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तुलसी माला की महिमा

Byadmin

May 9, 2021

🌷 🌷 🌷 🌷 तुलसी माला की महिमा 🌷🌷🌷🌷

एक सत्य घटना पर आधारित ,,,,,,,,,

राजस्थान में जयपुर के पास एक इलाका है – लदाणा। पहले वह एक छोटी सी रियासत थी। उसका राजा एक बार शाम के समय बैठा हुआ था। उसका एक मुसलमान नौकर किसी काम से वहाँ आया। राजा की दृष्टि अचानक उसके गले में पड़ी तुलसी की माला पर गयी। राजा ने चकित होकर पूछाः

“क्या बात है, क्या तू हिन्दू बन गया है ?”

“नहीं, हिन्दू नहीं बना हूँ।”

“तो फिर तुलसी की माला क्यों डाल रखी है ?”

“राजासाहब ! तुलसी की माला की बड़ी महिमा है।”

“क्या महिमा है ?”

“राजासाहब ! मैं आपको एक सत्य घटना सुनाता हूँ। एक बार मैं अपने ननिहाल जा रहा था। सूरज ढलने को था। इतने में मुझे दो छाया-पुरुष दिखाई दिये, जिनको हिन्दू लोग यमदूत बोलते हैं। उनकी डरावनी आकृति देखकर मैं घबरा गया। तब उन्होंने कहाः

“तेरी मौत नहीं है। अभी एक युवक किसान बैलगाड़ी भगाता-भगाता आयेगा। यह जो गड्ढा है उसमें उसकी बैलगाड़ी का पहिया फँसेगा और बैलों के कंधे पर रखा जुआ टूट जायेगा। बैलों को प्रेरित करके हम उद्दण्ड बनायेंगे, तब उनमें से जो दायीं ओर का बैल होगा, वह विशेष उद्दण्ड होकर युवक किसान के पेट में अपना सींग घुसा देगा और इसी निमित्त से उसकी मृत्यु हो जायेगी। हम उसी की जीवात्मा लेने आये हैं।”

राजासाहब ! खुदा की कसम, मैंने उन यमदूतों से हाथ जोड़कर प्रार्थना की कि ‘यह घटना देखने की मुझे इजाजत मिल जाय।’ उन्होंने इजाजत दे दी और मैं दूर एक पेड़ के पीछे खड़ा हो गया। थोड़ी ही देर में उस कच्चे रास्ते से बैलगाड़ी दौड़ती हुई आयी और जैसा उन्होंने कहा था ठीक वैसे ही बैलगाड़ी को झटका लगा, बैल उत्तेजित हुए, युवक किसान उन पर नियंत्रण पाने में असफल रहा। बैल धक्का मारते-मारते उसे दूर ले गये और बुरी तरह से उसके पेट में सींग घुसेड़ दिया और वह मर गया।”

राजाः “फिर क्या हुआ ?”

नौकरः “हजूर ! लड़के की मौत के बाद मैं पेड़ की ओट से बाहर आया और दूतों से पूछाः’इसकी रूह (जीवात्मा) कहाँ है, कैसी है ?”

वे बोलेः हमारी सारी मेहनत बेकार हो गई । अब यह हमारे साथ नही जा सकता ।’वह जीव हमारे हाथ नहीं आया। मृत्यु तो जिस निमित्त से थी, हुई किंतु वहाँ हुई जहाँ तुलसी का पौधा था। और उसने मरते वक्त तुलसी को छू लिया जिससे अब यह हमारे साथ नही जा सकता। जहाँ तुलसी होती है वहाँ मृत्यु होने पर जीव भगवान श्रीहरि के धाम में जाता है। पार्षद आकर उसे ले जाते हैं।’

हुजूर ! तबसे मुझे ऐसा हुआ कि मरने के बाद मैं बिहिश्त (स्वर्ग ) में जाऊँगा कि दोजख (नरक ) में यह मुझे पता नहीं, इसलिए तुलसी की माला तो पहन लूँ ताकि कम से कम आपके भगवान नारायण के धाम में जाने का तो मौका मिल ही जायेगा और तभी से मैं तुलसी की माला पहनने लगा।’

कैसी दिव्य महिमा है तुलसी-माला धारण करने की ! इसीलिए हिन्दुओं में किसी का अंत समय उपस्थित होने पर उसके मुख में तुलसी का पत्ता और गंगाजल डाला जाता है, ताकि जीव की सदगति हो जाय।

