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पाखंडियों को पहचानिए

Byadmin

Jan 2, 2022

पाखंडियों को पहचानिए

2012 में केजरीवाल भारत के सबसे ईमानदार नेता थे और अब संपत्ति को आधार से लिंक करने की मांग वाली PIL का विरोध कर रहे हैं

मिशनरियों माओवादियों नक्सलियों, अलगाववादियों और आतंकवादियों को विदेशी फंडिंग दिलवाने के लिए कांग्रेस ने 2010 में #FCRA कानून बनाया था और वह कानून आज भी लागू है। जब तक #FCRA खत्म नहीं होगा तब तक अलगाववाद माओवाद नक्सलवाद और धर्मांतरण बंद नहीं होगा लेकिन सुबह से शाम तक हिंदू हित की बात करने वाले हिंदूवादी #FCRA खत्म करने की मांग नहीं करते हैं क्योंकि उनके NGO को भी विदेशों से फंडिंग मिल रही है

जिहादियों चरम पंथियों और मजहबी उन्मादियों की फंडिंग कालाधन और हवाला के जरिये होती है और जितनी बड़ी नोट होती है उतना ज्यादा भ्रष्टाचार हवाला बढ़ता है लेकिन सुबह से शाम तक जिहादियों के खिलाफ बड़ी बड़ी बातें करने वाले हिंदू हृदय सम्राट 100₹ से बड़े नोट बंद करने तथा भ्रष्टाचार हवाला के खिलाफ कठोर कानून बनाने की मांग नहीं करते हैं

आर्टिकल 14 कहता है कि भ्रष्टाचार-अपराध के खिलाफ विश्व का सर्वोत्तम कानून बनाओ और देश में समान कर संहिता, समान दंड संहिता, समान श्रम संहिता, समान पुलिस संहिता, समान न्यायिक संहिता और समान प्रशासनिक संहिता लागू करो लेकिन सफेदपोश भ्रष्टाचारियों और अपराधियों के दबाव में घटिया कानूनों पर संसद में सार्थक चर्चा ही नहीं होती है

आर्टिकल 15 कहता है कि जाति धर्म भाषा क्षेत्र और लिंग के आधार पर भेदभाव समाप्त करो लेकिन सरकारें जाति धर्म भाषा क्षेत्र और लिंग के आधार पर नियम कानून और योजनाएं बना रही हैं

आर्टिकल 16 कहता है कि नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में सभी युवाओं को समान अवसर दो और 12वीं तक समान शिक्षा (एक देश-एक शिक्षा बोर्ड और एक देश-एक पाठ्यक्रम) लागू किये बिना सभी युवाओं को समान अवसर उपलब्ध कराना नामुमकिन है लेकिन स्कूल माफियाओं, कोचिंग माफियाओं और किताब माफियाओं के दबाव में संसद में समान शिक्षा पर सार्थक चर्चा नहीं होती है

आर्टिकल 21 कहता है कि कालाधन भ्रष्टाचार हवाला नशा तस्करी मानव तस्करी और अन्य अपराधों को जड़ से समाप्त करने के लिए विश्व का सबसे कठोर और प्रभावी कानून बनाओ और ज्यूडिशियल रिफार्म करो लेकिन संसद में कभी इस पर सार्थक चर्चा नहीं होती है

आर्टिकल 25 कहता है कि कालाजादू, अंधविश्वास, कुरीतियों, कुप्रथाओं और साम दाम दंड भेद द्वारा धर्मांतरण रोकने के लिए कठोर कानून बनाओ लेकिन इस पर संसद में सार्थक चर्चा नहीं होती है

आर्टिकल 26 कहता है कि सभी भारतीयों का धार्मिक अधिकार एक समान है इसलिए पूरे देश में एक “समान धर्मस्थल संहिता” लागू करो लेकिन सरकारें 4 लाख मठ मंदिरों से एक लाख करोड़ चढ़ावा ले रही है और किसी मस्जिद मजार दरगाह चर्च से एक रुपया भी नहीं। यदि 4 लाख मठ-मंदिर सरकार से मुक्त हो जाएं तो 4 लाख गुरुकुल और वैदिक स्कूल, 4 लाख गौशाला, 4 लाख वेदशाला, 4 लाख व्यायामशाला, 4 लाख आयुर्वेदशाला और 4 लाख विवाह मंडप बनाया जा सकता है।

