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दुनिया में धोखा या छल जैसा कुछ होता ही नहीं है

Byadmin

Mar 29, 2021

*अध्यात्म जगत का .. प्रेम विज्ञान यह कहता है कि इस दुनिया में धोखा या छल जैसा कुछ होता ही नहीं है ..*

*धोखा या छल शब्द का निर्माण किया गया है हमारे मोह ग्रस्त मन के द्वारा … झूठे अभिमान के सुख के व्यसनी  मन के द्वारा ..*

*हमारे मोह ग्रस्त मन के द्वारा यह सिर्फ मिथ्या आरोप है .. कि .. फला व्यक्ति ने हमें धोखा दिया , छल किया .. जबकि वास्तविकता यह है कि इस दुनिया में छल या धोखा जैसा कुछ होता ही नहीं है ..*

एक प्रयास — पिछले पोस्ट में हमने इस टॉपिक पर थोड़ी चर्चा करने का प्रयास किया था ..

तो चलते हैं एक बार फिर ..
  *प्यार में धोखा*  इस टॉपिक को और क्लियर करते हैं ..

तो आज की चर्चा करने के लिए मनोज साहनी के जीवन की  *मोह की कहानी*  का सहारा लिया जाएगा ..

घर की खराब आर्थिक स्थिति के कारण ..  बचपन में मुझे पढ़ाई करने का ज्यादा समय नहीं मिलता था .. क्योंकि पढ़ाई के साथ-साथ मुझे पिताश्री की दुकान पर भी समय देना पड़ता था .. जिसका परिणाम यह आया कि .. धीरे धीरे मैं पढ़ाई में बेहद कमजोर होता चला गया .. बहुत ही मुश्किल से हाई स्कूल पास कर पाया ..

जब मैं हाई स्कूल में था तब मैंने अपने टीचर से प्रश्न किया कि इस दुनिया में तो बहुत सारे ग्रेजुएट,  इंटेलिजेंट लोगों को भी नौकरी नहीं मिलती है .. तो मनोज साहनी को कैसे मिलेगी ..??
और यदि नौकरी मिलनी ही नहीं है तो पढ़ाई करने का फायदा ही क्या है ..

क्योंकि मुझे अच्छी तरीके से पता है कि  ये मनोज साहनी कभी भी डिग्री कॉलेज में एडमिशन नहीं ले पाएगा ..  ज्यादा से ज्यादा इंटर तक जा सकता है क्योंकि घर के हालात ही ऐसे हैं ..

तो उस दिन मेरे कोचिंग के टीचर ने .. मुझे बताया कि यदि तुम  मेहनत करो तो टेक्सटाइल डिप्लोमा में एडमिशन हो सकता है ..  जिसे करने के बाद में तुम्हें नौकरी मिल सकती है क्योंकि उनके कोचिंग के पढ़ने वाले किसी  लड़के का टेक्सटाइल डिप्लोमा में एडमिशन हो चुका था .. और उसी ने बताया था कि टेक्सटाइल डिप्लोमा पूरा करते ही तुरंत नौकरी मिल जाती है ..

लेकिन मनोज साहनी की पढ़ाई इतनी कमजोर हो चुकी थी कि हाईस्कूल भी बहुत मुश्किल से पास कर पाया  था …

ऐसे व्यक्ति के लिए .. इंटर साइंस साइड से पास करना और फिर डिप्लोमा एंटरेंस एग्जामिनेशन को पास करना .. यह बहुत ही कठिन टारगेट था ..

लेकिन अपना सपना पूरा करने के लिए .. परिवार को कर्ज के दलदल से बाहर लाने के लिए .. नौकरी पाने के लिए .. मेरे पास में सिर्फ एक ही विकल्प था .. टेक्सटाइल डिप्लोमा के एंट्रेंस एग्जामिनेशन को पार करना ..

और मैं अपने इसी टारगेट पर चलने लगा ..

