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लालू यादव के कारनामे

Byadmin

May 15, 2021

लालू यादव के कारनामे

बात साल 1997- 98 की है। बिहार में लालू यादब की सरकार थी। देश मे बिहार पहला राज्य बना था, जहाँ अपराधियों के संरक्षक मुख्यमंत्री हुआ करते थे, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं!

ऐसी ही एक कहानी है, बिहार में 1982 बैच के एक IAS की, जो दलित समाज से थे उनका नाम था बी.बी. विश्वास। उन दिनों यह श्रम विभाग में सामाजिक सुरक्षा के निदेशक के रूप में कार्यरत थे। इनकी पत्नी का नाम था चम्पा विश्वास।

उस समय बिहार में लालू यादव की सरकार में उनकी ही पार्टी की विधायक थी हेमलता यादव।विधायक हेमलता के बेटे बबलू उर्फ मृत्युजंय यादव की कुदृष्टि चम्पा विश्वास पर पड़ी। फिर क्या था! जो मानवता शर्मसार हुई उसे बयां करना भी आसान नहीं।

चम्पा विश्वास IAS की बीवी का बलात्कार हो गया। सत्ता के संरक्षण में विधायक का बेटा और उसके कई दोस्त दो साल तक लागातार चंपा विश्वास के साथ सामूहिक बलात्कार करते रहे। बी.बी. विश्वास जब थाने पर मुकदमा दर्ज कराने गये तो नहीं हुआ। लालू के पास गये, लालू बोले कि जो हुआ भूल जाओ। केस करके कुछ नहीं मिलेगा। कार्रवाई कैसे होती? आरोपी लालू की बिरादरी का जो था। लगातार चम्पा विश्वास का सामूहिक बलात्कार होता रहा। एक बार तो गर्भपात भी कराना पड़ गया था।

अंत में थक-हारकर बेबस सीनियर IAS और उनकी पीड़ित पत्नी ने राज्य के राज्यपाल श्री सुंदर सिंह भंडारी को एक पत्र के माध्यम से सब कुछ बताया। तब विपक्ष के नेता सुशील मोदी ने इस मामले को मीडिया में उठाया। तब जाके कार्रवाई हुई। इंडिया टुडे में इस खबर के छपने से पूरे देश में हड़कंप मच गया था।

बी.बी. विश्वास ने कहा था कि मृत्युंजय ने न सिर्फ उनकी पत्नी के साथ बलात्कार किया, बल्कि उनकी सास, साली, दो नौकरानी, और भतीजी कल्याणी का भी बलात्कार किया। लालू यादव सामाजिक न्याय के नाम पर ऐसी सरकार चलाते थे।

अपहरण उन दिनों बिहार का सबसे बड़ा कारोबार था। भ्रष्टाचार सबसे बङा शिष्टाचार और बलात्कार रसूखदारों के लिए लोकाचार था। चम्पा विश्वास के साथ जो ज़ुल्म हुआ वह एक कलंक है लालू यादव के जीवन पर। इस घटना के बाद उनके पति का वेतन रोक दिया गया। सड़क पर आ गये थे पति पत्नी। इलाज का पैसा नहीं था, बेमौत मर गये। लालू यादव का खौफ इतना था कि बी.बी. विश्वास को तब ना IAS एशोसियसन का साथ मिला और ना ही दलित आयोग का।

मीसा भारती, लालू की बेटी की शादी में IAS और IPS शादी कार्ड बांटने से लेकर वेटर के कार्यों में लगाए गए थे, तब कहाँ था IAS एशोसिएशन। समस्तीपुर में फैज अकरम जिलाधिकारी थे, लालू यादव स्थानीय पटेल मैदान में आए हुए थे। भाषण देने से पहले खैनी थूकना था। हजारों लोगों ने देखा DM फैज अकरम हाथ में पिकदान पकङे रहे और लालू यादव उसमें थूक व कुल्ला कर रहे थे। जब मंच पर लालू खैनी ठोकवाते और पिकदान उठवाते तब IAS व IPS के प्रतिष्ठा में चार चाँद लग जाते थे?

उस समय मोमबत्ती गैंग गायब था। किसी ने अवार्ड नहीं लौटाये थे। दलितों की मसीहा मायावती चुप थी। उच्च न्यायालय ने सचमुच आँखों पर काली पट्टी बाँध ली थी। किसी ने धरना-प्रदर्शन नहीं किया।

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