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भूमि अधिग्रहण कानून 1894

Byadmin

Jul 14, 2021

:-: भूमि अधिग्रहण कानून 1894 :-:
2007 और 2013 में इस कानून में थोड़ा बहुत संशोधन अवश्य किया गया।127 वर्ष पुराने भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार,सार्वजनिक उद्देश्य के तहत,किसी की भी ज़मीन को बगैर बाज़ार मूल्य के मुआवजा चुकाए,सरकार अधिग्रहण कर सकती हैं।यह कानून बनाकर आदिवासियों की लाखों एकड़ जमीन को चर्च को लीज़ पर दिया गया।इस लीज़ को रद्द किये बिना ही सन 1950 में हमारे सँविधान निर्माता ने,इसी कानून को बिना परिवर्तन किये,भारतीयों पर थोप दिया।आदिवासियों से उनके ज़मीन का अधिकार छीनने की पहली ग़लती अंग्रेजों ने की,दूसरी ग़लती उसी कानून को बरकरार रखकर,सन 1950 में की,तो इन सब में ब्राह्मणों और मनुस्मृति ने कैसे आदिवासियों का शोषण कर दिया ??यही कारण हैं कि सबसे ज्यादा आदिवासी जाति जनसंख्या वाले राज्य छत्तीसगढ़ में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च हैं और जालंधर पंजाब में विश्व का चौथा सबसे बड़ा चर्च बन रहा हैं।धर्म परिवर्तन के विरुद्ध अपने प्राण देने वाले,बिरसा मुंडा आज जीवित होते ,तो शायद यह सब देखकर,वह आत्महत्या कर लेते।यहीं कारण हैं कि आपको दिखाया जा रहा हैं सन 2021 में पंजाब में किसान आंदोलन चल रहा हैं और सच्चाई हैं कि जालंधर में एशिया का सबसे बड़ा चर्च बन रहा हैं।आंदोलन और दंगे ,ध्यान भटकाने के सबसे आसान तरीके होते हैं।
धन्यवाद :-बदला नहीं बदलाव चाहिए

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