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तीन किसान बिल के नए फार्म (रिफॉर्म) की जड़ क्या है?

Byadmin

Feb 7, 2021

तीन किसान बिल के नए फार्म (रिफॉर्म) की जड़ क्या है?? और राजनेता पवार,वाड्रा,सुखबीर,चिदम्बरम इससे क्यों चिंतित हैं??करीब-करीब सभी राजनैतिक नेताओं ने अपनी काली कमाई को सफेद बनाने के लिए अपने को किसान बताते हैं, इस नये कृषि कानून से वह अपनी काली कमाई छुपा नही पायेगें??:—
नई प्रणाली में, कृषि उपज के व्यापारियों को केंद्रीय प्राधिकरण (Central Agency) के साथ अपना PAN NO. पंजीकृत करना होगा।
प्रथम स्तर का लेनदेन (जो किसान और व्यापारी के बीच होगा) जीएसटी प्रणाली के दायरे से बाहर होगा। यहां तक कोई समस्या नहीं है!
धीरे-धीरे, आगे कृषि व्यापार कर रहे पंजीकृत व्यापारियों को, जीएसटी प्रणाली के दायरे मे लाया जाएगा। नतीजतन, कृषि उपज की बिक्री और पूरी आय सरकार के रिकॉर्ड में मिल जाएगी।

GAME यहाँ से शुरू होगा।:- किसान तो हमेशा आयकर और जीएसटी प्रणाली से मुक्त रहेंगे, लेकिन जो ट्रेडर्स (पंजीकृत व्यापारी) इन एग्रीकल्चर प्रोडक्ट को आगे अप-स्ट्रीम मे बेचते हैं उन्हे जीएसटी और इनकम टैक्स के दायरे में लाया जाएगा, उन्हे टैक्स का भुगतान करना होगा….

इसे यहाँ आसानी से समझने के लिए एक उदाहरण:
अगर सुप्रिया सुले और पी. चिदंबरम को अपने गमले में उगे अंगूर और गोभी को व्यापारियों को क्रमशः 500 करोड़ रुपये में बेचना है, तो उन्हें आयकर से छूट रहेगी, लेकिन उन्हें अपने आईटीआर में जिस व्यापारी को माल बेचा है, उसका PAN NO. बतलाना होगा।
ट्रेडर को अप-स्ट्रीम में माल को बेचकर अपनी आय पर 500 करोड़ रुपये आयकर और जीएसटी का भुगतान करना होगा!जबकि माल एक्चुअल होगा ही नही?
कल्पना कीजिए कि यदि कोई अंगूर और कोई गोभी है ही नहीं ( सिर्फ भ्रष्टाचार का पैसा है) तो स्वाभाविक रूप से, माल खरीदने वाला व्यापारी सुप्रिया सुले (शरद पवार की सुपुत्री) या चिदंबरम जैसे लोगों से जीएसटी और आयकर वसूल करेगा! (भाई, वो व्यापारी भला क्यों अपना नुकसान करके माल खरीदेगा,जिस पर उसे GST देना पड़े)
इसलिए, सभी सुले, सभी चिदंबरम, सभी सुखबीर सिंह बादल ,सभी भ्रष्ट नेताओं को, जो कमीशन एजेंट और दलाल हैं, उन्हें अपनी कृषि आय दिखाने के लिए अब एक बड़ी रकम का भुगतान इनकम टैक्स और GST के रूप में भुगतना होगा।

यही इस गमले में उगायी गए फल,सब्जियों रूपी रुपये का गोलमाल ही मामले कि जड़ है??इसलिए सारे भ्रष्टाचारी बिलबिला रहे हैं, यदि ये बिल लागू हुआ तो उनके भ्रष्टाचार से कमाए ख़ज़ाने में छेद हो जायेगा?
पंजाब और महाराष्ट्र में कृषिगत भ्रष्टाचार सबसे ज्यादा है, साथ ही राबर्ट वाड्रा के साम्राज्य का बड़ा हिस्सा हरियाणा में है, तो विरोध वहीं से ही ज्यादा आ रहा है!
यदि कल को अम्बानी या अडानी इन किसानों से माल खरीदते भी हैं तो उन्हें उस खरीद पर सरकार को GST और टैक्स देना होगा जो अब तक टैक्स से बचा हुआ था।
अब आप समझ सकते हैं कि सारे विपक्षी राजनेता आंदोलनकारियों की भीड़ इकट्ठा करने में इतना भारी धन क्यों खर्च कर रहे हैं??
अगर भारत से भ्रष्टाचार को आमूल चूल खत्म करना है, तो इस बिल के पीछे छुपी राष्ट्र_निर्माण की सही मंशा को समझना होगा और इस बिल का समर्थन करना ही होगा!!✍️ जय हिंद जय भारत भूमि

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