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दो जजों की पीठ का फैसला था सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अहम बिंदु 20/3/18

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Oct 15, 2020

दो जजों की पीठ का फैसला था
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अहम बिंदु 20/3/18

  1. शिकायत पर तुरंत मुकदमा दर्ज नहीं होगा। पहले शिकायत की जांच डीएसपी स्तर के पुलिस अधिकारी  7 दिन में करेंगे। उसके आधार पर तय होगा कि केस बनता है या नहीं। 
  2. ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए सक्षम अथॉरिटी से गैर सरकारी कर्मचारी के मामले में गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से हो सकेगी। गिरफ्तारी की इजाजत लेने के लिए उसका कारण भी रिकॉर्ड पर रखना होगा।
  3. सरकारी कर्मचारी अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
  4. इन गाइडलाइन का उल्लंघन करने वाले अफसरों को विभागीय कार्रवाई के साथ अदालत की अवमानना की कार्यवाही का भी सामना करना होगा।
     इसमे सिर्फ जांच करने के लिए माननीय न्यायालय का आदेश था

लेकिन 2/4/18 को
sc st वर्ग के लोगों ने लाठी डण्डे से दुकानों लोगों पुलिस पर कहर बरपाया

मोदीजी जी ने संसद मे माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदलकर पुनः sc st act को संसद मे कानून बनाकर संविधान मे संशोधन किया
और इसे पुन मजबूत किया
जो जारी है अब यह संविधान बन गया है
sc st अत्याचार निवारण (संशोधित एक्ट) 2018

जिसे बाद मे सुप्रीम कोर्ट इसी मोदीजी के इस एक्ट के विरोध मे general +obc द्वारा न्यायालय मे अपील की
sc st act मे पहले जांच होनी चाहिये फिर गिरफ्तारी हो
जिसपर न्यायालय ने तीन जजों की पीठ ने
संविधान से बने कानून का पालन करते हुए अपील खारिज की

अत sc st act लगने पर बिना जांच बिना सबूत के आप को 6 महीने जेल होगी
जबकि हत्या करने पर 302 मे जांच पहले होती है फिर गिरफ़्तारी व जेल होगी

ऐसे चला घटनाक्रम
20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
02 अप्रैल 2018 को दलित संगठनों ने किया भारत बंद
01 अगस्त 2018 को कैबिनेट ने दी विधेयक में संशोधन को मंजूरी
06 अगस्त 2018 को लोकसभा से पारित हुआ विधेयक
09 अगस्त 2018 को राज्यसभा ने भी दी बिल को अपनी मंजूरी

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