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दुष्ट प्रवृत्ति के लोगो को कैसे ठीक करे ? उनके साथ कैसे रहे ..?

Byadmin

May 4, 2021

प्रश्न — दुष्ट प्रवृत्ति के लोगो को कैसे ठीक करे ? उनके साथ कैसे रहे ..?? (पार्ट – 1)

एक प्रयास — पिछले 2 – 3 सालो मे , हमारे बहुत सारे भाई बहन हमारे संपर्क में आए, व्हाट्सअप पर जुड़े , मित्र बने .. इन सभी भाई बहनों के द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के कारण ही अलग अलग पोस्ट लिखे है ..

एक प्रश्न हमारे पास बार बार आता है कि फला व्यक्ति बहुत दुष्ट है .. जैसे — हमारी सास , बहू , पति, पत्नी , देवरानी , जीठानी, भाभी, ननद, पड़ोसी आदि आदि .. तो हम क्या करे ..??
उन्हें कैसे ठीक करे ..??

वैसे तो इस प्रश्न का उत्तर अनुभव में पाने के लिए, कम से कम 500 घण्टे का कथा श्रवण, रिकॉर्डिंग का श्रवण चाहिए (वो भी किसी एक ऐसे व्यक्ति के द्वारा बोली गई रिकॉर्डिंग जो सदगुरु अनुभव पाया हो, जिसकी आंख में कान्हा प्रेम के, सदगुरु प्रेम के आंसू हो ) और साथ ही, दो हजार घण्टे का भजन चाहिए .. जहां तक सम्भव हो , मुस्कुराते हुए मौन के साथ ..

फिर भी, एक छोटा सा प्रयास करते है .. और इस टॉपिक को समझने के लिए एक कहानी का प्रयोग करते है ..

कहानी …

एक राजा हाथी पर बैठकर अपने राज्य का भ्रमण कर रहा था, अचानक वह एक दुकान के सामने रुका और अपने मंत्री से कहा- “मुझे नहीं पता क्यों, पर मैं इस दुकान के स्वामी को फाँसी देना चाहता हूँ।”

यह सुनकर मंत्री को बहुत दु:ख हुआ, और आश्चर्य भी हुआ कि राजा के मन के अन्दर उस व्यापारी को मृत्यु दंड देने का अकारण विचार क्यों आया .??

अगले दिन, मंत्री उस दुकानदार से मिलने के लिए एक साधारण नागरिक के वेष में उसकी दुकान पर पहुँचा ..

उसने दुकानदार से ऐसे ही पूछ लिया कि उसका व्यापार कैसा चल रहा है? दुकानदार चंदन की लकड़ी बेचता था, उसने बहुत दुखी होकर बताया कि मुश्किल से ही उसे कोई ग्राहक मिलता है। लोग उसकी दुकान पर आते हैं, चंदन को सूँघते हैं और चले जाते हैं। वे चंदन कि गुणवत्ता की प्रशंसा भी करते हैं, पर ख़रीदते कुछ भी नहीं .. अब उसकी आशा केवल इस बात पर टिकी है कि राजा जल्दी ही मर जाए तो उसकी अन्त्येष्टि के लिए बड़ी मात्रा में चंदन की लकड़ी खरीदी जाएगी, वह आसपास अकेला चंदन की लकड़ी का दुकानदार था, इसलिए उसे पक्का विश्वास था कि राजा के मरने पर उसके दिन बदलेंगे।

अब मंत्री की समझ में आ गया कि राजा उसकी दुकान के सामने क्यों रुका था और क्यों दुकानदार को मार डालने की इच्छा उसके मन में आयी थी.. क्योंकि वो दुकानदार, राजा के मरने की दुवा मांग रहा था..

इसीलिए दुकानदार के अंदर के नकारात्मक विचारों की तरंगों ने राजा पर वैसा ही प्रभाव डाला था, जिसने फलस्वरुप राजा के मन में दुकानदार के प्रति मृत्यु दंड का विचार आया..

बुद्धिमान मंत्री ने इस विषय पर कुछ क्षण तक विचार किया… फिर उसने अपनी पहचान और पिछले दिन की घटना को बताये बिना , अपनी तरफ से कुछ चन्दन की लकड़ी ख़रीदने की इच्छा व्यक्त की .. दुकानदार बहुत खुश हुआ। उसने चंदन को अच्छी तरह कागज में लपेटकर मंत्री को दे दिया।

जब मंत्री महल में लौटा तो वह सीधा राज दरबार में गया, जहाँ पर राजा बैठा हुआ था.. तब मंत्री ने राजा को बताया कि महाराज, कल राज्य भ्रमण के दौरान आप जिस दुकानदार को फांसी की सजा देने के लिए कह रहे थे, आज मैं उस व्यापारी से मिलने गया था ..

