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मेरे मन की बात मेरी भी सुनो भाई

Byadmin

May 26, 2021

मेरे मन की बात मेरी भी सुनो भाई

मैंने बचपन से लेकर 2014 तक देश-धर्म आदि की कोई लड़ाई नहीं लड़ी क्योंकि पेट की लड़ाई के आगे कुछ देख नहीं पाया। एक ही लक्ष्य था कि मध्यम वर्गीय परिवार पैदा अवश्य हुए परन्तु माध्यम वर्गीय परिवार में मरेंगे नहीं। 1996 में विशाखापत्तनम में थे की तब देश में हर चीज का अकाल था। एक तरफ अटल जी का चेहरा पटल पर स्थापित हो रहा था पर वो भी NDA के शवसेना, चंद्रबाबू जैसे घटक दलों/नेताओं और भाजपा को खोखला करने में लगे अरुण सूअरी सरीखे दलालों के चँगुल में फंस कर 2004 में गद्दी गँवा बैठे।

जब तक अटल जी PM रहे तब तक आडवाणी जी संघ और गोविंदाचार्य सरीखे मठाधीशों के दम पर उनके उँगली किये रहे ताकि थक हार के वो सज्जन पुरुष कुर्सी इनको सौंप के झोला उठा के निकल लें। 2005 में, मै दुखी होकर बहरीन खड़ी देश चला गया तब इस देश की PM की कुर्सी पे बैठाया गया कार्टून, रेनकोट पहन के नहाने में लगा था। चोरी, डकैती, घोटाले, सांठगांठ कर कर्ज देकर कर्जमाफी, ठेका, पट्टा, योजना बनाकर लूट, बजट के तीन महीने पहले ही वस्तुएं मार्किट से गायब और बढ़े रेट में उपलब्ध … जैसे गोरखधंधों की बाढ़ आई हुई थी… !!

लुटियन खैराती मीडिया तब ट्रांफर पोस्टिंग से लेकर मंत्रालय तक की दलाली में मालाई चाट रहा था। खबरों में मालिकों की चरण वन्दना के अलावा कभी-2 राज्य सरकारों से उगाही के लिए खबरें प्लांट करना या माल मिलने के बाद खबरें गायब करना आदि खेलों में अपने-2 कौशल दिखा रहे थे। जनता को जागने न देने के लिए हर तरफ हरियाली ही दिखाई जा रही थी। पाकिस्तान सर पे चढ़ के मूत रहा था, चीन आये दिन कभी 15 किमी तो कभी 21 किमी अंदर तक घुसा आ रहा था और पवित्र परिवार तब चीन सरकार के साथ प्राइवेट MoU साइन कर रहा थ।

मंहगाई, लूट, अत्याचार का बोलबाला हर ओर था। 36 रुपये का पेट्रोल 70 पार हो गया था और रुपया डॉलर के सामने 80 पार खड़ा था लेकिन लुटियन महारथी – सरकारी बंगलो, शराब सबाब सहित सरकारी यात्राओं, उद्योगपतियों से दलाली और मंत्रालय बांटने में व्यस्त था। पर जनता आक्रोशित होती जा रही थी क्योंकि 70 वाली दाल 2013 आते-आते 270 की हो गई थी।

अटल जी के परमाणु परीक्षण में प्याज की खपत होने से प्याज 100 रुपये बिक गया था और तब 100 दिन में मंहगाई कम करने का नारा देकर सरकार बनाने वाले कांग्रेसियों ने जनता को एक सच्चे व ईमानदार शासक के साथ किये गए दुर्व्यवहार का जमकर इनाम दिया था। जनता कराह रही थी और तभी गुजरात में बिजली कड़की, एक दीप्तमान नेता का उदय हुआ। जनता ने अपनी गलती सुधारी और उसी नेता नरेन्द्रमोदी को 2014 में देश की कुर्सी सौंप दी। इस लड़ाई में पहली बार 2006 से ही करना शुरू क्या था 2014 में दिन रात एक कर के मैंने भी देश के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन किया था।

तब से आज तक वो लुटियन दलाल एक दारू की बोतल, एक सरकारी यात्रा, एक सरकारी बंगला, एक सरकारी पोस्टिंग, एक सरकारी मंत्रालय का बंदर बाँट आदि सबके लिए तरस गए हैं। इतना किलस रहे हैं अपना साम्राज्य जांने के बाद कि साले गड़े मुर्दों को करोना काल के ग्रास बताकर झूंठी खबरें प्लांट कर रहे हैं। कभी ऑक्सीजन तो कभी वैक्सीन के नाम पे षड्यंत रचकर जनता को धोखा देने का भरसक प्रयास कर रहे हैं।

आज भी ऐसे ही कुकुरमुत्ते अपना रंग दिखायेंगे और हम जनता उसके पिछवाड़े में पेट्रोल छिड़क के ताली बजायेंगे …

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