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गोदना या tattoo

Byadmin

Jun 20, 2021

:-: गोदना या tattoo :-:

महाभारत काल में श्री कृष्ण गोदनहारीन का रूप धारण करके राधा जी को गोदना गोदने गए थे।गौड़, टोडो,बैगा,वादी,देवार, भाट, कंजर,बंजारा,रामनामी,मलार आदि जैसी हज़ारो जातियां ,जिन्हें 1950 की दुर्घटना के बाद से शोषित और पिछड़ा प्रमाणित किया गया,इन सबके शरीर के कई भागों पर गोदना बना रहता हैं।फौज या पुलिस की नौकरी यानि क्षत्रिय वाला काम,जिसमें अनुशासन होता हैं या फिर अन्य प्रशासनिक कार्य जैसे ब्यूरोक्रेट्स ,और कई सरकारी विभागों में ,जिसके पूरे शरीर या फिर शरीर के कुछ भागों पर टैटू बना हो,वह यह सब कार्य करने के अयोग्य हो जाता हैं।अलग अलग सरकारी विभागों के अलग अलग नियम है, जो सँविधान में लिखे हुए हैं।कई नियमों में संशोधन भी हुआ,लेकिन फ़िर भी हमारे देश की बड़ी आबादी को संवैधानिक षड्यंत्र के तहत पिछले 70 वर्षो से ,केवल शरीर पर टैटू होने के कारण ,महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं से वंचित रखकर,उनका मानसिक,आर्थिक और सामाजिक शोषण किया गया।हमारे देश में ,इन जातियों में सबसे अधिक महिलाओं के। शरीर पर ,गोदना गुदा ही होता हैं।इन संवैधानिक नियमों की आड़ में,महिलाओं को भी आगे बढ़ने से रोका गया।सनातन में गोदना बनाना शुभ और सेहत के लिये अच्छा माना जाता हैं, इसलिये हमारे भगवान श्री कृष्ण स्वयं भी गोदना बनाते हैं।जनजातियों की सनातन प्रथा को समाप्त करने के लिये यह कानून बनाया गया।जब हम गोदना गुदवाए,तो हम पिछड़े हो गए और आधुनिक पीढ़ी टैटू बनवाये,तो वह फैशन हो गया।
धन्यवाद बदला नहीं बदलाव चाहिए

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