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“भारतीय लोकतंत्र के 4 स्तंभ”

Byadmin

May 2, 2021

“भारतीय लोकतंत्र के 4 स्तंभ”

जलती “चिता” की ओर “अघोरी” बढ़ रहा था और एक शव अपनी मंद मुस्कान के साथ उसे देख कर बोल पड़ा- बताओ लोकतंत्र के कितने “स्तंभ” है?

अघोरी- वैसे तो 3 हैं- कार्यपालिका,विधायिका व न्यायपालिका पर समाचार जगत को लोग चौथा स्तंभ भी कहते हैं।

शव ने जोर का “अट्टहास” किया- गलत स्कूली शिक्षा है यह।

इस देश में लोकतंत्र के चार स्तम्भ हैं- कांग्रेस, इस्लाम, वामपंथ और ईसाई मिशनरी। इन्हीं चारों पर भारतीय लोकतंत्र टिका है।

कांग्रेस और चुस्लाम एक समानांतर सत्ता है, एक समानांतर व्यवस्था है, इनका पैटर्न एक जैसा है; ठीक इसी प्रकार मिशनरी और वामपंथी एक सी व्यवस्था है। मिशनरी या वामपंथी एक नियत तरीके के आपके सामने आता है, और हर कदम पर आपकी प्रतिक्रिया का उत्तर उनके पास तैयार रहता है। वह आपसे जुड़ी किस भी चीज को हथियार बना लेगा और आप समझ नही पाएंगे कि आप फंदे में फंसाए जा रहे हैं। वह आपकी धार्मिक पुस्तकों को, रीति रिवाज और परंपरा को, बच्चों को, महिलाओं को हथियार बनाता है।

रोचक चुटकुले और रुचिकर विषयों से वह आपको अपने निकट लाता है। महिलाओं से मधुरता का व्यवहार पर प्रगतिशील बातें करते हुए धीरे धीरे द्विअर्थी चुटकुले और शराब सिगरेट की बातें करने लगेगा।

  • अरे! एक सिगरेट पियो, बच्चे हो क्या?
  • बीयर शराब थोड़े न है!
  • Why you behave like बहन जी?
  • ये आंटीजी वाली ड्रेस है क्या?

ये बातें आपको स्वयं से अलग बताकर एक हीनता ग्रंथि विकसित करने की तकनीक है। वो कभी एक विषय पर नही टिकेंगे, आप जिस मुद्दे पर भी चर्चा करेंगे वहाँ से कूदकर दूसरे विषय पर निकल जाएंगे।

बौद्धिकता का ढोंग करके सीधी बात को घुमाफिरा कर कहना इनकी पहचान है। यदि पकड़े गए तो विक्टिम प्ले करेंगे, सीधा मुकाबला करने के स्थान पर महिलाओं को आगे करेंगे। जब चुनौती मिलती है तो यह संविधान की और व्यवस्था की दुहाई देते हैं। संविधान का सबसे अधिक दुरूपयोग और आसम्मान इन्हीं लोगों ने किया है और यही सबसे पहले संविधान का रोना शुरु करेंगे। समूह में कुछ महिलाएं पीड़ित बनकर शोर मचाना प्रारंभ करेंगी। आपसे लड़ने के लिए वह आपसे ही पैसे इकट्ठा करेंगे और आप समझ नहीं पाएंगे जब तक समझेंगे तब तक आप उनके फंदे में फंस चुके होंगे।

अब बात करते हैं कांग्रेस और चुस्लाम के तंत्र के बारे में यह हमेशा आपके सामने कुछ दोयम दर्जे की किताबें लिख कर लाएंगे आपको उन्हीं पुस्तकों का हवाला देकर बार-बार चुप करेंगे जैसे अपने जाकिर नाइक के केस में देखा, वह ऊंचाई पर चढ़कर आपके ही कुछ उद्धरण; आपकी ही कुछ बातों को आप के ऊपर थूकता है। जैसे ही आप अपनी पुस्तकों पर सफाई देना शुरू करें वह अपनी एक पुस्तक लेकर आ जाएगा। इनकी भी एक सामंती मानसिकता है।

कांग्रेसी व चुस्लामी हमेशा बात के प्रारंभ में आपको अप्रत्यक्ष रूप से यह कहता है कि वह आपसे श्रेष्ठ है। वह चर्चा की पहली पंक्ति में बोलेगा कि आपको यह पता नहीं होगा, आपने यह पढ़ा नहीं होगा आदि। मैच शुरू होने के पूर्व ट्रायल की गेंद पर छक्का मारकर विपक्षी खिलाड़ी और दर्शक को चमत्कृत करने की यह कांग्रेस व्यवस्था है।

कुछ बातों को गहराई से देखने का अर्थ उन्हें अनदेखा करना होता है। पोस्ट में कुछ read between the lines है, उसे समझें………..

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