विशेष,,,,,, इस कथा की सत्यता की जांच आप स्वयं इन बिंदुओं पर करे !
१. तुलसी को ” मोक्षदायिनी ” कहा है ! अतः विचार करें साधारण एवं पापी जीवात्माओं को ले जाने वाले यमगण क्या किसी ऐसी जीवात्मा को ले जा सकते है जिसको भाग्यवश तुलसी माता का स्पर्श मिला हो ?
मोक्षदायिनी शब्द का तात्पर्य है मनोविकारों से मुक्ति ( काम, क्रोध , मद, लोभ एवं मोह ) !
२, भागवान विष्णु को सर्वाधिक प्रिय है तुलसी और एकादशी की कथाओं में पंजीरी , केले के साथ तुलसी भी परशाद में दी जाती है ! इन कथाओं में यह भी कहा जाता है की इस व्रत को करने वाले विष्णु लोक जाएंगे या अन्य अनेक एकादशी की कथाओं में मुक्ति प्राप्ति भी बतायी गयी है !
३, कुरआन शरीफ में भी बताया गया है की बहिश्त यानि स्वर्ग से आये दूतों के हाथ में तुलसी देखि गयी थी ! ( पढ़े पवित्र कुरान == पवित्र कुरान में रैहान (तुलसी)
पवित्र कुरान में अनेक ऐसे वृक्ष, पौधे और फल इत्यादि का वर्णन आता है जिसमें इंसानों के लिये फायदे ही फायदे हैं। कुरान में वर्णित इन बहुपयोगी पौधों में ‘तुलसी‘ का भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। कुरान में रेहान यानि तुलसी का वर्णन दो स्थानों पर आया है, सूरह रहमान की 11वीं और सूरह वाकिया की 89 वीं आयत में।
सूरह रहमान की आयत में इस धरती पर पाये जाने वाले अल्लाह की नेमतों में तुलसी का नाम है तो सूरह वाकिया में इसका वर्णन जन्नती पौधे के रुप में हुआ है। यानि तुलसी उन बिशिष्ट पौधों में शामिल है जो इस धरती पर भी है और जन्नत में भी है। इसी से इस पौधे की फजीलत का पता चलता है। तुलसी को यह आला मुकाम हासिल हो भी क्यों न, क्योंकि इससे इंसान को तो हर तरह का फायदा तो पहुँचता ही है साथ ही यह पर्यावरण को भी स्वच्छ रखने में कारगर है।
कुरान के सूरह रहमान में इस पवित्र पौधे का जिक्र इस तरह आया है-
‘वल्अर्-ज व-ज-अहा लिल अनामि, फीहा फाकि हतुंव् वन्नख्लु जातुल् अक्मामि, वल्हब्बु जुल्-अस्फि वर्-रैहान, फबि-अय्यि आलाई रब्बिकुमा तुकज्जिबान !‘ यानि ‘और उसी ने खल्कत के लिये जमीन बिछायी, उसमें (धरती) मेवे और गिलाफ वाली खजूरें हैं, और भुस के साथ अनाज और रैहान (तुलसी), तो ऐ जिन्न और इंसान तुम दोनों अपने रब की कौन-2 सी नेमतों को झुठलाओगे?‘ (सूरह रहमान, 10-12)
इसी तरह सूरह वाकिया में तुलसी का वर्णन जन्नती पौधे के रुप में है। ‘‘अम्मा इन् का-न मिनल मुकर्रबीन, फरौहुव्-व रैहानु व्-व जन्नतु नअीम।‘‘ अर्थात्, ‘‘तो जो खुदा के निकटवत्र्ती हैं (उनके लिये) आराम, खुश्बूदार फूल और रैहान (तुलसी) है।‘‘ (सूरह वाकिया, 88-89)

४. यह भी कई पौराणिक कथाओं में पढ़ने को मिलता है की “धर्म को धारण ” किये हुए व्यक्ति को साधारण यमगण नहीं ले जाते है ना ही वे अपने भयावह रूप में आते है ! उन्हें स्वयं यमराज अथवा देवो के पार्षद ( शिव एवं विष्णु लोक ) आते है एवं शांति पूर्वक ले जाते है !
अब आप स्वयं विचार करे की ये घटना कहाँ तक सत्य हो सकती है !

विशेष। .. इस दंत कथा के द्वारा पाठकों को तुलसी के महत्त्व को समझना चाहिए
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” जीवन का सत्य आत्मिक कल्याण है ना की भौतिक सुख !”
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एक माटी का दिया सारी रात अंधियारे से लड़ता है,
तू तो खुदा का बनाया हुआ ” दिया” है, किस बात से डरता है…….
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जिस प्रकार मैले दर्पण में सूर्य देव का प्रकाश नहीं पड़ता है उसी प्रकार मलिन अंतःकरण में ईश्वर के प्रकाश का प्रतिबिम्ब नहीं पड़ता है अर्थात मलिन अंतःकरण में शैतान अथवा असुरों का राज होता है ! अतः ऐसा मनुष्य ईश्वर द्वारा प्रदत्त अनेक दिव्य सिद्धियों एवं निधियों का अधिकारी नहीं बन सकता है !
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“जब तक मन में खोट और दिल में पाप है, तब तक बेकार सारे मन्त्र और जाप है !”
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,,,,सच्चे संतो की वाणी से अमृत बरसता है , आवश्यकता है ,,,उसे आचरण में उतारने की ….
Note ; ! सर्वदेवमयी यज्ञेश्वरी गौमाता को नमन
जय गौमाता की
शरीर परमात्मा का दिया हुआ उपहार है ! चाहो तो इससे ” विभूतिया ” (अच्छाइयां / पुण्य इत्यादि ) अर्जित करलो चाहे घोरतम ” दुर्गति ” ( बुराइया / पाप ) इत्यादि !
परोपकारी बनो एवं प्रभु का सानिध्य प्राप्त करो !
प्रभु हर जीव में चेतना रूप में विद्यमान है अतः प्राणियों से प्रेम करो !
शाकाहार अपनाओ , करुणा को चुनो !

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