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बक़रीद

Byadmin

Jul 21, 2021

:-: बक़रीद :-:
अल्लाह ने पैग़म्बर अब्राहम के सपने में आकर उनके पुत्र पैग़म्बर इस्माइल की क़ुर्बानी मांगी,जिसे स्वीकार करते हुए,जब पैग़म्बर अब्राहम अपने पुत्र की क़ुर्बानी देने लगें, तब उन्हें पता चला कि अल्लाह केवल उनकी परीक्षा ले रहे थे।यह कहानी प्रतीकात्मक रूप में हैं।किसी भी व्यक्ति को अपनी संतान सबसे अधिक प्रिय होती हैं ,जिसके लिये वो मर भी सकता हैं, संतान से दूर होना सबसे अधिक पीड़ादायक होता हैं।हम सभी को अपनी बुरी आदतों जैसे,शराब पीना,जुआं खेलना,मांस खाना आदि से बहुत लगाव होता हैं।इसलिये अपनी संतान रूपी बुरी आदतों का त्याग करने से अल्लाह खुश होते हैं, यही इस कहानी का वास्तविक अर्थ हैं।बकरा * मैं मैं * करके बोलता हैं,अहंकारी व्यक्ति मैं शब्द का अधिक उपयोग करता हैं और अहंकार ही सभी बुराइयों की जड़ हैं, इसलिये इस पर्व में प्रतीक रूप में बकरा हैं।आपको अपनी बुराइयों की क़ुर्बानी करनी हैं, न की एक लाचार जीव बकरे की।अर्थ का अनर्थ कर देने से किसी भी सम्प्रदाय का पतन हो जाता हैं।बकरा काटकर खाने से,बकरे की मैं मैं वाली अहंकारी आदत आप में भी आ जायेगी, इसलिये शब्दों के भाव को समझिये।इस्लाम मतलब शांति,यानि अहिंसक बने,हिंसा न करें।जो इस बात अनुसरण कर सकते हो,उन्हें बक़रीद की शुभकामनाएं !

धन्यवाद :-बदला नहीं बदलाव चाहिए

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