लेकिन समस्या यह थी कि ..
बहुत मुश्किल से हाई स्कूल पास करने के बाद ..  जब मैं साइंस साइड से 11वीं में पहुंचा .. तो इंटर की फिजिक्स केमिस्ट्री मैथ , मेरे से झेली ही नहीं जा रही थी ..

क्योंकि रोज पिताश्री की दुकान पर जो तीन-चार घंटे मुझे बिताने पड़ते थे .. उसके कारण मेरे पास पढ़ाई का समय बहुत कम हो जाता था ..

इंटर की फिजिक्स केमेस्ट्री मैथ का लोड .. साथ ही डिप्लोमा एंट्रेंस एग्जामिनेशन को क्रॉस करने की पढ़ाई का लोड .. दूसरी तरफ .. पिताश्री की दुकान पर कार्य करना ..

यह दोनों विपरीत दिशा में मुझे खींच कर फाड़ रहे थे ..

अपनी पूरी ताकत लगाने के बाद भी यह दोनों एक साथ मुझसे झिल ही नहीं रहे थे ..

पढ़ाई को पकड़ता था तो पिताश्री के साथ अन्याय कर बैठता था ..
और पिताजी की हेल्प करने के लिए समय देता था तो पढ़ाई छूट जाती थी ..

उसी समय एक ऐसी घटना घटी कि .. अपनी पढ़ाई को ज्यादा समय देने के चक्कर में .. पिताश्री के साथ अन्याय हो गया .. एक दिन मैं सही समय पर, अपने पिताश्री की दुकान नहीं जा सका .. बाद में जब गया  तो पता चला कि उस दिन , काम के चक्कर में,  पिता श्री  खाना ही  नहीं खा सके ..

उस भावनात्मक घटना को देख कर ..  मेरे अंदर का पुत्र मनोज साहनी जाग गया और वह बहुत चिल्लाया .. उस दिन उसने मुझे बहुत लताड़ा , बहुत कुछ सुना दिया .. उस दिन उसने मुझे बहुत रुलाया ..

मनोज साहनी ..  जो औलाद अपने पिता को खाना भी ना खिला सके .. उसे तो चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए ..

और आखिरकार .. उस दिन ..  उस भाव दशा में ..  मनोज साहनी ने पढ़ाई छोड़ने का निर्णय ले लिया ..

और उस जमाने में मनोज साहनी इतना जिद्दी था कि .. उसने जो भी निर्णय ले लिया तो फिर उसे कोई भी बदल नहीं सकता था ..

जिद्दी मनोज साहनी ने पढ़ाई छोड़ने का निर्णय ले लिया है यह बात .. मनोज साहनी के बचपन के मित्र कान्हा को पता चल गई ..

और कान्हा की तो प्लानिंग हीं कुछ और थी ..

मनोज साहनी को अध्यात्म की दुनिया में लाने के लिए .. मथुरा लाना जरूरी था और मथुरा लाने के लिए टेक्सटाइल डिप्लोमा कराना जरूरी था ..

जब कान्हा ने यह देखा कि ये  मनोज साहनी तो उसकी प्लानिंग के विरुद्ध ..  पढ़ाई छोड़ने का ही कठोर निर्णय ले बैठा है .. तो ..

मनोज साहनी के,  बचपन के मित्र कान्हा ने .. इस दुनिया की , दूसरे नंबर की सुप्रीम पावर का इस्तेमाल किया ..

रामचरितमानस में दो चौपाई है ..

सभही नचावत राम गोसाई
नाचही नट मर्कट की नाई

नारी बिबस नर सकल गोसाई
नाचहि नट मर्कट की नाई

यानी सबसे सर्वोच्च सुप्रीम पावर .. राम जी .. यानी भगवान

और फिर दूसरे नम्बर की पावर .. स्त्री .. लड़की ..

और फिर कान्हा ने, मनोज साहनी कि अध्यात्म यात्रा के लिए ..  टैक्सटाइल इंजीनियर बनाने के लिए ..  अपनी इसी पावर का इस्तेमाल किया ..

