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शर्मनाक है पर अचंभा नही होना चाहिए।क्योकि कांगियो के डीएनए में बसी है कूट कूट अव्वल दर्जे की गद्दारी…?

Byadmin

Dec 2, 2020

शर्मनाक है पर अचंभा नही होना चाहिए।क्योकि कांगियो के डीएनए में बसी है कूट कूट अव्वल दर्जे की गद्दारी…?

ये मोहतरमा है अरूसा आलम जो कैप्टेन अमरिंदर सिंह की लिव इन पार्टनर है।ये एक पाकिस्तानी हैं।ये मोहतरमा पाक की डिफेंस जर्नलिस्ट भी है।मै समझती हूं कि सारे सवालों के जवाब मिल गए होंगे।एक मोदी जी व अमित भाई कैसे बचाएंगे।देश को ???पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए।So called किसान आंदोलन में ये तो सीधा सा मतलब है।दिल्ली को जलाने के लिए अमरिंदर ने “खालिस्तान” जिंदा कर दिया है।दिल्ली में शुरू किया गया “किसान आंदोलन” अब किसी भी तरह से किसानों से सम्बंधित नहीं लग रहा।

जैसे जैसे नारे वहां लग रहे हैं उनसे लगता है आंदोलन का विदेशी ताकतों के इशारों पर खालिस्तानियों ने अपहरण कर लिया है।आज अगर पंजाब में खालिस्तानी ताकतें खड़ी हो गई हैं तो उसके लिए कांग्रेस और कैप्टेन अमरिंदर सिंह जिम्मेदार हैं।याद रखना चाहिए सिधू का वो इमरान और बाजवा को गले लगाना जिसका नतीजा अब सामने आ रहा है।

भूरी बाई ने जब अपने पति के हत्यारों को ही माफ़ कर दिया था तब उसके लिए इंदिरा गाँधी के हत्यारों को साथ देना कोई बड़ी बात नहीं है।रेल की पटरियों पर तो पंजाब के कथित सिख किसान लेटे ही हैं, उसके अलावा कुछ नारे देखिये जो वहां लग रहे हैं “हमने तो इंदिरा गाँधी को ठोक दिया था मोदी किस खेत की मूली है”(मतलब इंदिरा को मारने वालों के साथ आज कांग्रेस खड़ी हो गई इंदिरा को त्याग कर।किसलिए बस मोदी से लड़ने के लिए)
एक आठ दस साल के बच्चे से नारा लगवा रहे हैं- “मोदी तेरी कब्र खुदेगी आज नहीं तो कल खुदेगी” “खटटर तेरी कब्र खुदेगी आज नहीं तो कल खुदेगी”

उन्हें पता नहीं कब्र हिन्दू की नहीं खोदी जाती।कहीं किसी ने जवाब में नारा लगा दिया तो कैसा लगेगा “सोनिया तेरी कब्र खुदेगी भारत में नहीं इटली में” जैसी भाषा “तू तड़ाक” की आज अमरिंदर सिंह ने मनोहर लाल खट्टर जी के लिए अर्नब के साथ इंटरव्यू में बोली है उससे जाहिर है ये नारे उसके ही लोग लगा रहे थे।एक आपिया खुल कर कह रहा था।”हम भारत माता की जय नहीं बोलेंगे हम नारे इस्लाम के,सिख धर्म के और ईसाई धर्म के लगाएंगे,भारत माता की जय मोदी बोलेगा,भागवत बोलेगा” एक और सिख कह रहा था “इमरान हमारा भाई है दुश्मन दिल्ली में बैठा है” इस आंदोलन को समर्थन PFI ने भी दे दिया है जिसका कोई औचित्य नहीं है लेकिन जैसे सिखों ने शाहीन बाग़ में लंगर चलाया था,यहां थुकल समुदाय सिक्खों के लिए खाने पीने का इंतज़ाम कर रहे है।

