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जीवन दुःख नही है वासना दुःख है

Byadmin

Oct 24, 2020

🙏जीवन दुःख नहीं है, वासना दुःख है।
जितनी ज्यादा वासनाएं होंगी, उतना ज्यादा दुःख होगा।
कोई मनुष्य अगर दुःखी है, तो उसे यह नहीं समझना चाहिए कि परमात्मा या ईश्वर उससे रुष्ठ है। वह अगर बहुत दुःखी है, तो इसका मतलब यह है कि परमपिता सिर्फ उसको यही संकेत दे रहे हैं कि उसके अंदर बहुत वासनाएं हैं। इसका तात्पर्य यह है कि जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी हमें यह समझ लेना चाहिए कि ये वासनाएं जब अतृप्त रह जाती हैं, तब दुःख के बड़े घाव हृदय में बन जाते हैं। ये वासनाएं ही हैं, जो मनुष्य को चौरासी लाख योनियों में जन्म-जन्मांतर तक भटकाती रहती हैं। अतः मनुष्य को चाहिए कि वासनारहित होकर परमपिता परमेश्वर के चरणों में स्वयं को सदैव समर्पित रखे और राग-द्वेष से रहित होकर परोपकारपूर्ण जीवन-कर्म करते हुए प्रभु चरणों में लीन हो जाए!
हरि ॐ

प्रिय बोलो मिलकर चलो सबसे करो सनेह।
कितने दिन का जीवन है कितने दिन की देह।।

🙏🌹 !! जय श्रीकृष्ण !!🌹🙏

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