मैं जिस सस्ते सरकारी स्कूल में पढ़ रहा था ..  उस स्कूल में अक्सर टीचर क्लास में ही नहीं आते थे और अक्सर पीरियड खाली रहते थे .. लेकिन मनोज साहनी, बिना टीचर के भी अपनी पढ़ाई करता रहता था ..

लेकिन जब पढ़ाई छोड़ने का निर्णय ले लिया गया तो .. खाली पीरियड में मेरा पढ़ाई करना कम हो गया ..

और कान्हा की करी गई प्लानिंग के तहत ..

1 दिन लगातार दो तीन पीरियड खाली रह गए .. कोई टीचर पढ़ाने नहीं आया .. उस खाली समय में,  मेरे साथ में पढ़ने वाले लड़कों ने,  उस दिन मनोज साहनी को खूब सुनाया ..

क्या यार साहनी .. जब देखो तब तुम पढ़ाई ही करते रहते हो .. इतना पढ़कर क्या कलेक्टर बन  जाओगे ..??
हम लोगों से ज्यादा बात भी नहीं करते हो ..
ऐसा बहुत कुछ बोल कर उन सब लोगों ने मनोज साहनी की कापी  किताब बंद करवा दी ..

और फिर वही एक टॉपिक ..
जो उस समय के लड़को के पास में होता है ..  लड़की ..  गर्लफ्रेंड ..  प्यार मोहब्बत ..

उस दिन ..  उन दो-तीन घंटे में .. उन सभी दोस्तों के द्वारा ..  जो ढेर सारी अपनी अपनी कहानियां सुनाई गई ..  उन सभी बातों ने,  मनोज साहनी के मूड को ही बदल दिया ..

फिर कान्हा ने .. तुरंत दूसरा स्ट्रोक मार दिया ..

और उसी दिन, जब मेरा मन, प्यार मोहब्बत लड़की की,  कल्पना की दुनिया में था .. 2 घंटे में ही .. मुझे ऐसी जगह पहुंचाया .. जहां पर आधे घंटे के लिए अकेले में एक लड़की से मुलाकात करा दी ..

वह लड़की बेहद सुंदर थी ..
मुझसे एक 2 साल उम्र में कम थी .. और उस लड़की को मैं बचपन से जानता था .. फिर बीच में ..  पिछले तीन चार साल कभी भी कोई बातचीत नहीं हुई थी ..

उस दिन .. उस लड़की से,  अकेले में, आधे घंटे के लिए ..  कान्हा ने मुलाकात करवा दी ..

और मनोज साहनी तो ऑलरेडी उस समय खयालों की दुनिया में था .. उसी आधे घंटे के दौरान ही उस खूबसूरत लड़की ने .. पहले तो थोड़ा ताना मारा कि ..  मनोज ..  क्या तुम्हें इशारों की भाषा समझ में नहीं आती है .. ??
और फिर ..  घुमा फिरा के यह बोल दिया कि मैं तुम्हें बचपन से प्यार करती हूं .. पिछले 2 साल से कितनी बार मैं तुम्हें यह समझाने की कोशिश कर चुकी हूं इशारों से .. लेकिन तुमने तो कभी मेरे ऊपर ध्यान ही नहीं दिया ..
और मनोज साहनी ने भी हामी भर दी .. और मनोज साहनी की आकर्षण की कहानी चालू हो गई .. जिसे दुनिया की भाषा में लव स्टोरी कहा जाता है ..

उस घटना के 15 – 20 दिन बाद ..  एक दिन वो लड़की फिर से मेरे घर आई ..
और इत्तेफाक से या फिर कान्हा की प्लानिंग के अनुसार .. उस दिन मै घर पर ही था .. इससे पहले भी वह कई बार,  मेरे घर आई थी लेकिन मैं कभी भी घर पर नहीं मिलता था ..  क्योंकि मेरी लाइफ ही इतनी बिजी थी ..

स्कूल कोचिंग और पिताजी की दुकान .. इन सब से मुझे कभी फुर्सत ही नहीं मिली ..