ये कोई आंदोलन नहीं है बल्कि शाहीन बाग़ के आंदोलन की तरह अंत में दिल्ली को आग लगाने की तैयारी लगती है और इस बार पाकिस्तान के साथ चीन भी ख़ुफ़िया तरीके से मिला हुआ होगा,इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए।पंजाब के संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने पंजाब और हरियाणा के किसानो को मोदी का विरोध करने के लिए दस मिलियन डॉलर यानि सात सौ पचास करोड़ रुपया देने का प्रस्ताव किया बताया जा रहा है मीडिया में जिससे किसान अपना कर्ज अदा कर सकें।उन किसानों को पता नहीं है कि कल को अगर ई डी की जांच खड़ी हो गई तो कोई उन्हें बचाने नहीं आएगा सब कुछ मोदी शाह और योगी जी नही कर पाएंगे हमे भी अपनी भूमिका को इस तरफ या उस तरफ कर ईमानदारी से निभाना होगा।

शत्रु कहीं बाहर नहीं घर के भीतर है।जिस तरह मुम्बई 26/11 हमले के दिन ही पंजाब की कांगिया सरकार ने किसान आंदोलन किया और भांड मीडिया ने किसान आंदोलन चौतरफा परोस दिया बस यही सैकड़ो वर्षों से होता आ रहा था आघात झेलो और उससे सबक लेने के बजाय तात्कालिक प्रोपोगेंडा पर प्रतिक्रिया दो कभी इतिहास से सबक मत लो…?

शायद इसीलिए भारत खण्डित हुआ और भारत के कई राज्यो में सुनियोजित रूप से बहुसंख्यक हिन्दू अल्पसंख्यक एवं हिन्दू विहीन हो चला है।कट्टरपंथी आतंकवाद के मुक समर्थक भारत को मुस्लिम राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के मार्ग पर गोपनीय रूप से सफलता की ओर निरन्तर बढ़ रहे हैं।और हिन्दू समाज हमेशा की तरह जातियो में बटकर स्वार्थ व लालसा में नेताओ के तलवे चाटने एवं अपनी स्वार्थी कार्यसिद्धि में व्यस्त हैं…!

सेब केसर के बगीचों के मालिक कश्मीरी पण्डितो को कश्मीर से भागकर बहन बेटियो की अस्मिता तार तार करवाकर जब दिल्ली के शरणार्थी कैम्प में रहना पड़ रहा हैं।सिंध के सिंधीयो को प्रतिदिन मौत से ज्यादा बदतर जीवन काटना पड़ रहा हैं।पाकिस्तान, बांग्लादेश, असम, बंगाल, मेवात और केरल में हिन्दू घूँट घूँट कर प्रतिपल जीवन काट रहा हैं।
तीनतलाक,मुशरिक,कुफ्र,काफिर,जिबह,हलाल,हराम,बूत परस्ती,माल ए गनीमत,औरते खेतिया,गजवा ए हिन्द इत्यादि शब्दो को गूगल पर सर्च करके आप आपकी बर्बादी की गाथा पढ़कर सन्तुष्टि कर सकते हो।भावी विभीषिकाओं से बचने के उपायों पर मंथन करो क्योंकि जो बीज अवांछित बंटवारे के बाद लेहरू लम्पट गाँधी एवं थुकल मौलाना आजाद द्वारा भारत मे बोया गया था वह बीज अब वृक्ष बन चुका हैं तभी तो JNU AMU जैसी यूनिवर्सिटी में “भारत तेरे टुकड़े होंगे…इंशा अल्ला” एवं “हिंदुत्व तेरी कब्र खुदेगी” जे एन यू की धरती पर सरीखे खुले आम नारे लगते हैं…?

किसी भी आन्दोलन के लिए जो सामग्री चाहिए होती है वो है हजारो की भीड़ फिर उनको लाने ले जाने के लिए गाडिया फिर उनको खिलाने के लिए खाना फिर उनकी जमानते करने के लिए वकीलों की फ़ौज इन सब को मेनेज करने के लिए कुशल मेनेजरइन सब का बजट होता है करोडो में किसी भी किसान में,छात्र में,मजदूर में इतना दम नहीं होता की इन सब का इन्तजाम कर ले

इस देश तोड़ू आंदोलन में हाथरस वाली वामपंथन भाभी,दिल्ली के ठग का अब्बू अमानतलुल्ला,वामपंथी योगेंद्र उर्फ सलीम यादव,शाहीनबाग की जेहादन बुढ़िया आदि सब पहुंच गए है।मै दो महीनों से गला फाड़ फाड़ चिल्ला रही हू कि दिसम्बर जनवरी फरवरी मार्च ये तीन चार महीने(राज्य सभा मे बहुमत आते ही मोदी जी व मोटा भाई इन द्रोहियो की ऐसी रेल चलाएंगे कि आने वाली सो पुस्ते भी याद रखेंगी इनकी)बहुत ही ज्यादा निर्णायक व क्रूशियल रहने वाले है।

