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तुलना के खेल में मत उलझो क्योंकि इस खेल का कोई अंत नही

Byadmin

Jun 23, 2021

तुलना के खेल में मत उलझो क्योंकि इस खेल का कोई अंत नही..!*

*जहाँ तुलना की शुरुआत होती है वहाँ आनंद और अपनापन खत्म होता है…..!

योगाभ्यासी योग साधना के मार्ग पर तीव्रता से आगे बढ़ता है और उसको ईश्वर भक्ति से प्राप्त होने वाले लाभ मिलना आरम्भ हो जात

योग शब्द का प्रयोग मुख्यतः आत्मा को ईश्वर के साथ जोड़ने को कहा जाता है। आत्मा को ईश्वर से जोड़ने का तात्पर्य है कि जीवात्मा को शुद्ध व पवित्र बनाकर उसका निरन्तर ध्यान करते हुए उसमें खो जाना जैसा कि हम यदा कदा अपने इच्छित विषय का ध्यान व अध्ययन करते हुए उसमें पूर्णतः खो जाते हैं। ईश्वर के गुणों व उसके उपकारों का जब हम ध्यान करते हुए एकाग्र हो जाते हैं और हमारे मन व अन्य सभी इन्द्रियों का बाह्य जगत से सम्पर्क सर्वथा टूटा हुआ होता है, तो यह योग की उन्नत अवस्था होती है। इस अवस्था को प्राप्त करने के लिए अनेक साधनों व उपायों का सहारा लेना होता है जिसमें यम व नियम योग की प्रथम सीढ़िया कहलाते हैं। बिना यम व नियम का पालन किये योग में स्थिति बनाना व सफलता प्राप्त करना सम्भव नहीं है। अतः इन्हें जानकर इनका पूरी निष्ठा व तत्परता से हर समय पालन करना आवश्यक होता है। यम अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य तथा अपरिग्रह हो कहते हैं। अंहिसा का अर्थ दूसरों के प्रति वैर अथवा विरोध की भावना को समाप्त करना, सत्य का ही पालन करना तथा असत्य व्यवहार से दूर रहना है। अस्तेय का अर्थ चोरी न करना अर्थात् छुप कर व प्रकट रूप में ऐसा कोई कार्य न करना है जो मर्यादा व आचरण के नियमों के विपरीत हो। ब्रह्मचर्य का अर्थ है कि अपनी सभी ज्ञान व कर्मेन्द्रियों को वश में रखना, उन्हें स्वेच्छाचार वा अमर्यादित आचरण से रोक कर ईश्वर के गुण-कीर्तन व चिन्तन-मनन सहित ईश्वर के अनादि काल से हम पर किये गये उपकारों को स्मरण करते रहना है। अपरिग्रह का अर्थ होता है कि आवश्यकता व सुख के साधनों का अधिक मात्रा में संचय न करना। अपरिग्रही जीवन ऐसा जीवन बनाना होता है कि जिससे कम से कम साधनों व धन से हमारा जीवन त्यागपूर्वक व्यतीत हो। इस अवस्था को प्राप्त करने के लिए हमें सांसारिक पदार्थों के प्रति मोह व संग्रह की भावना का त्याग कर ईश्वर को प्राप्त करने की अपनी इच्छा व भावना को मुख्य स्थान देते हुए अपने सभी व्यक्तिगत व सामाजिक कर्तव्यों को पूरा करना होता. है।

।।ख़ुशी उनको नही मिलती
जो अपने ईरादे से
ज़िन्दगी जिया करते है

ख़ुशी उनको मिलती है
जो दुसरो की ख़ुशी के लिए
अपने ईरादे बदल दिया करते है।।

।।साकार मंजू।।

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