तो कान्हा की प्लानिंग के अनुसार .. उस दिन जब वह मेरे घर आई तब मैं घर पर ही था .. एक दूसरे को देख कर,  हम दोनों लोगों की खुशी का कोई ठिकाना नही था .. फिर आंखों से उसने इशारा किया और मेरे हाथ में , एक कागज का टुकड़ा थमाया और आगे बढ़ गई ..

बाद में मैंने जब ..  उस कागज के टुकड़े को खोल कर देखा तो करीब 2 पन्ने का,  लंबा सा वह एक लव लेटर था .. जिसे मैंने करीब 40 – 50 बार तो पढ़ा ही होगा ..

फिर उस लव लेटर का जवाब,  मैंने भी लिख कर रख लिया अपने पास कि अगली बार जब कभी मुलाकात होगी,  तब उसे दे दूंगा ..

इत्तेफाक से 20 – 25 दिन बाद हम दोनों की फिर मुलाकात हो गई .. और फिर हैंड टू हैंड .. लव लेटर का इंटरचेंज हुआ ..

उस जमाने में फोन तो थे नहीं ..
बात करने का सिर्फ एक ही जरिया था ..  मुलाकात या फिर लव लेटर ..

और सार्वजनिक तौर पर भी मुलाकात होना बहुत मुश्किल था ..  क्योंकि वह जब भी मुझसे मिलने घर आती थी ..  मैं घर पर मिलता ही नहीं था ..

इस तरह लव लेटर के माध्यम से,  वह लव स्टोरी चालू हो गई .. जिसके बारे में इस दुनिया में,  तीसरे किसी भी व्यक्ति को पता नहीं चला ..

एक दूसरे के लव लेटर पढ़ना .. और एक दूसरे के बारे में सोचना ..

अपने अंदर की जो भी फीलिंग होती थी .. उसे लेटर में लिखकर रख लेते थे और जब कभी भी 20 – 25 दिन में , सार्वजनिक मुलाकात हुई तो ..  एक दूसरे को,  हैंड टू हैंड लव लेटर का आदान प्रदान कर लेते थे ..

धीरे धीरे .. उस लड़की का मानसिक तौर पर संग इतना ज्यादा हो गया कि .. मनोज साहनी एक कल्पना की दुनिया में चलता चला गया .. उसी लड़की से शादी करने की इच्छा तीव्र होती चली गई ..

और उस लड़की से शादी करने की उस तीव्र इच्छा के कारण ही .. मेरा टारगेट ही बदल गया ..

कैसे भी,  कुछ भी करके ..  दुकान के साथ में,  पढ़ाई करके ..  मुझे टेक्सटाइल डिप्लोमा में एडमिशन पाना ही पाना है ..

इस तरह कान्हा ने ..  मेरे पढ़ाई छोड़ने के निर्णय को बदल दिया .. और उस लड़की से शादी करने के सुनहरे ख्वाब को दिखाकर ..  मुझे टेक्सटाइल डिप्लोमा में एडमिशन पाने के लिए बहुत तेजी से दौड़ा दिया ..

और मनोज साहनी कमर में रस्सी बांधकर इस टारगेट को पूरा करने के लिए कूद पड़ा ..

सवेरे 6:00 बजे उठना ..
और रात में ..करीब ढाई – तीन बजे सोना .. यानी सिर्फ 3 – साढ़े घंटे की नींद .. बाकी के 21 घंटे .. कोचिंग, स्कूल, दुकान , पढ़ाई .. और रोज करीब 20 – 25 किलोमीटर साइकिल चलाना .. यह दौर करीब एक साल चला ..

और आखिरकार 1 साल में ही मेरा टेक्सटाइल डिप्लोमा एंटरेंस एग्जामिनेशन क्लियर हो गया ..
डिप्लोमा इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन हो गया .. फिर  चार-पांच महीने पार भी हो गए ..

यानी कान्हा ..  जिस उद्देश्य से उस लड़की को मेरी लाइफ में लाया था वह उद्देश्य पूरा हो गया ..

