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अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे

Byadmin

Apr 28, 2021

अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे ……

आज कल बड़ा कर्पूर सुर्खियों में है डॉ भी कर्पूर इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे है कल तक जिस कर्पूर के धुंए को पर्यावरणविदों ने प्रदूषण कहकर खारिज कर दिया था
आज वही धुंआ संकट में प्राणवायु बन गया है।
एक समय था जब प्रत्येक घरों में सुबह-शाम कर्पूर की की धुनी की जाती थी।
सम्पूर्ण घर के कोने-कोने में कर्पूर का धुंआ किया जाता था। ततपश्चात घर के सभी सदस्यों को कर्पूर की धुनी दी जाती थी। जिसमें जलती लौ का धुआं दोनों हाथों से लेकर चेहरे से लेकर
सीने तक हथेलियां फेरी जाती थी। किन्तु अधुनिकता की अंधी दौड़ और चंद किताबें पढ़कर पाई
डिग्रियों के आकंठ घमंड में हम इतने चूर हो गये कि इन्हें अंधविश्वास मान लिया। हवं में कर्पुर का प्रयोग ढोंग और समय बर्बादी लगने लगी। प्राणवायु कर्पूर की धुनी धुंआ लगने लगी। खुद को वैज्ञानिक समझने वाले हमनें ये जानने की कोशिश ही नही की,आखिर हवन, कर्पूर रीति रिवाज हमारी जीवनशैली का हिस्सा क्यों थे।हमारे पूर्वज विज्ञान से भलीभाँति परिचित थी। सनातन स्वयं एक विज्ञान है।
लेकिन उसवक्त कोई वैज्ञानिक शब्दावली तो थी नही अतः उन्होंने विज्ञान को धर्म से जोड़कर दिनचर्या का अहम हिस्सा बना दिया।आज वैज्ञानिक प्रयोग कर मान रहे है कि जहां नित्य हवन होता है
वहां कोविड का खतरा सबसे कम है। मात्र तीन-चार दशक पूर्व तक प्रत्येक घरों में हवन होते थे।
किन्तु आधुनिकता को सर्वश्रेष्ठ और सनातन को पिछड़ा मानने की मानसिकता के चलते हमने सबकुछ भुला दिया। इसका दोष भी हमनें अपने बड़े-बुजुर्गों पर मढ़ दिया।
किन्तु आपके बड़े बुजुर्ग तो पढ़े लिखे नही थे परन्तु आप तो थे।
आपने क्यों नही रीतिरिवाजों के पीछे छुपे विज्ञान को जानने की कोशिश नही की।
खुद को पढ़ा लिखा कहने वाले हम ये भूल गए कि
विज्ञान बिना प्रमाण के किसी को विश्वास/अंधविश्वास नही मानता।
फिर आपने कैसे बिना प्रमाण के मात्र दुष्प्रचार में बहककर
सर्वश्रेष्ठ सनातन परम्पराओं को अंधविश्वास ठहरा दिया।
आज दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदी के वक्त,
मानवता पर संकट के वक्त आधुनिक दुनिया पुनः सनातन की शरण में है।
हवन, कर्पूर, अजवाइन, हल्दी, हस्त प्रच्छालन,
नमस्ते लड़ाई जीतने के मुख्य अस्त्र बन गए है।
तब कहना पड़ रहा है अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे
मजबूत जड़ो वाला वृक्ष ही आंधी-तूफान, झंझावतों में टिक पाता है।
अतः अपनी जड़ों (सनातन) से जुड़े रहिये।
हम सब ये लड़ाई अवश्य जीतेंगे।
अपनी परंपरा को न छोड़े सनातन संस्कृति से जुड़े रहे
धैर्य रखे संकट के बदल छट जायेंगे |🙏

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