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बहुत से भारतीयों की धारणा बदलेगी

Byadmin

Apr 11, 2021

इस पोस्ट को पढ़ने के बाद बहुत से भारतीयों की धारणा बदलेगी और धीरे-धीरे ऐसे मित्रों की संख्या बढ़ेगी, पूरे विश्वास के साथ कह रही हूँ॥

हम भारतीयों में एक बहुत पुराना रोग रहा है – “हमें क्या? हमारा इससे क्या लेना-देना?”
और यह रोग सैंकड़ों वर्षों बाद भी, आज भी व्याप्त है॥

अब आपको दिखाया जाएगा कि आपका क्या लेना-देना है और कैसे है॥

आप किसी मॉल में जाते हैं, सीसीटीवी के माध्यम से आपकी हर गतिविधि पर दृष्टि रखी जाती है
आपको विभिन्न सन्देशों के माध्यम से बताया भी जाता है: “मुस्कुराइए, आप सीसीटीवी की निगरानी में हैं”

इसमें कुछ अनुचित है? नहीं
क्या यह आपकी निजता का हनन है? नहीं
मॉल के स्वामी का अधिकार है अपनी सम्पत्ति की रक्षा के लिए प्रत्येक आने-वाले की गतिविधि पर पैनी दृष्टि रखे

» आप उस मॉल के अन्दर वस्त्रों के शोरूम में गए, वहाँ भी सीसीटीवी लगा है, शोरूम के स्वामी को भी अधिकार है दृष्टि रखने और अपनी सम्पत्ति की रक्षा करने का

» शोरूम के अन्दर एक ‘ट्रायल रूम’ है॥ आपने वस्त्र कुछ चुने और खरीदने से पूर्व आप उन्हें पहन कर देखना चाहते हैं॥ तो क्या ‘ट्रायल रूम’ में सीसीटीवी होना चाहिए? नहीं

» क्यों नहीं होना चाहिए? शोरूम उसके स्वामी की सम्पत्ति है और ‘ट्रायल रूम’ उस शोरूम के अन्दर है तो वह भी उसकी सम्पत्ति है तो वहाँ उसे सीसीटीवी लगाने का अधिकार नहीं होना चाहिए?

» नहीं, वहाँ ‘ट्रायल रूम’ में सीसीटीवी आपकी निजता का हनन होगा॥

» तो प्रश्न उठता है ‘निजता की सीमा’ कहाँ आरम्भ होगी और कहाँ समाप्त होगी?

» ‘निजता की सीमा’ का निर्धारण किसी एक पक्ष की ‘सम्पत्ति के अधिकार’ के अनुसार नहीं बल्कि दूसरे पक्ष की ‘अस्मिता और सम्पत्ति के अधिकार’ के अनुसार होगा

» जहाँ आपकी अस्मिता और आपका ‘सम्पत्ति का अधिकार’ आरम्भ होता है वहाँ किसी अन्य का ‘सम्पत्ति का अधिकार’ समाप्त … और वहीं आपकी ‘निजता की सीमा’ आरम्भ होनी चाहिए

मैंने कुछ अनुचित तो नहीं कहा?

कल्पना कीजिए, आपके घर में आपका किराएदार, आपकी गतिविधियों पर दृष्टि रखे और अवसर पाकर आपकी अस्मिता पर आक्रमण करे और आप प्रतिकार करें तो वह उत्तर दे कि उसका अधिकार है, उसकी नीति है, तब आप कैसा अनुभव करेंगे?

» जब एक विदेशी कम्पनी Google के कर्मचारी जो कि एक भारतीय है, ने फोन पर कहा, “कम्पनी का अधिकार है, कम्पनी की नीति है” तो…
» मुझे ऐसा अनुभव हुआ जैसे:
मेरे ही देश में, भरे दरबार में, दुर्योधन मुझसे कह रहा हो ‘द्रौपदी का चीर हरण’ उसका अधिकार है

तभी मेरे रक्त में एकाएक उबाल आ गया, मैंने प्रतिकार किया, “तुम्हारे बाप का राज नहीं है॥ मेरा भारत तुम्हारे पिताजी की जागीर नहीं है जहाँ तुम्हारी कम्पनी की मनमानी नीतियाँ चलेंगी॥ यदि आपकी कम्पनी को भारत में व्यापार करना है तो आपकी नीतियाँ भारतीय संविधान के अनुरूप होनी चाहिए”

बात यहाँ समाप्त नहीं हुई बल्कि आरम्भ हुई है॥ क्योंकि यह विषय #Net4India से जुड़ा है॥ क्योंकि अब चर्चा सामान्य भारतीयों के प्रश्न पर और धारणा पर आएगी:
“हमें क्या? हमारा इससे क्या लेना-देना?”

