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भारतीय राजनीति की विडंबना

Byadmin

Mar 4, 2021

भारतीय राजनीति की विडंबना…
हर बात का विरोध करना क्या उचित है…
क्या देशहित और जनहित जरूरी नहीं है…
आप कभी सत्ता में रहते हो कभी विपक्ष में रहते हो। जब आप सत्ता में रहते हुए जो नियम -कानून बनाते हैं उसका विपक्ष हमेशा बहिष्कार करता है विरोध करता है। और यदि जब विपक्षी सत्ता में होते हैं तो उनके हर काम का विरोध जो आज सत्ता में है वह भी विपक्ष में रहते हुए करते हैं।
ऐसा क्यों नहीं हो सकता है की‼️
जब भी कोई बात देश हित की हो, जनहित की हो, कोई कार्यक्रम अच्छा हो तो विपक्षी पार्टीयों को उसका सपोर्ट करना चाहिए और जब वे सत्ता में आवे तो उसे आगे बढ़ाना चाहिए ना कि उसे रोक देना चाहिए। तब कहीं जाकर देश का सही “उद्धार व विकास” होगा।
परन्तु आज की राजनीति व विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र ( जिसका दिन-रात ढोल पीटते हुए नेता थकते नहीं है ) में यहां हर बात पर एक दूसरे का विरोध करते हुए देख कर बड़ा दुख होता है। सब पढ़े लिखे हैं, समझदार है पर विरोध करने का यह दुर्गुण ना मालूम कहां से आ गया। बस विरोध के लिए विरोध करना, विरोध- विरोध- विरोध यह ठीक नहीं है। इस प्रथा को तुरंत बंद होना चाहिए। ऐसा बार-बार होने पर जनता अपने आप को ठगा हुआ महसूस करती है। वह चुनती है आपको कुछ और समझ कर, आप निकल कुछ और जाते हो।

अतः कहता है “प्रकाश”…
होगया बहुत अंधियारा अब तो सुरज निकलना चाहिए,
जिस तरह से भी हो ये राजनीति की “दिशा और दशा” अब बदलनी चाहिए।
छीनती हो जब गरीब का निवाला कोई भी पार्टी,
उस वक्त तो आंख से आंसू नहीं, “हर एक हिन्दूस्तानी की आंख से शौला निकलना चाहिए।”

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