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महाड़ सत्याग्रह

Byadmin

Apr 24, 2022

:-: महाड़ सत्याग्रह :-:
पढ़ाया गया कि कोई अछूत होते थे,जिन्होंने 20 मार्च 1927 को महाड़ में सार्वजनिक स्थानों पर पानी पीने के लिए,आंदोलन किया। क्या वास्तव में उन्हें तालाब से पानी पीने का अधिकार नहीं था क्योंकि भारत के हज़ारों वर्षो पुराने ज्ञात इतिहास के अनुसार भी,सभी भारतीय एक साथ समुद्रों व नदियों में , कुंभ व स्नान पर्वो के समय , महिला पुरुष तक का भी भेद मिटाकर, सार्वजनिक स्नान करते आ रहे हैं।,भंडारों में साथ खा रहे हैं,भागवत कथा साथ में बैठकर सुन रहें हैं ,तो एक साथ में पानी पीने में क्या कोई समस्या हो सकती हैं?? सत्य क्या हैं, इसका स्वयं ही आत्म चिंतन करें।जिन लोगों ने ब्राह्मणों का विरोध किया,उन्होंने कभी ब्रिटिशों के बारें में कुछ नहीं बोला और जिन आदिवासी योद्धाओं ने ब्रिटिशों का विरोध किया,उन्होंने ब्राह्मणों के बारें में कुछ नहीं बोला।असत्य व प्रायोजित घटनाक्रमो पर आधारित इतिहास बनाकर और लिखकर,पीढ़ियों को दिग्भ्रमित करके उनका सम्प्रदाय परिवर्तन किया गया।आदिवासी स्वयं तय करें कि उनके आदर्श कौन हैं, वो जिन्होंने सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए प्राण दिए या फिर वो जिन्होंने सनातन संस्कृति का विरोध किया ??विजय सत्य की ही होगी।
धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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