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प्राण पखेरू उड़ें फड़ाफड़ जीवन बाग जले है ‌।

Byadmin

Apr 15, 2021

प्राण पखेरू उड़ें फड़ाफड़
जीवन बाग जले है ‌।
हंसता क्रूर कुरोना दानव,
मानव हाथ मले है ‌।

कैसी कठिन कुबेला आई,
जीवन संग मृत्यु भी धाई
आगे आगे दौड़ रही है,
सब को पीछे छोड़ रही है,

बकरी शेर संग है बांधी
कैसे काम चले है ।
सतत आंधियों में अब कैसे
जीवन दीप जले है ।

प्राण पखेरू उड़ें फड़ाफड़
जीवन बाग जले है ‌।
हंसता क्रूर कुरोना दानव,
मानव हाथ मले है ‌।

तूफानी हो गई हवा है,
विष से भरी हरेक दवा है,
अमृत के बागीचे सूखे,
मृत्यु दूत फिरते हैं भूखे,

कब किसको खा जाएं दानव,
पता न यही चले है ।

प्राण पखेरू उड़ें फड़ाफड़
जीवन बाग जले है ‌।
हंसता क्रूर कुरोना दानव,
मानव हाथ मले है ‌।

हश्र आखिरी अब क्या होगा
किसे पता है कब क्या होगा
अब तो सुधरो ऐ मन प्यारे
हर दुख की भगवान दवा रे

होकर आर्त पुकारो रब को
दुनिया दिवस ढले है ।

प्राण पखेरू उड़ें फड़ाफड़
जीवन बाग जले है ‌।
हंसता क्रूर कुरोना दानव,
मानव हाथ मले है ‌।

ब्यूरो चीफ

दिनेश सिंह

आजमगढ़

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