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बार बार हजार बार आज के जगे हुए सोशल मीडिया वाले हिन्दू शेरो को आग्रह करती हूँ

Byadmin

Mar 26, 2021

बार बार हजार बार आज के जगे हुए सोशल मीडिया वाले हिन्दू शेरो को आग्रह करती हूँ कि मात्र जय श्री राम न बोलकर सीताराम या जय सियाराम बोले उसका कारण आज स्पष्ट आप लोग के सामने यह लेख दे रही हूँ यदि फिर भी नही समझ आए तो स्वयं राम भी नही समझा सकते ईश्वर को क्या जान पाओगे 🙏 अवश्य पढ़े समझ आए तो शेयर करे पुनः बोलती हूँ राम सीता के बिन अधूरे हैँ सीता राम के बिन अधूरे हैँ

देव तत्व होता है ता देने वाला होता है जिस तत्व की साधना से और जिस तत्व के ज्ञान से सब मिले जो तत्व सब देने के लिए भीतर ही मौजूद है वही है देव तत्व जो कहीं दूसरे लोक में नही शरीर के 7 चक्रों में बने 7 लोकों में बैठा है

तत्व का ज्ञान ही व्यक्ति को साधारण से असाधारण बनाता है शरीर में 5 तत्व है तो उन्हें जीतने वाला भगवान रूप हो जाता है शरीर में पंच कोष के पंच क्षेत्र को जीतने वाला क्षेत्रज्ञ है
आत्मा की ऊर्जा को साध लेने वाला ऊर्जावान है

अ से लेकर ज्ञ शब्द वर्णमाला ही देवता है इन्हीं का हर एक अक्षर अलग अलग देव तत्व से जुड़ा है इनकी वाईब्रेशन ही शरीर में लगे पॉइंट्स को जागृत करती है

मूलाधार चक्र में 369 hz की वाइब्रेशन होने पर ही स्पंदन होता है और ये जागता है

सहस्रार में 963 hz का स्पंदन काम करता है

हर चक्र के अपने शब्द अपने तत्व अपने ग्रह और अपनी ऊर्जा है इनका तालमेल बिठाने वाला ही योगी है बाकी सब बंडलबाज है ढोलक पीटने वाले या अंधभक्ति करने वाले लोग या नचनियां बनकर छक्कों की तरह ताली पीटने वाले तथाकथित कथावाचक ये सब नही जानते क्योंकि उनके कोर्स में ये सब नही होता

राम क्या है मणिपूरक चक्र का बीज मंत्र रं ही राम है इसी से राम शब्द की उत्पत्ति हुई
सीता क्या है कुंडलिनी रूपी शक्ति जिसे जगाया जा रहा है राम शब्द या रं शब्द के द्वारा और फिर रं शब्द कुंडलिनी के चक्र और ऊर्जा से जुड़ रहा है यही सीता है

राम – रकार अर्थ सगुण ब्राह्म, परम ऐश्वर्य के साक्षात् स्वरूप श्री रामजी है। मकार का अर्थ सर्व की सेवा और धर्म में निपुण पाँच प्रकार के नित्य मुक्त, बुद्ध, मुमूक्ष और केवल जीव है। तेज स्वरूप सर्वव्यापक भगवान् श्रीराम है। अखंड स्वरूप भगवान् श्री राम है, भक्तो के सभी कष्टों को हरने वाले सर्वात्मा भगवान् श्रीराम है। ‘रमन्ते योगिनो यस्मिन्’ जिसमे योगीगण रमते – अपने चित्त को लगाते हैं अथवा ‘रमन्ते सर्वेषु भूतेषु’ – जो सबके हृदय में विहार करते है, वे परमात्मा (ब्राह्म) राम कहलाते हैं।

सीता – ‘षिञ्बन्धने सिनाति- खण्डयति’ जो भव – बंधन की प्रणशिका है – उन महाशक्ति को सीता कहते हैं।

सीताराम – जो अंतरिक्ष, समय और शुद्धता की सीमाओं से परे होता है । राम सर्वत्र सर्वव्यापी चेतना, हमारे अन्दर एवं बाहर और पौरुष उर्जा हैं । सीता ब्रम्हाण्ड की शक्ति और स्त्री उर्जा है । वह (सीता ) कुण्डलिनी शक्ति हैं और राम सत्य एवं सदाचार हैं, अन्तः चेतना हैं , जिसमें लौकिक सत्ता से स्वयं को समाहित करने का अनुभव और प्रबोधन देने के लिए कुण्डलिनी शक्ति समाहित होती है ।
राम मणिपूरक चक्र का बीज मन्त्र है। यह आंतरिक अग्नि को प्रज्ज्वलित करता है। जो सभी शारीरिक, मानसिक और कार्मिक अशुद्धियों को साफ़ करता है । धरती माता से उत्पन्न सीता मूलाधार चक्र का प्रतिनिधित्व करती हैं । वे हमारी प्रणाली में पृथ्वी तत्व हैं वह मूलाधार चक्र में विद्यमान कुण्डलिनी शक्ति भी हैं । सीता राम का ध्यान हमें धन, स्वास्थ और प्रचुरता जीवन में देता है जो मूलाधार चक्र या सीता का आशीर्वाद होता है ।

