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महिला – पुरुष का पहनावा

Byadmin

Sep 5, 2021

:-: महिला – पुरुष का पहनावा :-:
पुरुष द्वारा अपने निजी अंगों का सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन करना अपराध और महिला द्वारा ऐसा करने पर अभिव्यक्ति और वस्त्र पहनने की स्वतंत्रता का नाम देकर,पिछले 70 वर्षों में एक ऐसे कुंठित समाज का निर्माण किया गया,जिसमें कोई भी सुरक्षित नहीं हैं।पुरुष सार्वजनिक स्थान पर अंत:वस्त्र पहने के घूमें तो अभद्रता, अश्लीलता और महिला ऐसे घूमें तो आधुनिकता, फैशन।या तो महिला और पुरुष दोनों के लिये ही निजी अंगों का प्रदर्शन अपराध होना चाहिए या फ़िर दोनों के लिये ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।इस बात से पता चलता हैं कि महिला-पुरुष पूर्वाग्रह से पीड़ित होकर और औछी,कुंठित मानसिकता से , महिला औऱ पुरुष के शारीरिक और मानसिक विज्ञान को समझे बिना, एक समान कृत्य होने पर भी महिला और पुरुष के लिए,अलग अलग नियम व दंड विधान बनाने से समाज में अपराधीकरण को बढ़ावा मिला हैं।महिला या पुरुष या अन्य कोई भी वर्ग हो,सभी के लिये सार्वजनिक या निजी जीवन में मर्यादा और अनुशासन को एकसमान बनाकर ही स्वस्थ और सुरक्षित समाज का निर्माण किया जा सकता हैं।जिस तरह के अपराध विदेशों में होते थे,उसी तरह के अपराधों का कुछ दशकों में भारतीय समाज। में घटित होना, इस बात का प्रमाण हैं कि विदेशी नियम कानूनों ने ही अपराधीकरण को बढ़ाया हैं।स्वदेशी क़ानून लाओ और समाज को सभ्य बनाओ।
धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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