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मकसद

Byadmin

Aug 18, 2021

वो गजवा-ए-हिन्द करेंगे,,,,,,,,,,,,,,लेके रहेंगे आजादी,
महज़ इसी मकसद से अपनी,,,,,,,बढ़ा रहे हैं आबादी।

साथ पाक के चीन घुसेगा,,,,,,,,और संग में तालिबानी,
हिन्दू इतना बेबस होगा,,,,,,,जितने थे कल अफगानी।
*सबसे पहले *कब्जाएँगे,,,,,,,,,,,,,काश्मीर की वो वादी।*
महज़ इसी मकसद से अपनी,,,,,,,बढ़ा रहे हैं आबादी।

दुश्मन को फिर साथ मिलेगा,,,,,अंदर के मक्कारों से,
मुल्क हमारा भरा पड़ा है,,,,,,,,,,,,,जयचंदो गद्दारों से।
बाहर से वो कुछ भी हों पर,,,,,,,,हैं अंदर से बगदादी।
महज़ इसी मकसद से अपनी,,,,,बढ़ा रहे हैं आबादी।

जो वादी में किया था पहले,,,,,,,फिर से वो दोहराएंगे,
घर से बहन-बेटियों को वो,,,,,,,,,उठा-उठा ले जाएंगे।
वो बच्ची फिर निकाह पढ़ेगी,जिसकी होनी थी शादी।
महज़ इसी मकसद से अपनी,,,,,बढ़ा रहे हैं आबादी।

अपना धर्म बचाना है तो,,,,,खुद हमको लड़ना होगा,
बन फौलादी चट्टानों सा,,,,,,,,दुश्मन से अड़ना होगा।
पहले था क्या साथ दिया जो,,,,,,आगे देगी ये खादी।
महज़ इसी मकसद से अपनी,,,,बढ़ा रहे हैं आबादी।

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