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न्याय व जेल

Byadmin

May 19, 2022

:-: न्याय व जेल :-:
दंडस्वरूप जेल भेजना पीड़ितों के साथ छलावा हैं।अपराधी स्वभाव वाला व्यक्ति जेल जाकर सुरक्षित और तनावमुक्त हो जाता हैं,साथ ही समय पर भोजन,स्वास्थ्य लाभ व अन्य सुविधाएं मिलती हैं वो अलग।एक बार जेल जाने के बाद ही व्यक्ति न्यायाधीश से अधिक ज्ञान रखने लगता हैं।यह व्यवस्था अपराधियों को सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध करवाने हेतु कुटिलता पूर्वक रची गई हैं, इसमें पीड़ित को कुछ समय तो यह आभास होता हैं कि अपराधी को उसके किए का दंड मिल रहा हैं जबकि वास्तव में अपराधी तो मौज में हैं, पीड़ित ही जीवन भर कुड़ कुड़ कर मरता हैं, इसलिए देश विदेश सभी जगह अपराधी फलफूल रहे हैं, जिससे समाज में असंतोष फैल रहा हैं।मानवाधिकार की आड़ में अपराधियों को बढ़ावा देने वाली इस व्यवस्था का अंत निकट हैं।अपराधियों को सार्वजनिक रूप से चौराहें पर दंड देने वाली व्यवस्था ही पूर्णतः मनोवैज्ञानिक थी,जिसे क्रूर कह कर बंद कर दिया।क्रूर व्यक्ति के साथ क्रूरता वाला व्यवहार ही उचित हैं। वहीं व्यवस्था वापिस भी आएगी और विजय सत्य की ही होगी।
धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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