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निकट भविष्य में चीन की पूरी तरह बर्बादी तय है।_

Byadmin

Oct 22, 2020

चीन का स्टॉक मार्केट अपने चार के न्यूनतम स्तर पर है. ट्रेड वॉर के बाद से पांच ट्रिलियन डॉलर चीन से बाहर जा चुका है. चीन के बाजार की हालत और भी खराब होती, लेकिन चीन की सरकारी एजेंसियां ही स्टॉक खरीद रही हैं. अगर लोकल बॉडीज और सेंट्रल एजेंसीज की खरीद को निकाल दिया जाए, तो चीन का स्टॉक मार्केट दस साल के न्यूनतम स्तर पर है।

औद्योगिक क्षेत्रों में लेबर खाली बैठे हैं। डंपिंग और टैरिफ ड्यूटीज के डर से दिन रात चलने वाले कारखाने बंद पड़े हैं। चीन ने अपनी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में फिलहाल पैसे लगाने से हाथ खींच लिए हैं। “वन रोड वन बेल्ट” के अलावा अन्य देशों में अपने बंदरगाह बनाने की परियोजनाओं को अस्थायी तौर पर रोक दिया गया है। भारतीय रुपये के मुकाबले चीन की करेंसी दस प्रतिशत ज्यादा गिरी है।

मैं ये क्यूं लिख रही हूं ?

इसलिए कि सोवियत संघ के पतन से पांच साल पहले यही सब शुरू हुआ था। दिखावटी चमक, हथियारों की प्रदर्शनी, गरीबी को कारपेट के नीचे धकेलने वाले माओ के चेलों का अंत नजदीक आ रहा है। इसका सबसे बड़ा योगदान ट्रंप और मोदी की जुगलबंदी का है। आप यकीन करेंगे कि जापान को होने वाले एल्यूमीनियम निर्यात में भारत ने आठ सौ प्रतिशत बढ़ोतरी की है।

वजह, वही टैरिफ। ये “ट्रेड वार” असल में भारत और अमेरिका का चीन के खिलाफ संयुक्त मोर्चा है। चीन इस हालात को एक साल भी नहीं झेल सकता। अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी।पहले ही एक नमूना सामने आ चुका है। श्रीलंका ने चीन को दिया बंदरगाह का ठेका वापस लेकर भारत को दे दिया है।

यूरोप में चीन के बाजारी और नौ परिवहन दखल को लेकर बेहद बेचैनी है। अगली इबारत वहां लिखी जाने वाली है।इस कोरोना काल में चीन निश्चित रूप से विश्व नजरों से उतर चुका है… निकट भविष्य में चीन की पूरी तरह बर्बादी तय है।_

ब्यूरो चीफ

दिनेश सिंह

आजमगढ़

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