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अपनी अच्छाई पर इतना भरोसा*रखिए कि जो भी*आपको खोएगा वो ही रोएगा…!

Byadmin

Jun 5, 2021

अपनी अच्छाई पर इतना भरोसा*रखिए कि जो भी*आपको खोएगा वो ही रोएगा…!

    ब्रह्मचर्य से तुम्हारे भीतर बल आता है। ब्रह्मचर्य का थोड़ा और गहरा अर्थ है - ब्रह्मन अर्थात अनंत चैतन्य और ब्रह्मचर्य अर्थात अनंत चैतन्य में रहना, अपने सच्चे विशाल स्वरुप को जानना। स्वयं को केवल शरीर न जानकर अपने अनंत चैतन्य और प्रकाश पुंज जैसे स्वरुप को जानना ब्रह्मचर्य है। ऐसा होने से ब्रह्मचर्य स्वतः ही घटता है।

क्या तुम यह समझ रहे हो? जब तुम गहरे ध्यान में होते हो तब तुम्हें ऐसा नहीं लगता कि तुम साठ सत्तर किलो के भारी शरीर हो, तुम्हें हल्का महसूस होता है जैसे तुम पंख जैसे हलके हो। गहरे ध्यान में तुम्हें शरीर का भान नहीं रहता है। जितना तुम प्रफुल्लित होते हो, जितना तुम अनंत चैतन्य के साथ तादात्म्य में होते हो, उतना तुम्हें शरीर और उसके तनाव का पता नहीं रहता। वह ब्रह्मचर्य है।

चैतन्य के अनंतता का भाव और उसमें रमन करने से बड़ी ताकत और उत्साह मिलता है। कोई व्यक्ति यदि बहुत संकुचित सोच का हो, केवल यही सोचता रहे कि वो किसके साथ सम्भोग कर सकता है, तुम देखोगे उनका ऊर्जा का स्तर बहुत नीचे होता है। वह बड़े कुंठित, जड़ और अनाकर्षक होते हैं। उनके चारो तरफ भी ऐसी भारी नकारात्मक तरंगों का आवरण बन जाता है जिसमें न कोई उत्साह होता है न ही कोई ताकत। क्या तुमने ऐसा देखा है? तुम पाओगे कि मदिरालय, वेश्यालय या यहाँ वहां ऐसी गलियों में लोग कैसा वासना से भरा हुआ भारी मन लिए फिरते हैं और उनमें कोई ताकत नहीं होती। ऐसे लोग कभी भी किसी के पीछे चल देंगे, उन्हें कहाँ जाना है, क्या करना है, ऐसा कुछ पता ही नहीं रहता है।

    जब ब्रह्मचर्य तुम में प्रतिष्ठित हो जाता है तब तुम्हें बड़ी शक्ति मिलती है और तुम अपने आप को केवल शरीर न मानकर चेतना जैसे देख पाते हो।

भाषा शरीर का ऐसा अदृश्य अंग है! जिसमें इंसान का सब कुछ दिखाई देता है !

मंजू

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