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पितृ पक्ष के नियम

Byadmin

Sep 23, 2021

:-: पितृ पक्ष के नियम :-:

  • अगर संभव हो तो पितृपक्ष के प्रत्येक दिन गीता जी के एक-एक अध्याय को पढ़े, नहीं तो 2 या 7 अध्याय तो पढ़ ही ले। * महिलाएं भी पिंडदान कर सकती हैं, जैसे सीताजी ने दशरथ जी का किया था। * कम से कम इन दिनों प्याज और लहसुन न खाएं।यदि आप शराब या मांसाहार लेते हैं, तो इन दिनों इसके सेवन से बचने का प्रयास करें। * धूप,इत्यादि पूजा कर्म दोपहर 12 बजे के आसपास करें, संध्या या रात्रि के समय में कतई न करें। * आज आप जो भी हैं या जैसे भी हैं, अपने पूर्वजों के कारण हैं, हो सकें, तो इन दिनों उनका स्मरण अवश्य करें। * अगर आपकी कोई कामना हैं, तो उसे मन में दोहराते रहें, आपके कर्मानुसार उस कामना का सकारात्मक परिणाम ,आपके पूर्वजों के माध्यम से आपकों मिल सकता हैं। * अगर समय हो तो अल्पकाल के लियें दोपहर की नींद अवश्य लें, उस समय आपके सपनों में आपके पूर्वजों के आने की संभावना अधिक हैं। * आपके अंदर आपके मातापिता,दादा परदादा यानि सात पीढ़ियों के गुणसूत्र (chromosome s) का प्रभाव रहता ही हैं, और उसी प्रभाव से आपके कर्म ,बीमारियां,आदि सभी नियंत्रित होते हैं, इसी गुणसूत्रों के मिश्रण को बताने के लिये, पिंड बनाकर उनका तर्पण किया जाता हैं,पिंड में चावल,हल्दी,शहद आदि सभी पदार्थ,सभी 11 इन्द्रियों, सभी विकारों, सभी पंचभूतों जिनसे शरीर बनता हैं ,के प्रतीक स्वरूप होते हैं, यह पूरी प्रक्रिया शरीर और आनुवंशिक विज्ञान को सरल भाषा में समझानें हेतु की जाती हैं।
    धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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