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विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना

Byadmin

Jan 2, 2021

विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना


को अपनाइये ……..
चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन ही नूतन वर्ष मनाइये
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
अपनी संस्कृति का ज्ञान न होने के कारण आज हिन्दू
भी 31 दिसंबर की रात्रि में एक-दूसरे को हैप्पी न्यू इयर कहते हुए नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं !!

नववर्ष उत्सव 4000 वर्ष पहले से बेबीलोन में
मनाया जाता था। लेकिन उस समय नए वर्ष का ये
त्यौहार 21 मार्च को मनाया जाता था जो कि
वसंत के आगमन की तिथि (हिन्दुओं का नववर्ष )
भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी ये तिथि
नव वर्षोत्सव के लिए चुनी गई थी लेकिन रोम के
तानाशाह जूलियस सीजर को भारतीय नववर्ष
मनाना पसन्द नही आ रहा था इसलिए उसने ईसा
पूर्व 45वें वर्ष में जूलियन कैलेंडर की स्थापना की,
उस समय विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए
वर्ष का उत्सव मनाया गया। ऐसा करने के लिए
जूलियस सीजर को पिछला वर्ष, यानि, ईसापूर्व
46 ईस्वी को 445 दिनों का करना पड़ा था।
उसके बाद भारतीय नववर्ष के अनुसार छोड़कर
ईसाई समुदाय उनके देशों में 1 जनवरी से नववर्ष
मनाने लगे।

भारत देश में अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कम्पनी की
1757 में स्थापना की। उसके बाद भारत को
190 साल तक गुलाम बनाकर रखा गया। इसमें
वो लोग लगे हुए थे जो भारत की ऋषि-मुनियों
की प्राचीन सनातन संस्कृति को मिटाने में कार्यरत
थे। लॉर्ड मैकाले ने सबसे पहले भारत का इतिहास
बदलने का प्रयास किया जिसमें गुरुकुलों में हमारी
वैदिक शिक्षण पद्धति को बदला गया।

भारत का प्राचीन इतिहास बदला गया जिसमें
भारतीय अपने मूल इतिहास को भूल गये और
अंग्रेजों का गुलाम बनाने वाले इतिहास याद रह
गया और आज कई भोले-भाले भारतवासी चैत्र
शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष नही मनाकर 1जनवरी
को ही नववर्ष मनाने लगे।

हद तो तब हो जाती है जब एक दूसरे को नववर्ष
की बधाई भी देने लग जाते हैं। क्या किसी भी
ईसाई देशों में हिन्दुओं को हिन्दू नववर्ष की बधाई
दी जाती है..? किसी भी ईसाई देश में हिन्दू
नववर्ष नहीं मनाया जाता है फिर भोले भारतवासी
उनका नववर्ष क्यों मनाते हैं ?

इस साल आने वाला नया वर्ष 1जनवरी 2021
अंग्रेजों अर्थात ईसाई धर्म का नया साल है।

हिन्दू धर्म का इस समय विक्रम संवत 2076 चल
रहा है। इससे सिद्ध हो गया कि हिन्दू धर्म ही
सबसे पुराना धर्म है।
इस विक्रम संवत से 5000 साल पहले इस धरती
पर भगवान विष्णु श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित
हुए। उनसे पहले भगवान राम, और अन्य अवतार
हुए यानि जबसे पृथ्वी का प्रारम्भ हुआ तबसे
सनातन (हिन्दू) धर्म है।

कहाँ लाखों वर्ष पुराना हमारा सनातन धर्म और
कहाँ भारतीय अपनी गरिमा से गिर 2000 साल
पुराना नववर्ष मना रहे हैं!
जरा सोचिए….!
सीधे-सीधे शब्दों में हिन्दू धर्म ही सब धर्मों की
जननी है। यहाँ किसी धर्म का विरोध नहीं है परन्तु
सभी भारतवासियों को बताना चाहते हैं कि इंग्लिश
कैलेंडर के बदलने से हिन्दू वर्ष नहीं बदलता!

🚩जब बच्चा पैदा होता है तो पंडित जी द्वारा उसका नामकरण कैलेंडर से नहीं हिन्दू पंचांग से किया जाता है। ग्रहदोष भी हिन्दू पंचाग से देखे जाते हैं और विवाह, जन्मकुंडली आदि का मिलान भी हिन्दू पंचाग से ही होता है। सभी व्रत, त्यौहार हिन्दू पंचाग से आते हैं। मरने के बाद तेरहवाँ भी हिन्दू पंचाग से ही देखा जाता है। मकान का उद्घाटन, जन्मपत्री, स्वास्थ्य रोग और अन्य सभी समस्याओं का निराकरण भी हिन्दू कैलेंडर (पंचाग) से ही होता है।

*🚩आप जानते हैं कि रामनवमी, जन्माष्टमी,
होली, दीपावली, राखी, भाई दूज, करवा चौथ,
एकादशी, शिवरात्री, नवरात्रि, दुर्गापूजा सभी
विक्रमी संवत कैलेंडर से ही निर्धारित होते हैं।
इंग्लिश कैलेंडर में इनका कोई स्थान नहीं होता।

*🚩सोचिये! आपके इस सनातन धर्म के जीवन
में इंग्लिश नववर्ष या कैलेंडर का स्थान है क्या ?

1 जनवरी को क्या नया हो रहा है..?
न ऋतु बदली… न मौसम… न कक्षा बदली…
न सत्र…. न फसल बदली… न खेती….. न पेड़
पौधों की रंगत… न सूर्य चाँद सितारों की दिशा….
ना ही नक्षत्र…
हाँ, नए साल के नाम पर करोड़ो जीवों की हत्या
व करोड़ों गैलन शराब का पान व रात भर
फूहणता का प्रदर्शन अवश्य होता है।*

*🚩भारतीय संस्कृति का नव संवत् ही नया
साल है…. जब ब्रह्माण्ड से लेकर सूर्य, चन्द्रमा
की दिशा, मौसम, फसल, कक्षा, नक्षत्र, पौधों की
नई पत्तियां, किसान की नई फसल, विद्यार्थी की
नई कक्षा, मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि
परिवर्तन होते हैं जो विज्ञान आधारित हैं। और
चैत्र नवरात्रि का पहला दिन होने के कारण घर,
मन्दिर, गली, दुकान सभी जगह पूजा-पाठ व
भक्ति का पवित्र वातावरण होता है।

🚩अतः हिन्दुस्तानी अपनी मानसिकता को
बदलें, विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना
को पहचानें और ……..
चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
के दिन ही नूतन वर्ष मनायें।

जयतु जयतु हिन्दु राष्ट्रम्

संवाददाता

स्मिता मिश्रा

कोलकाता

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