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अवसरवादी राजनीति: हिन्दुओं के लिए अभिशाप

Byadmin

Dec 21, 2020

अवसरवादी राजनीति: हिन्दुओं के लिए अभिशाप
उत्तर प्रदेश में असदुद्दीन ओवैसी और ओमप्रकाश राजभर की पार्टियां मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही हैं। ओमप्रकाश राजभर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी चलाते हैं। महाराज सुहेलदेव का नाम संभवत आपने नहीं सुना होगा।

एक पुराना विस्मृत इतिहास को जानने की आवश्यकता है। भारत में स्थान स्थान पर स्थित कब्रे उन मुसलमानों की हैं, जो भारत पर आक्रमण करने आये थे और हमारे वीर हिन्दू पूर्वजो ने उन्हें अपनी तलवारों से परलोक पंहुचा दिया था। ऐसी ही एक कब्र बहरीच गोरखपुर के निकट स्थित है। यह कब्र गाज़ी मियां की है। गाज़ी मियां का असली नाम सालार गाज़ी मियां था एवं उनका जन्म अजमेर में हुआ था। इस्लाम में गाज़ी की उपाधि किसी काफ़िर यानि गैर मुसलमान को क़त्ल करने पर मिलती थी। गाज़ी मियां के मामा मुहम्मद गजनी ने ही भारत पर आक्रमण करके गुजरात स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का विध्वंश किया था।

कालांतर में गाज़ी मियां अपने मामा के यहाँ पर रहने के लिए गजनी चला गया। कुछ काल के बाद अपने वज़ीर के कहने पर गाज़ी मियां को मुहम्मद गजनी ने नाराज होकर देश से निकला दे दिया। उसे इस्लामिक आक्रमण का नाम देकर गाज़ी मियां ने भारत पर हमला कर दिया। हिन्दू मंदिरों का विध्वंश करते हुए,हजारों हिन्दुओं का क़त्ल अथवा उन्हें गुलाम बनाते हुए, नारी जाति पर अमानवीय कहर बरपाते हुए गाज़ी मियां ने बाराबंकी में अपनी छावनी बनाई और चारो तरफ अपनी फौजे भेजी। कौन कहता है की हिन्दू राजा कभी मिलकर नहीं रहे?

मानिकपुर,बहराइच आदि के 24 हिन्दू राजाओ ने राजा सोहेल देव के नेतृत्व में जून की भरी गर्मी में गाज़ी मियां की सेना का सामना किया और उसकी सेना का संहार कर दिया। राजा सोहेल देव ने गाज़ी मियां को खींच कर एक तीर मारा जिससे की वह परलोक पहुँच गया। उसकी लाश को उठाकर एक तालाब में फेंक दिया गया। हिन्दुओं ने इस विजय से न केवल सोमनाथ मंदिर के लूटने का बदला ले लिया था बल्कि अगले 200 सालों तक किसी भी मुस्लिम आक्रमणकारी का भारत पर हमला करने का दुस्साहस नहीं हुआ।

कालांतर में फ़िरोज़ शाह तुगलक ने अपनी माँ के कहने पर बहराइच स्थित सूर्य कुण्ड नामक तालाब को भरकर उस पर एक दरगाह और कब्र गाज़ी मियां के नाम से बनवा दी जिस पर हर जून के महीने में सालाना उर्स लगने लगा। मेले में एक कुण्ड में कुछ बेहरूपियें बैठ जाते है और कुछ समय के बाद लाइलाज बिमारिओं को ठीक होने का ढोंग रचते है।

पूरे मेले में चारों तरफ गाज़ी मियां के चमत्कारों का शोर मच जाता है और उसकी जय-जयकार होने लग जाती है। हजारों की संख्या में मुर्ख हिन्दू औलाद की, दुरुस्ती की, नौकरी की, व्यापार में लाभ की दुआ गाज़ी मियां से मांगते है, शरबत बांटते है , चादर चदाते है और गाज़ी मियां की याद में कव्वाली गाते है।

मौकापरस्ती और अवसरवादिता का परिचय देते हुए ओम प्रकाश राजभर ओवैसी से गठबन्धन कर रहे हैं। अर्थात इनके एक हाथ में राजा सोहेल देव का और दूसरे में उस ओवैसी का होगा जिसके आदर्श अनुसार हज़ारों हिन्दुओं का संहार करने वाले, गौओं की गर्दन काटने वाले, लाखों को धर्मान्तरित करने वाले मुस्लिम आक्रांता हैं। यह बेमेल गठबन्धन इस राजनेता ने केवल वोट बैंक के लिए किया हैं।

इनका यह समझना है कि राजभर समाज और मुस्लिम समाज की संयुक्त वोट से इनके 20-25 नेता विधान सभा पहुंच जाये और ये सरकार में किंग मेकर की भूमिका निभाए। क्या इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि कि अपनी महत्वकांशा को पूर्ण करने के लिए सिद्धांतों और इतिहास की तिलांजलि देना इनके लिए कोई बड़ी बात नहीं हैं।

समय आ गया है कि उत्तर प्रदेश अथवा भारत की अन्य राजनीतिक पार्टियों को ऐसी घटिया अवसरवादिता को भुनाने के अवसर से पीछे हटना हमें सिखाना होगा। इसका एक ही मूल मन्त्र है।

वह है जात-पात, बाहुबल, धन आदि प्रलोभन से ऊपर उठकर हमें अपना वोट ऐसी पार्टी को देना होगा जो हिन्दू समाज के हितों की बात करे। हिन्दू समाज भेड़ नहीं है जिसे कोई भी कसाई हलाक कर दे। बाकि पाठक स्वयं से समझदार हैं। इस पोस्ट को शेयर करे कि हिन्दू समाज में ऐसी जागृति उत्पन्न हो कि उसे अच्छे-भले की पहचान हो।

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