हिन्दू परम्परा में राम ‘ मर्यादा पुरुषोत्तम ‘ सर्वोत्तम व्यक्ति माने जाते हैं और सीता उनकी पत्नी स्त्री जाति की सर्वोत्तम उदाहरण हैं । दोनों का उदाहरण सम्पूर्णता की उच्चता के लिए दिया जाता है । जिसे मानव जाति प्राप्त कर सकती है ।

सीता राम जी का नियमित ध्यान हमारे अध्यात्मिक मार्गों से हमें संपर्क में लाता है और ईश्वर के प्रति हमारी लालसा को बढाता है । सीता राम का आंतरिक जाप तंत्र की सभी नाड़ियों और चक्रों को तंत्रों में स्वच्छता और सामंजस्य स्थापित करते हुए स्पंदित करता है । तरंगें हमारे शारीर से विषाक्त पदार्थों को हटाती हैं और हमारे शरीर के असंतुलन में संतुलन लाती हैं । जैसे ही हम राम नाम का जाप करते हैं , हम शांति एवं विश्राम के गहरे पड़ाव का अनुभव करते हैं । नियमित जाप आदतन खिंचाव एवं तनावों को लुप्त करता है । हमारे नकारात्मक कर्म जलते और लुप्त होते हैं , और हमारा आंतरिक आनंद स्वयं में विकसित होना शुरू हो जाता है । जब हम सीता राम का नियमित एवं अनुशासित ढंग से ध्यान करते हैं , हम विपुल जीवन शक्ति और स्वयं को प्रदीप्त करते हुए परमानंद प्राप्त करते हैं । भक्ति या ईश्वर के प्रति प्रेम बढ़ता है । अहंकार का क्षय एवं समापन होता है । हम संसार में अपने नियमित कर्तव्यों को करते हुए प्रतीत होते हैं , फिर भी हम आतंरिक शांति एवं परमानंद में रहते हैं ।

सीता ऋणात्मक एवं स्त्रीत्व का पहलू हैं और राम ईश्वरत्व के धनात्मक और पुरुषत्व पहलू का पहलू हैं । जब सीता राम जी का ध्यान किया जाता है तो स्वयं स्त्रीत्व और पुरुषत्व पहलू संतुलित हो जाता है । मस्तिष्क के दोनों छोर संतुलित रहते हैं । यह चलायमान मस्तिष्क को स्थिर करने में सहायक होता है, मस्तिष्क शान्त हो जाता है और धीरे-धीरे विचार नियंत्रण में हो जाते हैं । यह व्यक्तित्व एवं चरित्र में उन्नति एवं पुष्टता लाता है । हम वाणी , कर्म एवं विचारों से एक हो जाते हैं । जो हम सोंचते हैं वही बोलतें एवं करते हैं । स्वयं में विचार, कर्म एवं वाणी का एकीकरण होता है । व्यवहार एवं आचरण में स्थिरता आती है । हम सरल एवं ज्ञानवान होते हैं । स्वयं में शक्ति बढ़ती है और पूर्णता विकसित होती है । सीता राम भौतिक एवं अध्यात्मिक संसार दोनों में उन्नति और समृद्धि लाता है ।

और ये सीता राम दोनों जुड़कर जब सहस्रार चक्र में बैठे परमात्मा शिव और पराशक्ति से जुड़ जाते है तब अर्धनारीश्वर रूप ही शेष रह जाता है जो आदि अनन्त और सबका मूल है ये ही इसकी व्याख्या है और सत्य भी

हर चीज शरीर के भीतर ही घटित होती है पर जो न तो तत्वज्ञानी है न ही जिसने कभी मन्त्र साधना योग साधना कुंडलिनी साधना पंच तत्व साधना पंचकोशिय साधना मूलचक्र साधना आदि की है वो ये सब तथ्य और सत्य जान ही नही सकता वो तो भेड़चाल में फंसा है

उसे न तो ये ज्ञात है कि आत्मा क्या है न ही ये ज्ञात है शरीर के भीतर कितने रूप या कितने ब्रह्मांड होते है न उसे ये पता है कि शरीर में कितने वन है और न ही शरीर रूपी जगत में बसा नगर क्या है

जिनकी दृष्टि ही बाहर खुलती है और जो बाहर ही अटके है वो न तो भीतर जा सकते है न ही सच को जान सकते है बस वो खुद भी तुक्के मारेंगे और दूसरों को भी तुक्केबाजी सिखाएंगे

और तब यही हाल होगा जो आजकल हो रहा है

गुरु लोभी चेला लालची दोनों खेले दांव
और भवसागर में डूबते बैठ पत्थर की नाव

बिना नाथ बने और श्रीनाथ गुरु गोरखनाथ जी की शरण में जाये न तो योग पता लगेगा न सत्य न तन्त्र न ही कुछ और भेड़ की तरह ही सब घूमते रहेंगे
हर हर महादेव 🙏 जय श्री सीताराम 🙏 जय सियाराम 🙏जय सीता के राम 🙏

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