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:-: पेड़ :-:
वर्तमान आधुनिक विज्ञान ने वेद शास्त्रों ने चुराकर, यह तो बता दिया कि पेड़ो में भी जीवन हैं, लेकिन यह बताना भूल गया,कि पेड़ भी सामाजिक प्राणी हैं, उसमें भी काम,क्रोध,लोभ,मोह जैसी सभी भावनाएं हैं।वह अपनी जड़ों द्वारा विद्युत चुम्बकीय तरंगों के माध्यम से,अपने सजातीय पेड़ो से बात भी कर सकता हैं और जो व्यक्ति किसी पेड़ को जीवन देकर उसे विकसित करता,वह अपनी भावनाएं,ऐसे लोगों के सामने अभिव्यक्त भी करता हैं।लेकिन पाइपलाइनों,सीमेंटेड सड़कों और अन्य कारणों से ज़मीन के अंदर जो अवरोध पैदा किये गए हैं, उनसे पेड़ो को आपसी संवाद स्थापित करने में अड़चनें आती हैं, जिससे वो अकेलेपन और तनाव का शिकार हो जाते हैं और उनका समुचित विकास प्रभावित होता हैं, यह भी एक महत्वपूर्ण कारण हैं, जिसके कारण ,आजकल के पेड़,पुराने पेड़ो की तरह ज्यादा नहीं जीते।केवल पेड़ लगाकर,फ़ोटो खिंचवाने से कुछ नहीं होगा,उन्हें उनका पुराना वाला सामाजिक वातावरण भी लौटना पड़ेगा।नहीं तो जिस प्रकार आधुनिक विज्ञान और विकास के कारण,भावनाओं का लोप हो जाने से,मनुष्य, मनुष्य न रहकर केवल एक स्वार्थी मशीन बन गया हैं, वैसे ही पेड़ तो होंगे, लेकिन भावना शून्य हो जाने के कारण,हमें वो प्राकृतिक आनंद अनुभव ही नहीं होगा, जैसा पुराने पेड़ों के साथ होता था।

धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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