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क्या ये घुसपैठ को बढ़ावा देना नहीं था ? और दूसरी बात मुस्लिम लड़कियों को देखते ही हमारे शूरवीर उनके आगे नतमस्तक क्यों हो जाते हैं।

Byadmin

Dec 28, 2020

कुछ दिनों पहले पाकिस्तान से दो लड़कियां घुसपैठ से या गलती से भारतीय सीमा में आ गयीं और सकभारत ने उन्हें तोहफों से लाद दिया। क्या ये घुसपैठ को बढ़ावा देना नहीं था ? और दूसरी बात मुस्लिम लड़कियों को देखते ही हमारे शूरवीर उनके आगे नतमस्तक क्यों हो जाते हैं। इसे हिन्दू संस्कार का नाम देना गलत है, ये हमारी चारित्रिक कमजोरी है।

मुगलों से संघर्ष में छत्रपति शिवाजी का नाम सबसे ऊपर आता है। बचपन से ही उन्होंने मुगलों का अत्याचार हिंदुओं पर होते देखा था। हिन्दूओं की आस्था के प्रतीक गायों को कटते हुए और हिन्दू लड़कियों को मुगल दरबारियों की पत्नी बनने से लेकर दासी बनने और उनको नीलाम होते हुए भी देखा था।

पर अन्य हिंदुओं की तरह महान कहलाने का कीड़ा उनके अंदर भी विद्यमान था। शिवाजी के एक सरदार एक सुन्दर मुस्लिम कन्या को गिरफ्तार कर शिवाजी के पास लाते हैं। क्रुद्ध शिवाजी उस सरदार को खरी खोटी सुनाते हुए उसे पद से बेदखल कर देते हैं। उस मुस्लिम औरत को मेहमान की तरह रखते हैं, ससम्मान तोहफों सहित उसकी वापसी का प्रबंध करते हैं और अपने सरदार की धृष्टता के लिए बार बार क्षमा मांगत्ते हैं।

शिवाजी को उन लाखों हिन्दू औरतों का ख्याल क्यों नहीं आया जो मुगलों की हवस का शिकार बनी। उनकी दासी बनी। मुगल पुरुषों के बेशुमार अत्याचार झेलते हुए, हंटरों की मार खाते हुए सीरिया, अफगानिस्तान, ईराक और दूरदराज के इलाकों में बेचीं गयीं।

मैं ये नहीं कहता कि शिवाजी को भी वही करना चाहिये जो मुगल करते आये थे। शिवाजी को उस मुस्लिम औरत को केवल छोड़ देना चाहिए उसे ससम्मान विदा नहीं करना चाहिए, उससे क्षमा नहीं माँगना चाहिए। उसे मेहमानों जैसा आदर नहीं देना चाहिये। उसे पकड़कर लाने वाले सरदार को अपमानित कर पद से नहीं हटाना चाहिए।

इस मामले में शिवाजी का चरित्र मुझे बेहद कमजोर लगता है। क्या आज तक किसी मुगल ने किसी हिन्दू स्त्री को शिवाजी जैसा सम्मान दिया ?

वास्तव में शिवाजी के इस कृत्य ने मुगलों को एक संदेश ये दिया कि मुगल मजहब हिन्दू औरतों और बच्चों से जैसा चाहे वैसा खेलें पर हिन्दू मुस्लिमों के औरतों और बच्चों को हाथ तक नहीं लगायेगा और ये रिवाज़ आज तक चला आ रहा है। आज भी दंगों में हिन्दू मुस्लिम औरतों और बच्चों को छूता तक नहीं। वहीं अगर कमजोर पड़ जाये तो मुगलों का सामूहिक बलात्कार भी अपनी औरतों पर बरदाश्त कर लेता है।

शिवाजी ने एक कमजोर मैसेज और दिया कि मुस्लिम औरतों को लेकर हम युद्ध नीति और कूटनीति दोनों में काफी कमजोर हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं कि शिवाजी ने मुगलों के खिलाफ हिंदुओं को एकजुट होकर लड़ने के लिए प्रेरित किया पर वो भी हिंदुओं की चारित्रिक कमियों से लबरेज थे।

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