• Tue. Jun 28th, 2022

कॉंग्रेस की गंदगी

Byadmin

Feb 26, 2021

कॉंग्रेस की गंदगी

एक कहानी सुनी थी, जो आज भारतीय जनता पर चरितार्थ होती है।

एक राजा ने किसी अपराधी को सजा दी थी,
या तो १०० प्याज खा लो,
या तो १०० कोड़े खा लो।

अपराधी को अपने शरीर का अनुमान नही था कि, कोड़े बर्दाश्त कर सकता है या प्याज !!

जैसे ही 10 प्याज खाता तो, लगता कि कोड़े खाना ठीक है और जब 10 कोड़े खाता तो लगता कि प्याज खाना ठीक है।

अंत में उसने बारी-बारी से १०० कोड़े और १०० प्याज दोनों खाये !!

अब आते है असली मुद्दे पर…🚩

मई २०१४ से पूर्व।

जब कांग्रेस ने कम्युनल वायलेन्स बिल लाकर हिंदुओं को भारत में दोयम दर्जे का नागरिक बनाने का प्रयास किया था…

जब हिन्दू आतंकवाद को जबरदस्ती स्थापित किया गया…

जब रामसेतु कांग्रेस तोड़ रही थी।

जब भारतीयत्व के प्रतीकों चिन्हों को सुनियोजित तरीके से नष्ट करने का षणयंत्र रचा जा रहा था।

तब भारत की जनतांत्रिक जनता कोड़े खा रही थी।

जब घोटालों पे घोटाले हो रहे थे, और जनता कराह रही थी।

तत्कालीन PM द्वारा, संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है, की घोषणा हो रही थी।

देश का PM देहाती औरत का ख़िताब लेकर घूम रहा था।

आतंकवादियों को मारने वाला सैनिक कोर्ट मार्शल झेल रहा था।

और
हिन्दू साधू-साध्वी, हिन्दू-आतंकवाद के प्रोपेगेंडा के जाल में फंसाकर जेल भेजे जा रहे थे।

कमलेश तिवारी देवदूत पर बोलने से रासुका धारा में जेल जाता था, और फ़िदा हुसैन जैसे खुले में घूमता था ।
.
खैर, कुछ जन जागरण हुआ और,

2014 से सत्ता बदली, सत्ता बदलते ही, घोषणा हो गई कि हिन्दू विरोधी कम्युनल वायलेन्स बिल नहीं ले आएंगे।

रामसेतु नहीं तोड़ा जाएगा, वैकल्पिक मार्ग निकालेंगे।

हिन्दू आतंकवादी का नाम देकर जेलों में ठूसे गये लोग बाहर आने लगे।

सेना की बन्दूकों पर लगे लॉक खोल दिये गए और जेहादी मारे जाने लगे।

नार्थईस्ट भी भारत का हिस्सा है ऐसा कागज से निकल योजनाओं में भी दिखने लगा।

तीन तलाक और हलाला पर डिबेट शुरू हुई, तीन तलाक बैन हुआ।

जनता को लगने लगा कि कोड़े के बाद मेवा खा रहे हैं।

*तभी अचानक नोटबन्दी हुई *कश्मीर में पत्थरबाजों पर लगाम लगी, मगर कई बड़े लोगों के करोड़ों अरबों डूब गए।*

फर्जी कंपनियों पर ताले लग गए।

कुछ कहते हैं रोजगार में कमी आई।

GST से शुरुआत में आने वाली परेशानियाँ शुरू हुईं।

फिर जनता को, मेवे में प्याज का स्वाद आने लगा और जनता अब तक कोड़े की पीड़ा भूल चुकी थी।

अब कुछ लोग ऐसे हैं जो कहने लगे हैं कि, प्याज खा के उल्टी करने से अच्छा है, 2014 से पहले वाले कोड़े खाएंगे।

क्योंकि, रामसेतु तोड़ के हिंदुओं को आतंकवादी घोषित करने वाला 5% DA भी बढ़ाता था।

क्या हुआ जो राम को काल्पनिक कहता था, ब्लैक के बिजनेस की पूरी छूट थी।

क्या हुआ जो आतंकवादी मंदिरों में बम फोड़ते थे उस समय कामचोरी की भी पूरी छूट थी।

बुलाइये कोड़े वाले को,
मगर
ये याद रखियेगा कि, जल्लाद खार खाये बैठा है, कोड़े बहुत जोर से लगेंगे।

2013 में कम्युनल वायलेन्स बिल पास न कर पाने का दुःख, खीझ और गुस्सा भी है और पाँच साल से सत्ता से दूर रहने की झल्लाहट भी है।