हमारा #Net4India के मामले से #CyberSpaceFraud से क्या लेना-देना?

जब विदेशी आक्रमण होते थे तब भी छोटे-छोटे प्रदेशों के राजा परस्पर मतभेदों विवादों के चलते यही धारणा रखते थे:

“हमें क्या? हमारा इससे क्या लेना-देना?”

अब आप पूछेंगे Net4India के मामले में अब Google कैसे आ गया?
हाँ, यह है न समझदारी का प्रश्न…

Net4 India की वेबसाइट में Google Analytics कोड का प्रयोग हो रहा था॥ अब आप कहेंगे इसमें क्या बुराई है? बहुत सी वेबसाइट करती हैं बल्कि यह तो बहुत अच्छा टूल है॥

तकनीकी ज्ञान न रखने वाले मित्रों की जानकारी के लिए ” #GoogleAnalytics वेबसाइट पर लगे हुए सीसीटीवी की भाँति है, जिसके माध्यम से वेबसाइट का स्वामी, वेबसाइट पर आने वाले व्यक्ति की प्रत्येक गतिविधि पर दृष्टि रख सकता है, जैसे वेबसाइट के किस लिंक अथवा बटन पर कब कहाँ क्लिक किया, कब कौन सा पेज देखा आदि …”

» Google Analytics कोड के प्रयोग में कोई बुराई नहीं है बल्कि अच्छा है… पर केवल वहाँ तक जहाँ वेबसाइट का सार्वजनिक क्षेत्र है॥ याद कीजिए सीसीटीवी और ‘ट्रायल रूम’ का उदाहरण …
जहाँ आपकी ‘निजता की सीमा’ आरम्भ होती है वहाँ GoogleAnalytics कोड का प्रयोग अनुचित है, अपराध है॥

» Net4 India, अपने ग्राहकों के Control Panel के अन्दर Google Analytics कोड का प्रयोग कर रहा था॥ Control Panel जहाँ से ग्राहक अपने Domain के प्रबन्धन सम्बन्धी कार्य करते हैं॥

» जैसे ही कोई ग्राहक अपने Domain का Auth Code निकालने के लिए उपयुक्त बटन पर क्लिक करता है, Net4 India की वेबसाइट के स्वामी, हम उसे ‘नटवर लाल’ कहेंगे, को पता चल जाता है

» अब उसके बाद Net4 India के सर्वर से एक ईमेल निकलती है जो उस ग्राहक के पास जानी है, अब वह ‘नटवर लाल’ उस ईमेल का अधिग्रहण कर लेता है (क्योंकि उसका सर्वर है जो उसके नियन्त्रण में है)

वह ईमेल जो Net4 India के ग्राहक के पास, Domain के स्वामी के पास जानी चाहिए वह नहीं पहुँचती

अर्थात् ‘बच्चा स्कूल से निकला, घर नहीं पहुँचा’

अब उक्त उदाहरण को और सहज विधि से बताता हूँ:

मान लीजिए कोई बैंक (हालांकि बैंक ऐसा नहीं करते, नहीं करेंगे, कोई करता होगा तो मेरी जानकारी में नहीं है) फिर भी मान लीजिए कोई बैंक, अथवा ऑनलाइन मार्केटप्लेस अमेज़न, फ्लिपकार्ट, टाटाक्लिक, जिओस्टोर, अथवा पेमेन्ट बैंक, पेटीएम, मोबिक्विक, फोनपे जैसे वॉलेट…
» Control Panel अथवा खाते के अन्दर से Google Analytics कोड अथवा कोई अन्य ट्रैकिंग कोड का प्रयोग करें … और जैसे ही आपने किसी ट्रान्सेक्शन के लिए क्लिक किया, OTP Generate किया…

और वह OTP मार्ग में ही किडनैप हो गया… ‘बच्चा स्कूल से निकला, घर नहीं पहुँचा’

=== उदाहरण के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है कि यदि कोई ऐसा करे तो? ===

Control Panel के अन्दर, Account के अन्दर Google Analytics का प्रयोग ‘अपराध’ है, ‘निजता का हनन’ है

Dear #Google आपने घायल शेर की मूँछों से खिलवाड़ किया है, अब उसका पंजा तो पड़ेगा

The war against #CyberSpaceFraud will intensify, will be very tough, very long but very interesting…

जो महँगी न हो, लम्बी न हो, कठिन न हो वह लड़ाई कैसी? अब आएगा असली मजा … #BreachOfPrivacy #GoogleAnalytics

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