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न्याय

Byadmin

Mar 11, 2022

:-: न्याय :-:

अपने कार्यालय में,अपनी आँखों के सामने रिश्वत के लेनदेन को होते देख,न्यायाधीश का मुस्कुराना हो या पुलिस द्वारा अधिक गति से भागती हुई बस को देखकर ,मुँह फेर लेने का भाव औऱ ऐसी अनेकों अन्य बातें ,जो हम सभी ने अपने सामान्य जीवन में देखी व अनुभव की हुई हैं।जब रक्षक ही भक्षक बनकर प्रकृति व समाज का शोषण करने लगें, तो न्याय के लिए,वर्तमान व्यवस्था की ओर देखना, मतलब की अपने आप को मूर्ख बनाने के समान हैं।जब तक इस भ्रष्ट ब्रिटिश भारतीय व्यवस्था में बदलाव नहीं करेंगे,तब तक समाज व संस्कृति इसी तरह प्रदूषित होती रहेगी।
चोर से चाकरी करवाने की इस नीति ने,समस्त विश्व के समुदाय को,तामसिक प्रभाव से भृमित कर दिया हैं और सभी इस व्यवस्था को अंतिम सत्य मान बैठे हैं,लेकिन कितना भी घनघोर अंधेरा क्यों न हो,उसके बाद सुबह अवश्य होती हैं।विजय सत्य की ही होगी।
धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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