पहले तो सिर्फ कहती थी कि हम मुसलमानों की पार्टी अब तो खुलेआम झंडे भी फहराने लगा है।

इसीलिए आज के थोड़े कष्ट सह लीजिए,

वरना, कोड़े और प्याज दोनों खाने पड़ेंगे।

हिंदुओ के लिए फांसी का फंदा तैयार करने को कांग्रेस किस तरह से तैयार थी। इस लेख को पूरा पढ़िए। इसे पढ़कर कांप उठेंगे। अफसोस! मरते न जिन्दा रहते तड़प 2 कर जीते। बहन बेटिया आपके ही सामने हबस का शिकार अलग बनती। 🙁

“Communal violence bill”

   कांग्रेस के लिये जान फूंकने वाले हिंदुओं सुनो मैं कांग्रेस का घोर विरोधी क्यों हूँ ।
"एंटोनी माइनो" की भयानक खतरनाक साजिश।
  जिसे पढ़कर रोंगटे खड़े हो जायेगा। अगर लागू हो गया होता तो मरना भी दूभर हो जाता। जीने की बात ही छोड़ो। तुम्हारे विनाश वाला बिल जिसे काँग्रेस ने दो बार संसद मे पेश किया। 2005 मे और फिर 2011में ।  *कांग्रेस हिंदुओ के खिलाफ ऐसा बिल लेकर आई थी जिसको सुनकर आप कांप उठेंगे । परन्तु भाजपा के जबरदस्त विरोध के कारण वह पास नहीं करवा सकी ।* मुझे यकीन है कि *96% हिन्दुओ को  तो अपने खिलाफ आये* इस बिल के बारे में कुछ पता भी नहीं होगा जिसमें शिक्षित हिंदू भी शामिल है *क्योंकि हिंदू सम्पत्ति जुटाने में लगा है उसको इन सब बातों को* जानने के लिए समय नहीं है । जबकि मुसलमान के *अनपढ़ भी इतने जागरूक है कि पाकिस्तान,* बांग्लादेश,अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताड़ित किये गए हिन्दू व अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को नागरिकता देने वाले *CAA क़ानून के खिलाफ मुसलमान का बच्चा बच्चा उठ खड़ा हुआ ।* अगर काँग्रेस *दुबारा सत्ता में आई तो यह बिल फिर लेकर आएगी ।* 
   *क्या है " *दंगा* *नियंत्रण कानून"** 

