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भुर्जी या भोजवाल जाति

Byadmin

May 7, 2022

:-: भुर्जी या भोजवाल जाति :-:
भूंजा का मतलब चना अर्थात भुर्जी वह हुए जो चना मतलब की सभी प्रकार की दालों, उनसे बने पकवानों, लड्डुओं आदि पूजन में लगने वाले भोज्य पदार्थों का व्यवसाय करने वाले वैश्य वर्ण के लोग थे।हलवाई व मिठाइयों का काम करना इनका मुख्य पेशा था,लेकिन भारत में चॉकलेट संस्कृति को थोपना था इसलिए,भुर्जी व उनकी अन्य उपजातियों को ,जो भोज्य पदार्थ से सम्बंधित व्यवसाय करते थे,,उन्हें पिछड़ा व पीड़ित घोषित कर दिया।आज के शब्दों होटल,रेस्टोरेंट, कैफ़े,शेफ,आदि जैसे कार्य करने वाले,भुर्जी वर्ग के हुए। भुर्जी अपने अंदर डाली गई हीनभावना से बाहर निकले और अपने पारंपरिक पेशे को करनें का अधिकार प्राप्त करें। अंग्रेजी भाषा के मायाजाल में उलझाकर, आपको पीड़ित प्रमाणित किया गया,जिससे आप सनातन संस्कृति के विरोधी हो जाए।महान मनुवादी सनातन संस्कृति में सभी प्रकार के पूजा पाठ एवं विशेष कर गणेश जी से सम्बंधित किसी भी पूजा में केवल भुर्जीयो द्वारा बनाएं गए भोग,लड्डू मिठाई ही चढ़ाने का नियम हैं।अपने सनातनी रक्षक पूर्वजों के कार्य को आगे बढ़ाएं क्योंकि विजय सत्य की ही होगी।
धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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