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एक कवयित्री की मौत

Byadmin

Mar 30, 2021

एक कवयित्री की मौत
जब जब रिश्तों की दुहाई देकर
सच न कहने को दबाव डाला जाता हैं,,
जब जब ज्वलंत नाजुक मसलों पर औरत होने के नाते ,,,
चुप रहने को कहा जाता हैं,,
तब तब एक कवयित्री की मौत हो जाती है,,, चुपके चुपके
जब महत्त्वपूर्ण मामलों में
स्त्री की राय दरकिनार रखी जाती है,,
स्त्री को पढ़ी लिखी ,कामकाजी ,आत्म निर्भर होने पर भी,,,
दोयम दर्जे का समझ लिया जाता है,, घरेलू हिंसा होती है,,
तब तब एक कवयित्री की मौत हो जाती है।
जब जब बेबस नारी की इज्जत को रौंदा जाता है,,
नौकरी पेशा महिलाओं को
पुरुषों से कम ,,अधिकार,,वेतन दिया जाता है,,
फिल्मी हिरोइन को हीरो से कम मेहनताना दिया जाता है
तब तब तिल तिल करके ,,एक कवयित्री की मौत हो जाती हैं।
जब गरीब बेटी को मायके वाले ठुकरा देते हैं,,
सब मिलकर बेटी के हक को दबा लेते हैं,,
रिश्ता तोड़ लेने की बेटी को धमकी देते हैं,,
बेटी के वजूद को चींटी की तरह मसल दिया जाता हैं,,
जब पढ़ी लिखी नौकरी पेशा औरत शोषण के चक्र में पिसती रहती है
तब तब,,शब्द बोझिल बन जाते हैं
कविता का दम घुटने लगता हैं
गीत बेसुरे हो उठते हैं
आत्म सम्मान गिरवी रख दिया जाता है,,,
सुर नहीं सजते है,, आहों की लिपि से दर्द की बौछार होती हैं
तब तब,,तथाकथित ,,सभ्य समाज मे,,,एक जागरूक
कवयित्री की ,,मौत हो जाती है।
लेखनी कमजोर पड़ जाती हैं
भाव रूठ जाते हैं,,,
हक की बात करने पर
रिश्तों की सच्चाई नजर आती है
सारी बुराई का ,,कमियों ख्श ठीकरा जब औरत के माथे ही फोड़ा जाता हैं
तब तक ,,घुटन ,,सिसकियों के बीच,,
अपनो के दुर्व्यवहार के बीच
लड़ती,,डरती,,सहमति
या,,हक के लिये चीखती,,रोती
कोई औरत,,टूट टूट कर बिखरती हैं,, कभी सिमट जाती हैं,,
कभी सँवर जाती,,कभी हालात जे समझौता कर लेती
धर्म,,मर्यादा ,,परम्परा के नाम पर
औरत की आवाज को दबाया जाता,,तब तब,,एक कवयित्री की मौत हो जाती हैं,,
मगर,,उसकी मौत पर कोई हल्ला नहीं मचता,,
कोई अँगुली नहीं उठाता
कोई,,मन से दुखी नहीं होता
अनचाहे,,अनदेखे पन को कोई औरत जब झेलती रहती हैं।तब तब,,,,एक कवयित्री की मौत हो जाती हैं,,
क्यों,,
एक विचारधारा,,,
एक विचारणीय प्रश्न,,.

नीलम व्यास* स्वयमसिद्धा*

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