हिंदू समाज के लिए फांसी का फंदा, कुछ एक लोगों को इस बिल के बारे में पता होगा, 2011 में इस बिल की रुप रेखा को सोनिया गाँधी की विशेष टीम ने बनाया था जिसे NAC भी कहते थे, इस टीम में दर्जन भर से ज्यादा सदस्य थे और सब वही थे जिन्हें आजकल अर्बन नक्सली कहा जाता है.. कांग्रेस का कहना था की इस बिल के जरिये वो देश में होने वाले दंगों को रोकेंगे। अब इस बिल में कई प्रावधानो पर जरा नजर डालिए :–
📌 इस बिल में प्रावधान था कि दंगों के दौरान दर्ज अल्पसंख्यक से सम्बंधित किसी भी मामले में सुनवाई कोई हिंदू जज नहीं कर सकता था ।
📌 अगर कोई अल्पसंख्यक सिर्फ यह आरोप लगा दे कि मुझसे भेदभाव किया गया है तो पुलिस को अधिकार था कि आपके पक्ष को सुने बिना आपको जेल में डालने का हक होगा और इन केसों में जज भी अल्पसंख्यक ही होगा..
📌 इस बिल में ये प्रावधान किया गया था कि कोई भी हिन्दू दंगों के दौरान हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़
के लिये अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध केस दर्ज नहीं करवा सकता ।
📌 इस बिल में प्रावधान किया गया था कि अगर कोई अल्पसंख्यक समुदाय का व्यक्ति हिन्दू पर हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़, हत्या का आरोप लगाता है तो कोर्ट में साक्ष्य पेश करने की जिम्मेदारी उसकी नहीं है केवल मुकदमा दर्ज करवा देना ही काफ़ी है । बल्कि कोर्ट में निर्दोष साबित होने की जिम्मेदारी उस व्यक्ति की है जिस पर आरोप लगाया गया है ।
📌 इस बिल में ये प्रावधान किया गया था कि दंगों के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय को हुए किसी भी प्रकार के नुकसान के लिए बहुसंख्यक को जिम्मेदार मानते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के नुकसान की भरपाई हिंदू से की जाए । जबकि बहुसंख्यक के नुकसान के लिए अल्पसंख्यक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता था ।
📌 अगर आपके घर में कोई कमरा खाली है और कोई मुस्लिम आपके घर आता है उसे किराए पर मांगने के लिए तो आप उसे कमरा देने से इंकार नहीं कर सकते थे क्योंकि उसे बस इतना ही कहना था कि आपने उसे मुसलमान होने की वजह से कमरा देने से मना कर दिया यानि आपकी बहन बेटी को छेड़ने वाले किसी अल्पसंख्यक के खिलाफ भी हम कुछ नहीं कर सकते थे। मतलब कि अगर कोई छेड़े तो छेड़ते रहने दो वर्ना वो आपके खिलाफ कुछ भी आरोप लगा देता….. आपकी सीधी गिरफ़्तारी और ऊपर से जज भी अल्पसंख्यक..
📌 देश के किसी भी हिस्से में दंगा होता, चाहे वो मुस्लिम बहुल इलाका ही क्यों न हो, दंगा चाहे कोई भी शुरू करता पर दंगे के लिए उस इलाके के वयस्क हिन्दू पुरुषों को ही दोषी माना जाता और उनके खिलाफ केस दर्ज कर जांचें शुरू होती। और इस स्थिति में भी जज केवल अल्पसंख्यक ही होता ऐसे किसी भी दंगे में चाहे किसी ने भी शुरू किया हो..
📌अगर दंगों वाले इलाके में किसी भी हिन्दू बच्ची या हिन्दू महिला का रेप होता तो उसे रेप ही नहीं माना जाता । बहुसंख्यक है हिन्दू इसलिए उसकी महिला का रेप रेप नहीं माना जायेगा और इतना ही नहीं कोई हिन्दू महिला बलात्कार की पीड़ित हो जाती और वो शिकायत करने जाती तो अल्पसंख्यक के खिलाफ नफरत फ़ैलाने का केस उस पर अलग से डाला जाता..
📌 इस एक्ट में एक और प्रस्ताव था जिसके तहत आपको पुलिस पकड़ कर ले जाती अगर आप पूछते की आपने अपराध क्या किया है तो पुलिस कहती की तुमने अल्पसंख्यक के खिलाफ अपराध किया है, तो आप पूछते की उस अल्पसंख्यक का नाम तो बताओ, तो पुलिस कहती – नहीं शिकायतकर्ता का नाम गुप्त रखा जायेगा..
📌 कांग्रेस के दंगा नियंत्रण कानून में ये भी प्रावधान था की कोई भी इलाका हो बहुसंख्यको को अपने किसी भी धार्मिक कार्यक्रम से पहले वहां के अल्पसंख्यकों का NOC लेना जरुरी होता यानि उन्हें कार्यक्रम से कोई समस्या तो नहीं है । ऐसे हालात में अल्पसंख्यक बैठे बैठे जजिया कमाते क्यूंकि आपको कोई भी धार्मिक काम से पहले उनकी NOC लेनी होती, और वो आपसे पैसे की वसूली करते और आप शिकायत करते तो भेदभाव का केस आप पर और ऐसे हालात में जज भी अल्पसंख्यक..
📌 और भी अनेको प्रावधान थे कांग्रेस के इस दंगा नियंत्रण कानून में जिसे अंग्रेजी में # Communal Violence Bill भी कहते है..
सुब्रमण्यम स्वामी ने इस बिल का सबसे पहले विरोध शुरू किया था और उन्होंने इस बिल के बारे में लोगों को जब बताया था तो 2012 में हिन्दू काँप उठे थे तभी से कांग्रेस के खिलाफ हिन्दुओं ने एकजुट होना शुरू कर दिया था। सुब्रमण्यम स्वामी का पूरा लेक्चर इस
“Communal Violence Bill” पर आज भी मौजूद है, 45 मिनट से ज्यादा का है। आप चाहे तो यू टयूब पर सर्च कर लें, और अच्छे से सुन लें..
अब इस के बाद भी जो हिन्दू कांग्रेस को support करता है वे जाने अनजाने अपने ही लोगो के लिए नरक का द्वार खोल रहे हो इसे जानो,
नोट — इस सन्देश को जरूर शेयर करो इस हिन्दू विरोधी ओर राष्ट्रद्रोही कांग्रेस को देश व जनता के सामने नंगा करदो।
इसे आप नेट पर भी सर्च कर सकते हैं !!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

AllEscort