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वाह री सभ्यता वाह री सभ्यता वाह

Byadmin

Apr 9, 2021

एक जमाना था, तन ढकने को कपड़े न थे ,
फिर भी लोग तन ढकने का प्रयास करते थे।
आज कपड़ों के भंडार हैं, फिर भी तन दिखाने का प्रयास करते है
हम सभ्य जो हो रहे है।

एक जमाना था, आवागमन के साधन कम थे।
फिर भी लोग परिजनों से मिला करते थे।
आज आवागमन के साधनों की भरमार है।
फिर भी लोग न मिलने के बहाने बताते है।
हम सभ्य जो हो रहे है।

एक जमाना था, गाँव की बेटी का सब ख्याल रखते थे।
आज पड़ौसी की बेटी को भी उठा ले जाते है।
हम सभ्य जो हो रहे है।

एक जमाना था, लोग नगर-मौहल्ले के बुजुर्गों का हालचाल पूछते थे।
आज माँ-बाप तक को वृद्धाश्रम मे डाल देते है।और सुबह से शाम तक शब्दों से अपमानित करते हैं,
हम सभ्य जो हो रहे है।

एक जमाना था, खिलौनों की कमी थी।
फिर भी मौहल्ले भर के बच्चे साथ खेला करते थे।
आज खिलौनों की भरमार है, पर घर-द्वार तक बंद हैं।
हम सभ्य जो हो रहे है।

एक जमाना था, गली-मौहल्ले के जानवर तक को रोटी दी जाती थी ।
आज पड़ौसी के बच्चे भी भूखे सो जाते है।
हम सभ्य जो हो रहे है।

एक जमाना था, नगर-मौहल्ले मे आए अनजान का पूरा परिचय पूछ लेते थे।
आज पड़ोसी के घर आए मेहमान का नाम भी नहीं पूछते
हम सभ्य जो हो रहे हैं।

वाह री सभ्यता ! वाह री सभ्यता ! वाह !!

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