) के आने के बाद ही बिजनेसमैन बने ??

और, उसके पहले क्या ये भिखारी थे??

अपनी इस सोच से दरअसल लोग विदेशी ताकतों के एजेंडे को बढा रहे हैं और, अपने ही देश का नुकसान कर रहे हो।

तुम ही हो जो स्वदेशी भारत का विरोध कर रहे हो और फिर कहते हो कि रुपया कमजोर क्यों हो रहा है।

याद है या नहीं किइसी “अडानी” और “अंबानी” का बहिष्कार सबसे पहले राहुल गांधी ने “रफाल” सौदे को अटकाने के लिये किया था और फिर झूठ फैलाने के लिए कोर्ट में माफी भी मांगी थी।

उसके बाद.. इसका विरोध शाहीनबाग में हुआ.

अब , ये समझने की बात है कि “CAA” से अम्बानी और अडानी का भला क्या लेना-देना है ??असल में वामपंथी संगठन और कांग्रेस की सरकार कहीं है नहीं और पैसे के लालच में ये लोग अपने ही देश के पूंजीपतियों का विरोध कर रहे है ।तथा, कुछ अक्ल के अंधे इसे “मोदी विरोध” समझकर अफवाहों को हवा दे रहे हैं।

लेकिन, सच्चाई तो यह है कि सरकार जो इतनी योजनायें चला रही है.।यह मोदी या कोई मंत्री अपने घर से नहीं देता है बल्कि ये पैसा टैक्स से ही आता है.

अगर हमारे देश की कम्पनियाँ आगे बढ़ेंगी तो देश का पैसा देश में रहेगा और लोगों को रोजगार भी मिलेगा.

बाकी आपकी मर्जी क्योंकि सभी लोग समझदार हैं।

शायद आपको याद होगा कि “कोका कोला” 1980 में भारत में आया और 11 soft drink Indian/other brands पर कब्जा कर लिया एवं, बाकी को Pepsi ने ले लिया।

अब, ये सब देश का ही पानी बेचकर पैसा विदेश भेज रहे हैं।

जिसका कहीं कोई विरोध और कोई शोर नहीं ।

उसी तरह…. Amazon लगभग हर शहर के बिजनेस व धर्म पर हमला कर रहा है.

कोई विरोध कोई शोर नहीं।

Blue Dart, DHL & FedEx जैसी कूरियर सर्विस आई और अपने जहाज भी लाई.

उसने अब लगभग पूरे व्यवसाय पर कब्जा कर लिया।

इसका भी कहीं कोई विरोध.. कोई शोर नहीं…

चीनी और कोरियाई मोबाइल भारत में छा गये.
सबने लपालप खरीदा..
कोई विरोध, कोई शोर नहीं!

“Nestle, Maggi, ITC, Pepsi, ने फार्म सेक्टर मे प्रवेश किया.

कोई विरोध, कोई शोर नहीं

Vehicles mfg industry, two wheelers, वाहन और स्कूटर उद्योग में Honda, Hyundai इत्यादि ने अपना वर्चस्व जमाया जबकि हमारे उद्योग काफी थे।

कोई विरोध कोई शोर नहीं!

लेकिन भारत के अडानी, अम्बानी जैसों के कृषि क्षेत्र मे प्रवेश पर अचानक विरोध क्यों ?

क्या वे जबरन हमारी फसल खरीद सकते हैं, कभी सोचा..?
नहीं..

उसी तरह क्या Patanjali भारत के लिए खतरा है ?

जब कोई भी कंपनी/व्यक्ति किसी किसान से उसकी जमीन जबरन नहीं ले सकता या ऐसी पैदावार फसल नहीं ले सकता जिसमें किसान की अनुमति नहीं है तो फिर आखिर इतनी चीख पुकार क्यों..?

और, उससे भी बड़ी बात कि अचानक ही “भारतीय कंपनी का ही विरोध क्यों ?

जबकि विदेशी कंपनियाँ बहुत समय से कई क्षेत्रों मे उत्पादन कर रही हैं.

क्या यह साधारण सामान्य ज्ञान की कमी की वजह से नहीं है ? या फिर, ये किसी कुटिल, योजनाबद्ध तरीके से भारत में अशांति फैलाकर विभाजित करने की प्रकिया का अंग नहीं है…??

सोचो… जरा सोचो…

जिस व्यक्ति ने आज तक अपने किसी रिश्तेदार भाई भतीजे को पद का दुरुपयोग करके अनुचित रूप से कभी भी लाभ नहीं पहुंचने दिया…. क्या वह कभी भारत के किसान का अहित होने दे सकता है??

फिर, उसका विरोध क्यों..?

क्या इस पर विचार किया कभी..?

जरा सोचिए कि…. अगर, आपके मूर्खतापूर्ण विरोध से उस राष्ट्रभक्त की सरकार चली गयी तो… क्या फिर वही लूट खसोट नहीं बढ़ जाएगी ??

आखिर, उसे हटाकर किसे राष्ट्र के शीर्ष पद पर बैठाओगे?

और, कौन मिलेगा इतना ईमानदार नेता कभी ?

सोचा है ये कभी ?? नहीं सोचा ना ???

इसीलिए, समय रहते चेत जाओ नहीं तो आंसू पोछने वाला भी कोई नहीं मिलेगा…!

अतः… कठोर राष्ट्र्वादी बनो…यही अंतिम विकल्प है…और, यही हमारे हिंदुस्तान का अस्तित्व बचाएगा.

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