उसके बाद .. एक लेटर के माध्यम से उस लड़की ने, मेरे सामने प्रश्न रखा कि .. यदि हमारे इस संबंध के बारे में , इस दुनिया को पता चल गया और मैं बदनाम हो गई तो क्या तुम मुझे स्वीकार करोगे ..??

उस लेटर को पढ़कर मनोज साहनी को ऐसा अनुभव हुआ कि जैसे .. किसी गहरी नींद से,  मुझे झकझोर के,  हिला कर जगा दिया गया हो ..  ख्वाबों का तिलिस्म टूट चुका था ..

मुझे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि पिछले एक डेढ़ साल में , मै कौन सी दुनिया में चला गया था ..??
मैं अपनी वास्तविकता को कैसे भूल गया .??
(अपनी दोनों बहनों की शादी करना और कर्ज के दलदल से परिवार को बाहर लाने का जो मेरा सपना था..)
मै अपने उस सपने को कैसे भूल गया ..??

एक बहुत गहरी नींद से .. मैं जाग तो गया लेकिन उसकी खुमारी उतारने में एक डेढ़ महीना लग गया .. मुझे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि पिछले एक डेढ़ साल में,  यह सब कैसे क्या  हुआ ..??

अब क्योंकि वो मोह की नींद टूट चुकी थी .. मुझे अपनी वास्तविक स्थिति का आभास,  वापस से हो गया था ..

तो मैंने दो पन्ने का एक लंबा सा लेटर लिखा .. और उस लड़की के संबंध से अलग हो गया ..

करीब 1 साल बाद .. मुझे पता चला कि मेरे से अलग होने के  एक दो महीने बाद ही .. उस लड़की का,  उसी के मोहल्ले में रहने वाले एक लड़के से प्रेम संबंध हो गया था .. उन दोनो के बीच संभवतः  शारीरिक सम्बन्ध भी हुए थे ऐसा मुझे पता चला …
जिसके बारे में उसके मोहल्ले में रहने वाले कई लोगों को पता चल गया .. बदनामी हुई , बहुत तरह की बातें निकल कर आई ..  घर से भाग जाने तक की प्लानिंग हो गई थी .. लड़की के पिता जी ने उसे मारा पीटा .. फिर बदनामी के कारण .. वो मोहल्ला छोड़कर चले गए .. फिर जल्द ही एक साल में उसकी शादी कही और कर दी गई ..

जैसे जैसे .. उसके बारे मुझे मालूम पड़ता जा रहा था .. मेरा गुस्सा बढ़ता जा रहा था ..
मनोज साहनी के अंदर का काला कुत्ता जाग गया .. और फिर वही सब कुछ .. भयंकर मानसिक हिंसा .. ढेरो मानसिक आरोप .. शिकायत ..

प्यार जैसा कुछ नहीं होता इस दुनिया में ..
पूरी दुनिया मतलबी है .. धोखेबाज है ..
स्वार्थी है ..  वासना की भूखी ..

वासना की भूख , मनोज साहनी से पूरी नहीं हुई तो ..  तुरन्त दूसरे लड़के को पकड़ लिया ..

मनोज साहनी के सीधे पन का नाजायज फायदा उठाया गया ..

यदि बचपन की दोस्त भी प्रेम नहीं निभा सकती ..  तो इस दुनिया में कौन निभाएगा ..??

और मनोज साहनी के अंदर का काला कुत्ता इतना ज्यादा गुस्से में  आ गया कि .. उस लड़की से  बदला लेने के लिए .. उसकी जिंदगी बर्बाद करने के लिए .. ऐसी खतरनाक प्लानिंग कर ली कि उसकी जिंदगी भी बर्बाद हो जाए और मनोज साहनी का कहीं नाम भी ना आए ..

वह तो अच्छा ये हुआ कि .. उस कुटिल प्लानिंग को जब मैं कार्यान्वित करने जा रहा था .. तो .. उसी समय , कान्हा ने एक विचित्र घटना करके मुझे रोक दिया ..

