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अपने माता पिता से ये अवश्य पूछे कि उन्होंने क्यूँ लुटेरे नेताओ को वोट दिया।

Byadmin

Mar 25, 2021

बहुत क्लियर बात रखी है। टिप्पणी अंत के बजाय, बीच में भी होगी।

कोयला घोटाले में कोयला सचिव को जेल हुई, लेकिन कोयला मंत्री? कोयला मंत्री अपने मौनी बाबा ही थे। आराम से अपना रिटायर्मेंट एंजॉय कर रहे है व नैतिकता पर ज्ञान झाड़ रहे है।

तो क्या न्याय प्रक्रिया में कमी थी? जाँच में?

जी नही, ऐसा कुछ नही था। वास्तव में जब कोई घोटाला करवाना होता है तो राजनेता मौखिक आदेश देता है। मौखिक आदेश मानने के लिए अधिकारी बाध्य नही होता है, लेकिन नही मानेगा तो मलाईदार पोस्ट से हटा दिया जाएगा। तो अधिकारी एक कैल्क्युलेटेड रिस्क लेता है। 99% केस में बच जाता है, एक प्रतिशत में फँस जाता है। लेकिन नेता उस एक प्रतिशत में भी सुरक्षित रहता है।

अनिल देशमुख पर आरोप कभी सिद्ध नही हो पाएँगे। सचिन वाजे कि बहाली भी नेताओ के मौखिक आदेश पर, लेकिन अधिकारियों के हस्ताक्षर से हुई थी। किसी नेता पर कोई आरोप सिद्ध नही हो पाएगा।

मनी ट्रेल से हो सकता नेता फँसे, लेकिन किसी भी नेता को इंकम टैक्स या CBI गिरफ़्तार करेगी तो हम ही लोग सड़कों पर निकल आएँगे, पुलिस की जेल गाड़ी को घेर लेंगे, व अगले ही चुनाव में नेता को सहानुभूति में दो तिहाई से जिताएँगे।

अतिशयक्ति लगती है आपको? इंदिरा गांधी ने तो लोगों को जेल में ही नही डाला था, उनकी नसबंदी भी की थी। फिर भी गिरफ़्तार हुई तो दिल्ली सड़कों पर थी व तुरंत इंदिरा गांधी को दो तिहाई बहुमत दिया।
जी, हम ऐसे ही है। अर्नब के लिए उसकी बिल्डिंग से भी कोई नही निकला था लेकिन लुटेरे नेता के लिए पूरा नगर सड़कों पर निकल आएगा।

आप कहेंगे पोईंट क्या है?

पोईंट ये है कि नेता को सजा केवल हमारा वोट दे सकता है। अगर हम उन लोगों को चुनाव में नही हराते है जो हमें नौकरी देने वाले अम्बानी के घर के सामने बम रखते है तो हमारा सर्वनाश निश्चित है।

टिप्पणी : यह मुद्दा खास ऐसे लोगों के लिए है जो इन तीन में एक या तीनों आरोप लगाते हैं – (1) सरकार क्यों इन्हें अंदर कर नहीं सकती ? (2) सरकार में दम नहीं है, हनक नहीं है (3) आरोप झूठे हैं, ये नेता निर्दोष हैं, एक भी आरोप साबित नहीं हो पाया तो ये निर्दोष है।

ऐसे आरोप लगानेवालों की अक्ल, इरादे और नीयत पर आप को जो समझना है वो समझ जाएँ ।

भारतीय पश्चिम में जाकर टॉप कंपनियो के लिए CEO ही नही बनते है, बल्कि अपनी कंपनिया खड़ी भी करते है। क्यूँकि वहाँ उनसे कोई वाजे हफ़्ता माँगने नही आता। जो नौकरी वो हमें देते वो वे वहाँ के लोगों को देते है।

वाजे पलता है क्यूँकि हम लुटेरे राजनीतिक खानदानो को वोट देते है। हम वो अनोखे लोग है जो लुटेरे नेताओ के बच्चों को अरबपति बनाने के लिए अपने बच्चों को बेरोज़गार रखते है।

हममें से कुछ अपनी जाति के लुटेरे को वोट देते है इस आशा में कि वो भर्ती घोटाले कर हमें सरकारी नौकरी देगा। कुछ लुटेरों को हम इसलिए वोट देते है कि वो हमें मुफ़्त बिजली पानी देगा। नैतिक पतन हमारा हुआ है व इसीलिए हमारे बच्चे बेरोज़गार है।

इसलिए अगर हफ़्तावसूली रोकना चाहते आप तो वोट देने जाय अवश्य, बारिश में, धूप में, चाहे स्ट्रेचर पर जाना पड़े व वोट केवल मोदी को दे, हर बार।

टिप्पणी – उम्मीद है कि आप अपने बेटी के लिए मलाईदार पोस्टिंग का ‘गोरमिंट जोब’ वाला दामाद नहीं ढूंढ रहे।

और में आवाहन करती हूँ इस देश के हर बेरोज़गार युवा से, व योग्य वर की प्रतीक्षा कर रही हर युवती से, कि अपने माता पिता से ये अवश्य पूछे कि उन्होंने क्यूँ लुटेरे नेताओ को वोट दिया।

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