वो चंदन की लकड़ी का व्यापारी है .. चंदन की लकड़ी के दुकानदार ने , आपके लिए एक भेंट भेजी है .. राजा को आश्चर्य हुआ, जब उसने बंडल को खोला तो उसमें सुनहरे रंग के श्रेष्ठ चंदन की लकड़ी थी .. और उसकी सुगंध को देखकर राजा बहुत प्रसन्न भी हुआ ..

और फिर राजा को ये पश्चाताप भी हुआ कि वो व्यापारी कितना अच्छा व्यक्ति है.. अपने राजा के प्रति उसके मन में इतना आदर भाव है .. और ऐसे भले इंसान के लिए, मेरे मन में उसे फांसी की सजा देने का विचार आया ..

फिर उसके बाद, राजा ने प्रसन्न होकर चंदन के व्यापारी के लिए कुछ सोने के सिक्के भिजवा दिये

जब दुकानदार को राजा से सोने के सिक्के प्राप्त हुए, तो वह भी आश्चर्यचकित हुआ, और वह राजा के गुण गाने लगा जिसने सोने के सिक्के भेजकर उसे ग़रीबी के अभिशाप से बचा लिया था। कुछ समय बाद उस व्यापारी को अपने उन कलुषित विचारों की याद आयी जो वह राजा के प्रति सोचा करता था.. उसे अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए ऐसे नकारात्मक विचार करने पर बहुत पश्चात्ताप हुआ।

एक समझदार मंत्री ने, अपनी सूझबूझ से, राजा और व्यापारी दोनों के दिलो के मैल को धो दिया .. और दोनों के दिलो मे प्रेम की, कृतज्ञता भाव की उत्पत्ति कर दी

यह सिर्फ कहानी नहीं है बल्कि हमारे जीवन की सच्चाई है…

सत्संग के अभाव में हम सभी लोग जीवन भर सिर्फ कुसंग ही करते आए और इस कुसंग के कारण …

हमारे अन्दर बहुत सारे लोगो के प्रति, जीवन के प्रति, भगवान के प्रति … ढेरों भ्रम, संशय , शिकायत, द्वेष, नफरत, का मैल बढ़ता चला गया ..

और जैसे जैसे ये मैल बढ़ता गया, हमारे अन्दर की नफरत का असर.. निगेटिव एनर्जी का असर दूसरे लोगो पर पड़ता गया, बढ़ता गया.. और दूसरे लोगो के द्वारा हमारे लिए विपरीत व्यवहार बढ़ता गया ..

हमारी सभी समस्याओं का मूल कारण यही मैल है ..

और इसका निवारण है .. सदगुरु अनुभव पाया हुआ शिष्य, सदगुरु

जैसे इस कहानी में, जो कार्य वो बुद्धिमान मंत्री करता है .. वही कार्य हमारे जीवन में कोई शिष्य करता है .. सत्संग करता है ..

रामचरिमानस में एक चौपाई है ..

जा पर कृपा राम कर होई
ता पर कृपा करहि सब कोई

इस चौपाई का मर्म भी यही है कि ..

जैसे जैसे हम लोग
कथा रूप राम
भजन रूप राम
शिष्य या संत रूप राम

का संग बढ़ाते है , तो हमारे अन्दर का मैल धुलता जाता है .. और

हमारे अन्दर भगवान राम के लक्षण …
मुस्कुराहट
मौन
विनम्रता
मैत्री भाव
प्रेम भाव आदि बढ़ता चला जाता है .. और हमारे अन्दर ये लक्षण जितना बढ़ता है .. लोगो का हमारे प्रति व्यवहार अपने आप बदलने लगता है धीरे धीरे ..

जैसे जैसे सत्संग , भजन का अनुभव बढ़ता है .. धीरे धीरे हमे ये अनुभव होने लगता है कि ..

जिन लोगो को हम लोग, दुष्ट राक्षस समझते थे, मन ही मन बोलते थे … वास्तव में , वो व्यक्ति खराब है ही नहीं ..

क्रोध में चिल्लाने वाला वो इंसान, या कुछ अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाला वो व्यक्ति, वास्तव में अपराधी नहीं है .. बल्कि अपनी परिस्थितियों में फंसा हुआ एक मजबूर इंसान है ..

