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कश्मीर फाइल्स देखना एक व्यक्तिगत कारण से भी जरूरी

Byadmin

Mar 14, 2022

कश्मीर फाइल्स देखना एक व्यक्तिगत कारण से भी जरूरी था। इसलिए कि जिस जेएनयू को इसमें दिखाया गया है, उसे मेरे 1997 से 02 तक झेला है। इसलिए कि जिस प्रोफेसर राधिका मेनन को उसमें दिखाया है, उससे कहीं अधिक जहरीले सेठ चिनॉय, इरा भास्कर,पणिक्कर, वगैरह वहां हमने अपनी मित्र की आंखों से देखे हैं।

इसलिए कि, वहां के स्टूडेंट्स यूनियन के कार्यालय में विवेकानंद की एक फोटो लगाने के लिए कितनी मारामारी हुई, वह भी हमने देखा है। इसलिए कि, जेएनयूएसयू ने वहां से ऐसे-ऐसे रेजोल्यूशन पास किए हैं, जिन्हें आप सुन लें तो हिचकियां बंध जाएं।

इसलिए कि, जिस वामी-कौमी, सिकुलर-लिबरल विचारधारा को आज चहुंओर गालियां मिलती हैं, वह कितनी मजबूत है। इसलिए कि, उनकी नज़र में भारत एक देश नहीं, 25 राष्ट्रों का समूह है। भारत से नगालैंड सहित पूरा उत्तर-पूर्व, कश्मीर काट कर अलग कर देना चाहिए, ये उनकी स्थापित सोच है। इसलिए कि, उसी जेएनयू में जेकेएलएफ के आतंकी को स्टेज पर बुलाकर महिमामंडित किया जाता था और परिषद के लोग जब उसका विरोध करते थे, तो उनकी पिटाई तो होती ही थी, दंडित भी किया जाता था।

इसलिए कि, जिस इकोसिस्टम को न समझने के कारण आप मोदी को, विवेक अग्निहोत्री को या जिस किसी को भी गाली देते हैं, उसका फैलाव आप देखेंगे तो आंखें चौंधिया जाएंगी। आखिर, एक अब्दुल या अखलाक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा कैसे बनता है, दुनिया के 250 नामचीन प्रोफेसर या बुद्धिजीवी कैसे मोदी के खिलाफ एक मिनट में चिट्‌ठी तैयार कर देते हैं, कैसे बनती है बायनरी, कैसे होता है नैरेटिव-निर्माण, कभी सोचा है। सोच कर देखिएगा।

इसलिए कि, कम से कम 25 साल से इस नैरेटिव से, इस दैत्य से व्यक्तिगत तौर पर मैं लड़ता रहा हूं। इसलिए, चाहे वह भव्य राममंदिर का निर्माण हो, अनुच्छेद 370 का हटना हो या फिर एक फिल्म का ही बनना हो, अगर दक्षिणपंथी (आप उसे जो भी कहना चाहें कह लीजिए, वाम-विरोधी, कांग्रेस विरोधी ही समझ लीजिए) विचार-निर्मिति अब मुख्यधारा में अपनी बात कहने लगी है, तो वह खुशी और गौरव के आंसू ही मेरी आंखों में लाएगी। शायद, आप इसे न समझ सकें। हमारे साथ जो लड़े हैं, वे समझ जाएंगे।

बाकी, सवाल तो बहुतेरे अभी भी हैं-
-8 वर्षों में भी कश्मीरी हिंदू वापस क्यों नहीं जा सके।
-नैरेटिव-निर्माण के लिए मोदीजीवा ने किया ही क्या है…

  • आखिर उनका प्रोपैगैंडा आपके सच पर भारी क्यों पड़ता है
    और भी सवाल हैं, पूरी फेहरिश्त है। सब पर बात होगी, उससे पहले ये जान लीजिए।
    –विवेक अग्निहोत्री ने अभी क्यों फिल्म बनायी, उसे क्यों पैसा दिया जाए, आदि-अनादि सवाल फिलहाल पीछे रखिए। आपके नरसंहार पर पहली फिल्म बनी है। फिर से अपनी ऐतिहासिक मूर्खता मत दोहराइए।

इसे अपनी सो-कॉल्ड कूल डूड पीढ़ी को तो किसी तरह दिखलाएं ही। बाकी, वामपंथियों पर मेरा लिखा पढ़ना चाहें तो खोजकर मेरा पुराना लिखा पढ़ लें। यह पोस्ट भी अभी लंबी चलेगी।

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