उस भयंकर गुस्से के दौर में .. जब मेरी खोपड़ी पर बदला लेने की जिद बहुत हावी थी .. और मैं वह भयंकर अपराध कर्म करने ही जा रहा था .. तो कान्हा ने मुझे वो करने से रोक दिया …

यदि उस समय,  मेरे कान्हा ने मुझे रोका नहीं होता तो वह अपराध कर्म हो ही जाता और यदि वह हो जाता तो ..  मैं जीवन भर,  कभी भी,  अपने आप को माफ नहीं कर पाता ..

वह पाप कर्म करने से तो मैं बच गया लेकिन .. उस लड़की के प्रति और पूरी लड़की जात के प्रति .. मेरे मन के अंदर भयंकर नफरत भर गई .. वो नफरत समय बीतने के साथ .. और बाकी परिस्थितियों के कारण ..  थोड़ा कम तो हुवा .. लेकिन भयंकर द्वेष , नाराजगी के रूप में दिल की गहराई में जमा हो गया … जो करीब 10 साल तक चली .. जब तक कि मैं अध्यात्म की दुनिया में नहीं आ गया ..

अध्यात्म में आने के बाद,  बड़े मालिक ने धीरे-धीरे ..  मेरे अंदर जमा बहुत सारी नफरतों को धो दिया .. ढेरों आध्यात्मिक अनुभव कराके ..

बेटा ..  इतनी सारी नफरतो को अपने दिल में रख के  .. तू क्यों जीवन भर , खुद को ही जलाता रहा  .. ??

बेवफा , धोखेबाज,  मतलबी,  स्वार्थी, वासना के भूखे भेड़िए .. आदि आदि ..  ऐसे सभी शब्द आरोप ..  सिर्फ सिर्फ और सिर्फ हमारे ही अंदर के अहंकारी काले कुत्ते के द्वारा बनाए गए हैं ..

अब उस लड़की के मैटर को ही ले लो ..

बेटा .. क्या तुमने फिल्में भी नहीं देखी थी ..??

फिल्मों में भी दिखाया गया है कि .. विलेन के डराने धमकाने के कारण, फिल्म की हीरोइन अपने प्रेमी के पास जाती है और कठोर भाषा का प्रयोग करती है .. और कहती है कि मैं तुमसे प्यार नहीं करती बल्कि फला व्यक्ति से, विलेन से प्यार करती हूं और उसी से शादी करूंगी .. उसके बाद जब वह हीरोइन विलेन के साथ में शादी कर रही होती है तब .. उस लड़की का प्रेमी आता है और अपनी प्रेमिका को, बेवफा मानकर .. गोली मार देता है ..

बाद में जब, उस व्यक्ति को सच्चाई का पता चलता है कि उस लड़की ने जो कुछ भी किया .. मेरी जान बचाने के लिए ही किया .. तब वह प्रेमी उस पश्चाताप के दर्द में खुद को भी  गोली मार लेता है ..

बेटा .. अध्यात्म जगत का .. यह डिम डिम घोष है कि .. हमारे अंदर का अहंकारी मन,  शिकायती मन ..  जितने भी आरोप शिकायत लगाता है ..
दूसरे लोगों के ऊपर ..
समय के ऊपर ..
भाग्य के ऊपर ..
भगवान के ऊपर ..
यह सभी आरोप .. सिर्फ मिथ्या आरोप है ..

किसी भी इंसान के द्वारा बोले गए,  कुछ विशेष शब्द सुनकर .. कोई बाहरी क्रिया देखकर .. या लोगो की बाते सुनकर ..

हम कैसे उस व्यक्ति के ऊपर,  धोखेबाज , दुष्ट होने का आरोप लगा सकते हैं  ..???

जबकि हम सिर्फ वह शब्द सुन पा रहे हैं ..  सिर्फ क्रिया देख पा रहे हैं  .. उसके पीछे का कारण तो हम देख ही नहीं पा रहे …

क्या हमारे पास वास्तविकता को देखने की ..  सत्य को देखने की नजर है ..??

किसी भी व्यक्ति के द्वारा बोले गए शब्द या क्रिया के पीछे का कारण,  वास्तविकता , सत्य देखने के लिए ..  जो नजर चाहिए .. वो  नजर,  बिना अध्यात्म,  बिना भजन संभव ही नहीं है ..

