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आश्रमों का मकड़जाल

Byadmin

Jul 29, 2021

:-: आश्रमों का मकड़जाल :-:
अंग्रेज़ो के द्वारा सन 1857 से लागू शिक्षा व्यवस्था का छुपा हुआ मिशन ही था ईसाई संस्कृति और रीति रिवाज़ो को भारतीय जनमानस के मन मस्तिष्क में डालकर,उन्हें मानसिक ग़ुलाम बनाने का।यहीं कारण हैं कि जिस तरह के अपराध और जीवनशैली का पालन ईसाई मुल्क के लोग करते हैं,वैसा ही हम भारतीय भी करने लगें।जिस देश में बुजुर्गों,महिलाओं और बच्चों को भगवान माना जाता था,आज उस देश में इनसे सम्बंधित आश्रम खोले जा रहें हैं।देश में चलने वाले ये सभी आश्रम बड़े बड़े अफसरों और मंत्रियों की काली कमाई को सफ़ेद करने का माध्यम हैं,जिनकी आड़ में टैक्स चोरी करना बहुत आसान हैं।सफ़ेदपोश लोगों द्वारा संचालित इन आश्रमों में सभी पीड़ितो की स्थिति अत्यंत दयनीय होती हैं,बालतस्करी,महिला तस्करी और शारीरिक अंगों की चोरी और सभी प्रकार के बाल,महिला और वृद्ध सम्बंधित अपराधो की यही जड़ हैं।शहरों में इनकी संख्या अधिक होती हैं और गांवो में न के बराबर,क्योंकि ग्रामीण जीवनशैली में आज भी सनातन संस्कृति और संस्कारों को ही सर्वोच्च माना जाता हैं।अफसरों,मंत्रियों द्वारा संचालित होने के कारण,इन सब पर कभी कोई ठोस कानूनी कार्यवाही नहीं होती और जो थोड़ी बहुत नौटंकी वाली कार्यवाही जनता को भृमित करने के लिये करवाई जाती हैं,उसमें भी किसी छोटे मोटे व्यक्ति को थोड़ा बहुत दंड देकर,सफ़ेद पोश लोगों को बचा लिया जाता हैं।सनातन संस्कृति को पुनर्जीवित करके,इस समस्या का स्थाई समाधान किया जा सकता हैं।
धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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