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मैला ढोने वाला अछूत

Byadmin

Aug 28, 2021

:-: मैला ढोने वाला अछूत :-:
कानूनी परिभाषा में सीवर श्रमिक, रेल पटरी साफ करने वाले जैसे लोगों को मैला ढोने वाला कहा जाता हैं और राजनेताओं के द्वारा आरोप लगाया जाता हैं कि हज़ारो वर्षो से लोग सर पर मैला ढोते हैं उन्हें अछूत कहा गया।सरकारी आंकड़ों के अनुसार भी कुछ वर्ष पूर्व तक भारत की आधे से अधिक जनसंख्या खुले में शौच करती हैं।जब देश में लोग खुले में शौच करते हो और देश में अभी कुछ दशकों में ही शौचालयों का निर्माण किया गया हो,तो हज़ारो वर्षो से लोग अपने सर पर मैला कैसे ढोने लगें? साफ सफाई करने वालों से तो हर काल में लोग दूरी बना कर रखते हैं।आज भी जो लोग सीवर की सफाई का कार्य करके आते हैं,तब हाइजिनिक जैसे अंग्रेजी शब्दों का उपयोग करके,वही अछूत वाला ही तो व्यवहार किया जाता हैं।छुआछूत केवल एक दूसरें से दूरी बनाने का तरीका हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों से बचा जा सके।दो गज की दूरी वाले व्यवहार में भी लोग एक दूसरें को स्पर्श करने से बचते हैं।यह भी तो छुआछूत ही हुई।बस शब्द बदले हैं।सन 1860 से आई सत्ता वाले लोगों ने मनगढ़त कहानियां बनाकर लोगों को मूर्ख बनाया,आज उन्हें भी हाथ मिलाना छोड़कर नमस्ते करना पड़ रहा हैं।अपने स्व विवेक से काम लें।जीत सत्य की ही होगी।
धन्यवाद :बदला नहीं बदलाव चाहिए

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