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जनेऊ या यज्ञोपवीत

Byadmin

Jul 24, 2021

:-: जनेऊ या यज्ञोपवीत :-:
कोई भी स्त्री,पुरुष या किन्नर जो अपने गर्भाधान की आयु से मतलब कि 7 वर्ष 9 महीनें से ज्यादा बड़ा हो,उसका जनेऊ संस्कार हो सकता हैं।जनेऊ धारण के कुछ प्रमुख नियम हैं :-

  • ब्राह्मण(शासन, प्रशासन सम्बंधित),क्षत्रिय(आर्मी और अन्य सुरक्षा दल) और वैश्य(व्यापारी),इन तीनों का सार्वजनिक जीवन होने के कारण,इन्हें हल्दी लगी जनेऊ दिन में कम से कम दो या अधिक बार बदलनी ही चाहिए।
  • शुद्र यानि सामान्य कर्म वाले व्यक्ति दिन में कम से कम एक बार जनेऊ अवश्य बदले।
  • महिलाएं माहवारी के समय जनेऊ धारण न करें।
  • जनेऊ की उपलब्धता न होने या फ़िर जनेऊधारण करने में निष्क्रियता होने पर शुद्र द्वारा काले धागे को भी जनेऊ समझ कर धारण किया जा सकता हैं, लेकिन वह उसे भी सप्ताह में एक बार अवश्य बदले।
  • जनेऊ धारण करने के बाद सभी को सभी प्रकार के यज्ञ करने का अधिकार हैं।
  • जनेऊ की पवित्रता,अखंडता और सात्विकता को बनाये रखने का कर्त्तव्य जनेऊधारी का हैं, ऐसा न करने की स्थिति में वह व्यक्ति अपने सभी अधिकार खो देता हैं, यह नियम सभी वर्णों पर लागू होता हैं।

धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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