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अध्यात्म

Byadmin

Sep 27, 2021

:-: अध्यात्म :-:
जीवात्मा को ही सनातनी भाषा में अध्यात्म कहते हैं।श्रीमद्भगवद्गीता के आठवें (8) अध्याय के तीसरें श्लोक के अनुसार –
अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोअध्यात्ममुच्यते।
भूतभावोद्भवकरो विसर्ग: कर्मसञ्चज्ञत: ।
श्रीभगवान कहते हैं कि परम अक्षर ब्रह्मा हैं,अपना स्वरूप अर्थात जीवात्मा यानि अध्यात्म नाम से कहा जाता हैं और जो भूतों के भाव को उत्पन्न करने वाला जो त्याग हैं, वह कर्म नाम से कहा गया हैं।अपनी इसी जीवात्मा अर्थात जिन दो जीवों माता और पिता के गुणसूत्रों (chromosome s) से जीव बना होता हैं, उसका अध्ययन करना ही अध्यात्म हैं।कोई भी जीव उसी प्रकार से व्यवहार व कार्य करता हैं, जिसे उसके माता पिता या उससे भी ऊपर की पीढ़ियों के लोग करते आये हैं।वर्तमान में प्राप्त आधुनिक शिक्षा के जाल में फसकर,कोई भी मनुष्य ,दूसरों की देखा देखी किसी भी कार्य को करने लगता हैं, लेकिन ऐसा करने पर उसे आत्मसंतुष्टि नहीं मिलती और वह जीवनभर परेशान एवं तनाव में रहता हैं।उसके इस व्यवहार के कारण जो अगली पीढ़ी आती हैं,वह जन्मजात ही तनाव झेलती हैं,जिसे हम वर्तमान पीढ़ी में अनुभव कर सकतें हैं।अपने बच्चों की कैरियर कॉउंसलिंग करवाने से पहले ,अपनी और अपने पूर्वजों के व्यवहार,रुचि और कौशल की जानकारी अवश्य रखें,क्योंकि आपके बच्चें के D.N.A. में ,आपकी पुरानी सभी पीढ़ियों की सूचनाएं एकत्रित होती हैं, इसलिये आप कितनी भी कोशिश करें,उसे आनंद उसी काम में आएगा,जिसमें उसके पूर्वजों को आता था।
धन्यवाद :-बदला नहीं बदलाव चाहिए

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