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कलयुगी रावण

Byadmin

Jul 11, 2021

:-: कलयुगी रावण :-:

आज दुनिया में नास्तिकता के सहारे अधर्म को बढ़ावा देने वाले,कलयुगी रावण की आयु 2565 वर्ष हो गई।त्रेतायुग के समय अधर्म का संचालन केवल एक लंका से होता हैं, द्वापरयुग के समय दो लंकाओ से और कलयुग के समय तीन लंकाओ द्वारा ( जो कि अलग अलग महाद्वीपों में स्थित हैं ) ,संचालन होता हैं। धर्म अधर्म के वैचारिक युद्ध के बाद,त्रेतायुग में अयोध्या द्वारा,द्वापरयुग युग में द्वारका द्वारा और कलयुग में उज्जैन द्वारा धर्म का नियंत्रण होता हैं।ये तीनों शहर भारत में हैं और भारत में ही युगपरिवर्तन और भगवान के अवतार ,इसलिये होते हैं क्योंकि भारत ,हमारे ब्रह्मंड के केंद्र में पड़ता हैं।कलयुगी रावण के भी दस सिर और दस भुजाएं हैं अर्थात लेखन,अभिनय,चिकित्सा, वैज्ञानिक, पत्रकार,गायन,अभियंता,राजनेता,शिक्षक और समाजसेवा इन सभी विधाओं,जिनसे समाज का संचालन होता हैं, तामसिक गुण वाले लोग विद्यमान हैं और दस भुजाएं अर्थात दस दिशाओं में इन्हीं लोगों का शासन हैं।उपयुक्त सभी विधाओं के लोग,केवल व्यापार करने और पैसे कमाने के भूखे होने के कारण ,कलयुगी रावण की नाभि में भी अमृत हैं और ये सभी लोग,आमजनों की भावनाओं के साथ मानसिक युद्ध करते हैं,इसलिये प्रेमरूपी सीता जी रावण के हृदय में स्थित हैं।रावण का ध्यान सीता जी हटाकर,मतलब इन दसों विधाओं के लोगों की असली मानसिकता से आमजनों का परिचय करवाकर,कलयुग का धर्मयुद्ध जीता जाएगा।जीत केवल सत्य और धर्म की ही होगी।
धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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