आर्टिकल 44 कहता है कि सभी भारतीयों का मानव अधिकार और मौलिक अधिकार एक समान है इसलिए विवाह की न्यूनतम उम्र सबके लिए एक समान होना चाहिए, विवाह विच्छेद (तलाक) का तरीका सबके लिए एक समान होना चाहिए, गुजारा-भत्ता सबको मिलना चाहिए, गोद लेने का नियम सबके लिए एक समान होना चाहिए, विरासत वसीयत और संपत्ति का नियम एक समान होना चाहिए लेकिन आजतक समान नागरिक संहिता का एक ड्राफ्ट भी नहीं बनाया गया। विकसित देशों में ही नहीं बल्कि गोवा में भी समान नागरिक संहिता बहुत पहले से लागू है फिर भी पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने पर संसद में सार्थक चर्चा होती है

आर्टिकल 47 कहता है कि भारत को नशामुक्त और शराब मुक्त राष्ट्र घोषित करो लेकिन सरकार हर गांव मुहल्ले में दारू का ठेका खोल रही हैं और कुछ सरकारें तो आजकल घर-घर शराब पहुँचा रही हैं। नशा और शराब के कारण भारतीय संस्कृति बर्बाद हो रही है लेकिन भारत और भारतीयता की बात करने वाले भी संसद में आर्टिकल 47 पर चर्चा नहीं कर रहे हैं

आर्टिकल 48 कहता है कि गौ वंश का संरक्षण करो और गौ हत्या को प्रतिबंधित करो लेकिन संसद में कभी भी इस पर गंभीर चर्चा ही नहीं होती है

आर्टिकल 51A कहता है कि कुरीतियों-कुप्रथाओं को खत्म करो और नागरिकों में वैज्ञानिक सोच विकसित करो लेकिन संसद में इस विषय पर कभी सार्थक चर्चा ही नहीं होती है

आर्टिकल 312A कहता है कि जजों की नियुक्ति के लिए IAS की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर IJS (इंडियन ज्यूडिशियल सर्विस) शुरू करो लेकिन आजतक IJS का एक ड्राफ्ट भी नहीं बनाया गया

आर्टिकल 351 कहता है कि हिंदी और संस्कृति भाषा का प्रचार प्रसार करो जिससे सभी भारतीयों को हिंदी और संस्कृति पढ़ना लिखना बोलना आ जाये लेकिन संसद में इस पर कभी भी चर्चा नहीं होती है

संविधान कहता है कि कालाधन हवाला भ्रष्टाचारअपराध घुसपैठ धर्मांतरण माओवाद अलगाववाद आतंकवाद और जनसंख्या विस्फोट को खत्म करने के लिए कठोर और प्रभावी कानून बनाओ लेकिन संसद में इस पर सार्थक चर्चा नहीं होती है

50% समस्याओं का मूल कारण भ्रष्टाचार है और तू-तू-मैं-मैं आरोप-प्रत्यारोप नूरा-कुश्ती करने से भ्रष्टाचार कम नहीं होगा। भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने के लिए 100₹ से बड़ा नोट और 5,000₹ से महंगे सामान का कैश लेनदेन बंद करना होगा। 50,000₹ से महंगी संपत्ति को आधार से लिंक करना होगा तथा कालाधन बेनामी संपत्ति और आय से अधिक संपत्ति 100% जब्त करने और भ्रष्टाचारियों को आजीवन कारावास देने के लिए कानून बनाना पड़ेगा लेकिन इस पर संसद में कभी सार्थक चर्चा नहीं होती है

पार्टियों और नेताओं के गुलाम अच्छी तरह समझ लें कि 1947 के नरसंहार में कोई नेता नहीं मारा गया था, 1990 के नरसंहार में कोई नेता नहीं मारा गया था, 2021 बंगाल इलेक्शन में कोई नेता नहीं मारा गया था, तालिबानियों द्वारा तख्ता पलटते समय भी कोई नेता नहीं मारा गया इसलिए 2047 में होने वाले नरसंहार में भी कोई नेता नहीं मारा जाएगा

डॉक्टर कितना ही अच्छा हो लेकिन जब तक दवा अच्छी नहीं होती तब तक बीमारी ठीक नहीं होती है। यदि घटिया कानूनों को नहीं बदला गया और बचे हुए 20% संविधान को तत्काल लागू नहीं किया गया तो 2047 में भयानक गृहयुद्ध होगा और लाखों लोग मारे जाएंगे

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