फिर भी हम सभी , मोह में अंधे लोग .. सिर्फ दूसरों पर आरोप लगाए जा रहे हैं .. ढेरों झूठे अभिमान का सुख लेते रहते हैं ..

बेटा .. हमारे अंदर का काला कुत्ता सिर्फ दो प्रकार के सुख पर जीता है .. 

1 — वासना का सुख

2 — झूठे अभिमान का सुख

इस दुनिया की तरह ..  मनोज साहनी भी भयंकर भ्रम के नशे में जी रहा था ..

उस कन्या मित्र से यदि स्थूल शारीरिक स्पर्श, स्थूल शारीरिक क्रिया नही हो पाई .. तो इसका मतलब यह नहीं था कि मनोज साहनी कोई बहुत बड़ा स्ट्रांग करैक्टर वाला व्यक्ति था .. या महान पवित्र प्रेमी था ..

वह स्थूल शारीरिक स्पर्श,  शारीरिक क्रिया , पाने की चाहत तो मनोज साहनी के अंदर भी बहुत तीव्र थी .. लेकिन परिस्थितियों ने,  समय के अभाव ने,  कान्हा ने यह इच्छा पूरी होने नहीं दी ..

तो मूढ़ , मोह ग्रस्त .. मनोज साहनी ने .. अपने आप को महान सच्चा प्रेमी मान लिया ..

उसे उस समय यह दिखाई नहीं दे रहा था कि सिर्फ स्थूल शारीरिक तौर पर ही स्पर्श की वो क्रिया नहीं हो  पा रही थी ..

वरना तो मानसिक तौर पर ..
मनोज साहनी ने भी ढेरों मानसिक कुकर्म किए थे ..

हमारे अंदर का अहंकारी,  शिकायती , काला कुत्ता कभी भी सत्य देखने देता ही नहीं है ..

उस लड़की का मेरे जीवन में आना और मेरे जीवन से जाना .. इन दोनों का कारण तो मनोज साहनी ने अपने बुद्धि से निकाल लिया था ..

पढ़ाई छोड़ने के निर्णय पर खड़े हुए मनोज साहनी को टैक्सटाइल डिप्लोमा इंजीनियरिंग कॉलेज के अंदर तक पहुंचाने के लिए वह लड़की आई थी ..

उसका काम पूरा हो गया तो वह चली गई ..

लेकिन एक प्रश्न का जवाब मुझे , अपनी बुद्धि से,  सालों तक नहीं मिला ..

कि .. वह लड़की, मनोज साहनी को लात मारकर क्यों गई ..

हमारे अंदर का काला कुत्ता भी विचित्र शिकायती प्रश्न पैदा करता है ..

एक तरफ खुद उस लड़की से कहता है कि हम दोनों साथ नहीं चल सकते ..  शादी नहीं हो सकती इसलिए हमारा अलग हो जाना ही बेहतर है .. मुझे भूल जाओ ..

और फिर जब मनोज साहनी के काले कुत्ते को यह पता चलता है कि मुझ से अलग होने के 2 महीने बाद ही ..  उस लड़की का,  उसी के मोहल्ले में रहने वाले लड़के के साथ में संबंध हो जाता है ..

तो मनोज साहनी के अंदर का काला कुत्ता गुस्सा जाता है ..??

क्यों भाई ..??

इसी को राग कहते है, मोह कहते है ..

मेरे साथ रहो ..
मेरी जिंदगी में रहो ..
तो भी मेरी तरह से ही जियो ..

और अलग हो जाने के बाद भी मेरी तरह से ही अलग हो ..

प्यार सिर्फ मुझसे करो .. सोचो मेरे बारे में ही .. और परिस्थिति बस यदि शादी किसी और से हो रही है तो कर सकते हो ..

लेकिन .. शादी करते समय भी तुम्हारी नजरें मुझे ही ढूंढे .. उस समय भी तुम्हारे मन में मेरा ही ख्याल हो ..

