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अब क्या हुआ

Byadmin

Mar 26, 2021

अब क्या हुआ

आज सूरज यूं ही उदास था
पूछा क्या हुआ तो कह उठा

चांद को तो एक दिन छुट्टी मिलती है
हर पन्द्रह दिन में पर मुझे नहीं

ऐसा क्यों मैंने कहा जाकर चांद से
पूंछ लेना

नहीं पूछ सकता हूं ,मेरा उसका छत्तीस
का आंकड़ा है

जब मे आता हूं तो वह चला जाता है
और जब वो तो मैं

तो कैसे बात होगी , तुम ही बताओ
अर्चना कैसे चांद से मुलाकात होगी

मैंने कहा एक राज कि बात बताती हूं
हम महिलाओं को भी एक दिन की
छुट्टी की इजाजत नहीं

हमारे बिना घर संसार नहीं तो
तुम्हारे बिना उजास उम्मीद नहीं

चलो उदासी छोड़ो ,जब तक ब्रह्ममाड है
तब तक फूल खिलाओ ,मेघ बरखा बादल

पवन सबसे खूब लड़ो , तुम नहीं
तो हम नहीं , तुम चलाते संसार

क्या बात है , सूरज दादा आज तुम
भूल गए और बतियाने लगे

चलो अब तो प्रभात करो, सबसे
सुप्रभात करो

पंछी भी सुन रहे , छुट्टी लेने की
सोच रहे
इसलिए तकरार छोड़ो
और उठ जाओ

हम महिलाओं की तरह
तुम्हें भी छुट्टी का अधिकार नही

ये बात मान जाओ

अर्चना जोशी
भोपाल मध्यप्रदेश

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