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डा शवेता रस्तोगी के द्वारा रोग निवारण,धनिया (Coriander)

Byadmin

Dec 13, 2021

डा शवेता रस्तोगी के द्वारा रोग निवारण
धनिया (Coriander)

धनिया के हरे पत्तों और उनके बीजों को सुखाकर 2 रूपों में इस्तेमाल किया जाता है। हरे धनिये में जीरा, पोदीना, नींबू का रस आदि मिलाकर स्वादिष्ट बनाकर सेवन करने से अरुचि बंद हो जाती है। इससे भूख खुलकर लगती है और पाचन क्रिया (भोजन पचाने की क्रिया) तेज हो जाती है।
हरे धनिये की पत्तियों को सब्जी में डालकर सेवन करने से रक्त विकार नष्ट होते हैं। आंखों के लिए हरा धनिया बहुत ही गुणकारी होता है। हरे धनिये को दही और रायते में डालकर सेवन करने से भीनी-भीनी सुगंध महसूस होती है और दही, रायते व सब्जी का स्वाद अधिक बढ़ जाता है।

विभिन्न रोगों में उपयोग :

1. दस्त व कब्ज :

हरा धनिया, काला नमक, कालीमिर्च को मिलाकर चटनी बनाकर चाटने से लाभ मिलता है। यह चटनी सुपाच्य रहती है। उल्टी में धनिये को मिश्री के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है। पिसे हुए धनिये को सेंककर 1-1 चम्मच पानी से फंकी लेने से दस्त आना बंद हो जाता है। दस्तों में आंव, मरोड़, उल्टी, गर्भवती की उल्टी आदि आना बंद हो जाती है।

2. शरीर में जलन :

रात को 4 चम्मच धनिया और इतने ही चावल पानी में भिगों दें। इन्हें सुबह गर्म करके पीयें अथवा रात को धनिया भिगों दें और सुबह के समय मिश्री डालकर पीसकर छानकर पियें। इससे शरीर की गर्मी और पेट की जलन नष्ट हो जाती है।
रात को धनिये को पानी में भिगों दें और सुबह उठने पर उसे छानकर उसमें मिश्री डालकर पी जायें। इससे शरीर की गर्मी और पेट की जलन दूर हो जाती है।

3. मूत्र में जलन :

यदि तेज प्यास, पेट, शरीर या मूत्र में कहीं जलन हो तो 15 ग्राम धनिये को रात को भिगो दें। सुबह के समय उसे ठंडाई की तरह पीसकर मिश्री डालकर सेवन करें। इस प्रयोग से दिल की तेज धड़कन सामान्य हो जाती है। धनिया और आंवला रात में भिगोकर सुबह के समय मसलकर पीने से मूत्र की जलन दूर हो जाती है।

4. दमा-खांसी :

धनिया और मिश्री को पीसकर चावलों के पानी के साथ सेवन करने से दमा और खांसी के रोग में लाभ मिलता है।

5. चेचक की गर्मी :

चेचक की गर्मी निकालने के लिए धनिया और जीरा पानी में डालकर रात को मिट्टी के बर्तन में भिगो दें। सुबह उस पानी में चीनी मिलाकर पियें। इससे मल साफ आता है तथा चेचक की गर्मी शान्त होती है।

6. गर्मी के रोग :

रात के समय मिट्टी के बर्तन में 2 गिलास पानी 5 चम्मच सूखा धनिया भिगो देते हैं। सुबह के समय इसमें स्वाद के अनुसार मिश्री मिलाकर पियें। इससे गर्मी के रोग समाप्त हो जाते हैं।

7. अनिद्रा :
चीनी और पानी के साथ हरे धनिये को पीसकर रोगी को पिलाने से सिर दर्द दूर होने के साथ ही अच्छी नींद आती है।

8. मासिक-धर्म अधिक मात्रा में आना :

लगभग 20 ग्राम धनिया को 200 ग्राम पानी में डालकर उबालें जब 50 ग्राम पानी शेष रह जाए तो इसे छानकर इसमें मिश्री मिलाकर रोगिणी को सेवन करा दें। इस प्रयोग से मासिक-धर्म में अधिक खून का आना बंद हो जाता है।
10 ग्राम सूखा धनिया लेकर लगभग 200 ग्राम पानी में उबालते हैं। जब यह एक चौथाई की मात्रा में रह जाए तो इसे छानकर इसमें खाण्ड (चीनी) मिलाकर हल्के गर्म पानी के साथ सुबह के समय 3-4 बार रोगी को पिलाने से मासिक-धर्म का ज्यादा आना कम हो जाता है।

9. स्वप्नदोष :

धनिये को पीसकर मिश्री में मिलाकर ठण्डे पानी से सेवन करने से स्वप्नदोष, मूत्रजलन, सूजाक और उपदंश में लाभ होता है जो लोग चाहते हैं कि काम वासना अधिक न सताएं वे लोग 2 ग्राम सूखा धनिया पीसकर पानी मिलाकर कुछ दिनों तक पीयें अथवा सूखा धनिया पीसकर छान लेते हैं। इसमें बराबर मात्रा में पिसी हुई चीनी मिलाएं सुबह के समय खाली पेट बासी पानी से 1 चम्मच भर की मात्रा में फांक लेते हैं तथा 1 घंटे बाद कुछ भी खाते-पीते नहीं हैं। इससे स्वप्नदोष से छुटकारा मिल जाता है।
सूखा धनिया तथा मिश्री को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लेते हैं और किसी ढक्कनदार बर्तन में भरकर रख देते हैं। इस चूर्ण को 5-6 ग्राम के लगभग, ताजा पानी के साथ सुबह-शाम कुछ दिनों तक लेने से अनैच्छिक वीर्यपात, स्वप्नदोष आदि रोगों से मुक्ति मिल जाती है।

10. मुंह से दुर्गंध आना :

हरा धनिया खाने से मुंह में सुगंध रहती है। प्याज, लहसुन आदि गंध वाली चीजें खाने के बाद हरा धनियां चबाने से मुंह से दुर्गंध आना बंद हो जाती है।

हरा धनिये को खाने से मुंह की दुर्गंध खत्म होती है और मुंह में से सुगंध आती है।

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