यह सभी विचित्र इच्छाएं होती है हमारे अंदर के काले कुत्ते की ..

ऐसी ढेरों विचित्र इच्छाएं,  जब हमारे काले कुत्ते की पूरी नहीं होती तो ..  हमारे अंदर का काला कुत्ता तुरंत सामने वाले व्यक्ति के ऊपर ..  बेवफा , धोखेबाज,  वासना का पुजारी,  पैसे का पुजारी आदि आदि  ढेरों आरोप लगा देता है ..

अध्यात्म में आने के बाद ..  जब अपने कान्हा से मेरी मानसिक मुलाकाते हुई .. तब उसने मुझे अनुभव कराया कि ..

बेटा .. वह लड़की , इस तरह से ट्रैक चेंज करके तुम्हारे जीवन से गई .. तो भी  9 – 10 सालों में .. तुम्हारे अंदर त्यागी,  कर्तव्यवान,  आदर्श पुत्र,  आदर्श भाई होने का कितना भयंकर अहंकार भर गया था ..

यदि वह लड़की शांति से तुम्हारे जीवन से चली जाती ..  बिना ट्रैक बदले,  चुपचाप किसी और से शादी करके चली जाती .. तो सोचो तुम्हारे अंदर कितनी जल्दी ..  ये कर्तव्य वान,  आदर्श पुत्र,  आदर्श भाई होने का अहंकार पैदा हो जाता ..??

क्योंकि तब तुम्हारे अंदर का काला कुत्ता यह बार-बार बोलता कि मैंने अपने परिवार के लिए ..  बहनों की शादी करने के लिए ..
ऐसी बेहद सुंदर लड़की का त्याग कर दिया जो मुझे टूटकर चाहती थी …

बेटा .. उस लड़की ने कुछ भी नहीं किया ..
जो कुछ किया मैंने किया बेटा ..
तुझे गले लगाने के लिए ..
तुझे अध्यात्म में लाने के लिए ..  देख पूरे जीवनकाल मैंने कहां-कहां पर , क्या-क्या किया है ..

तेरी अध्यात्म यात्रा के लिए मैंने उस बिटिया का हाथ कुछ समय के लिए छोड़ दिया .. और उस बिटिया को बदनामी के किस दौर से गुजरना पड़ा ..

जिस दिन मनोज साहनी को यह अनुभव हुआ कि .. मेरे कारण उस लड़की को बदनामी के उस दौर से गुजरना पड़ा ..
वह पश्चाताप का दर्द मेरे लिए असहनीय था ..

मनोज साहनी की अध्यात्म यात्रा के लिए ..  जो ढेरों अनुभव आवश्यक थे .. उन अनुभवों को कराने के लिए ..  उस लड़की को मेरे जीवनकाल में लाया गया और ले जाया गया ..

कान्हा ने , जब यह सारे अनुभव धीरे-धीरे मनोज साहनी को कराएं  .. तो जिस लड़की को मनोज साहनी जीवन पर्यंत नफरत करता आया था ..  वही लड़की के प्रति आहो भाव के आंसू थे मनोज साहनी की आंख में ..

उस लड़की के प्रति मेरे दिल में इतना पूजनीय भाव पैदा हो गया था कि मैं उसके पांव छूकर आंसुओं से क्षमा मांगना चाहता था .. लेकिन ऐसा स्थूल रूप में हो न सका ..

अध्यात्म .. किसी भी इंसान के दृष्टिकोण को ही पूरा बदल देता है ..

जिन जिन लोगों से हम जीवन भर नफरत करते आए थे ..  शिकायत आरोप लगाते आए थे .. वह सभी लोग हमारे लिए पूजनीय हो जाते हैं …

क्योंकि वास्तव में ..  वह सभी लोग अच्छे ही थे ..  पूजनीय ही  थे ..

लेकिन हमारे अंदर के अहंकारी,  शिकायती,  काले कुत्ते ने कभी इस सत्य को , वास्तविकता को,  देखने ही नहीं दिया ..

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