मै कहता निज नयन की देखी ..

यदि मै अपना अनुभव कहूं तो यही कहूंगा कि .. बिना अध्यात्म के मनोज साहनी ने जो 28 साल की उम्र बिताई .. सिर्फ नरक जैसी जिंदगी .. ढेरों समस्याएं ही समस्याएं … ढेरों दुश्मन ही दुश्मन ..

अध्यात्म में आने के बाद, जैसे जैसे सत्संग बढ़ता गया .. सदगुरु स्मृति बढ़ती गई .. वैसे वैसे धीरे धीरे बहुत सारे लोगो का व्यवहार भी बदलने लगा .. शत्रु दिखने वाले लोगो का व्यवहार भी मित्र जैसा होने लगा ..

और ये सिर्फ मेरा अनुभव ही नहीं है .. बल्कि उन बहुत से भाई बहनों का भी है .. जो पिछले तीन सालों में हमसे जुड़े .. और जिन्होंने इस प्रेम मार्ग पर चलने का प्रयास किया ..

लेकिन शुरुवात के डेढ़ दो साल, ऐसे बच्चो को , अध्यात्म के इस स्कूल में टिकाए रखना बहुत मुश्किल कार्य है ..

एक मां की तरह , संभालना होता है .. 😭

इस दुनियां की लगभग हर समस्या का समाधान प्रेम है ..

और प्रेम जगत का पहला ही सूत्र है कि .. किसी को भी सुधारने की , समझाने की चेष्टा ही न करो .. वो जैसा भी है .. उसे गले लगा लो ..😭😭 शारीरिक तौर पर यदि हम गले नहीं लगा सकते है तो … मानसिक तौर पर गले लगा लो ..

अध्यात्म का असर दिखने में करीब डेढ़ दो साल लग जाते है (प्रतिदिन कम से कम 2 घंटे रिकॉर्डिंग श्रवण करते हुए )

करीब डेढ़ दो साल बाद प्रतिफल आता है .. कि ..

एक बहन फोन करती है और कृतज्ञता भाव में रोती है कि .. भईया.. आज अनुभव है कि .. मैंने अपने पति को 9साल नहीं झेला है .. बल्कि मेरे पति ने मुझे 9 साल झेला है .. अब अनुभव होता है कि मेरे पति ने, बच्चो ने, इतने साल मेरे जैसे इंसान को कैसे झेला होगा .. और उसके साथ मनोज साहनी भी बहुत रोया .. बेटा, यही सत्य है .. ये सत्य मै तुम्हे 2साल पहले नहीं दिखा सकता था ..

एक बहन फोन करती है .. भईया, एक खुशखबरी दू .. इस बार की जन्माष्टमी पर , मेरे पति देव ही मेरे साथ बाजार गए, मेरे लड्डू गोपाल के लिए नई नई ड्रेस खरीदी, और मेरे साथ बैठकर उन्होंने जन्माष्टमी की पूजा भी करी … ये वही पति देव है जिन्होंने तीन साल पहले, जन्माष्टमी के दिन ही, गुस्से में, मेरे लड्डू गोपाल की मूर्ति को घर से बाहर फेंक दिया था … भईया , ये सब आपकी वजह से हुआ ..

नहीं बेटा ..😭😭 इसमें मनोज साहनी की कोई करामात नहीं है .. ये सब तुम्हारा किया है .. तुमने रिकॉर्डिंग सुन सुन कर, भजन करते हुए इस प्रेम मार्ग पर चलने का प्रयास किया .. जितना किया उतना पा लिया ..
ये सब प्रेम की करामात है ..

प्रेम .. प्रेम तो शेर जैसे हिंसक जीव पर भी असर करता है, वो तो फिर भी इंसान है ..

हम लोग जिसे दुष्ट राक्षस कहते है मानते है .. उनके वैसा होने में , 70 – 80 प्रतिशत योगदान तो हमारा ही होता है .. हम लोग अपनी जिद्द नहीं छोड़ पाते है , और उन इंसान का गुस्सा बढ़ाते रहते है .. इसीलिए वो और हिंसक होता चला जाता है ..

विनम्रता, प्रेम, लगभग हर समस्या का हल है ..

उस कहानी में जैसे वो समझदार, प्रेम से भरा मंत्री है .. वैसा कोई सदगुरु हमारे जीवन में आ जाए .. तो हर जगह प्रेम अपने आप फैलता जाता है ..

कान्हा प्रिय हो

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