तैयारी रखे द्रोही देश जलाने की पूरी प्रिप्लांड तैयारी में है।लेकीन कुछ चूतियों को अब भी समझ में नही आ रहा है कि ये किसानों के नाम पर भारत सरकार को अस्थिर करने का मकड़जाल है।नही तो कितनी बार किसान की फसल को एक रु से भी कम दाम में मंडियों में लिया गया क्या कभी किसान ने इस पर आन्दोलन किया नही हां आत्महत्या जरुर की प्राइवेट स्कूल कॉलेज लूटते रहते है क्या कभी छात्र अभिवावक इस पर आन्दोलन कर पाए .गड्डो वाली सडको से लाखो लोग रोज गुजरते है कई मरते भी है किसी ने कभी आन्दोलन किया।

निजी अस्पतालों में खुले आम लूटा जाता है कभी आन्दोलन हुआ नहीं क्योकि ये आम आदमी के बस की बात है ही नहीं आन्दोलन में जो सामग्री चाहिए वो उनके बजट के बाहर होती है । आम किसान में,छात्र में,आम आदमी में न हिम्मत होती है और न ताकत होती है कि कोई भी बड़ा विरोध प्रदर्शन वो कर ले।

सब के सब तथाकथित छात्र आन्दोलन,मजदूर आन्दोलन,किसान आन्दोलन,CAA आन्दोलन,पार्टियों या बाहरी देशो के पैसे से ही फंड होते है आम किसान हो या छात्र हो वो आत्महत्या तो कर सकता है पर आन्दोलन करना उसके लिए असंभव होता है…?

कितनी सुखद स्थिति है की भूरी बाई के पे रोल पर बैठा सोनू सूद,प्रेश्याएं स्वरा भास्कर,बुरखा धत्त,शेरवानी,राणा अयूब,कौन जात रबिश इत्यादि भूरी बाई के पालतू झबरिया कुत्ते(स्त्रियों को टंचमाल कहने वाला दिग्गी तथा स्त्रियों को आयटम कहने वाला गट्ठरनाथ,तोतला ग़लघोट)भूरी बाई के बाहरी इकोसिस्टम,टटुए,बटुए,जेहादन ममता,टोटीचोर,चारा चोर का ख़ानदान,क्रिप्टो कंजर इत्यादि ही कैप्टन अमरिन्दर और खालिस्तानियों को किसान बता रहे हैं।

लेकिन शायद ये देश की जनता को अभी भी चूतिया समझ रहे है।इनको मालूम ही नही कि देश की जनता को समझ में आ चुका है 26/11 के पीछे जो शक्तियाँ थी ठीक वही इको सिस्टम अब दिल्ली में किसान बनकर आ गया है।

एक पंजाब बेस्ड नवोदित संगठन जिसकी ज्यादातर फंडिंग देश विरोधी ताक़तों के जरिये है इस बचे कुछे आंदोलन का अगुआ बना हुआ है।इन कथित आंदोलन वालों का किसी किसान समस्या से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं ये सिर्फ और सिर्फ अराजकता के लिये तत्पर हैं…इस पूरे बवाल को मज़हबी आतंकी जमातों द्वारा पूरा समर्थन है वे इसकी आड़ में भारत में लगभग दफन कर दिए गए अलगाववादी और जिहादी आतंकवाद को फिर से जिंदा करने की ख्वाहिश पाले बैठे है।

आज नहीं तो कल पंजाब वाले इस संगठन के खालिस्तान और ISI से जुड़ाव के लिंक भी बाहर आ ही जायेंगे अब आज चूंकि सोसल मीडिया का दौर है सारी दुनिया एक गांव बन चुकी है और कोई खबर audio Video पल भर में सारी दुनिया मे Viral हो जाती है आज देश मे मोदी अमित साह योगी और अजित डोभाल युग है आज का भारत मोदी जी का भारत है जो अंदर घुस के मारता है।भोत मार पड़ेगी रे बाबा जाते जाते दोस्तो इन छद्म किसानों से भी कुछ कहना चाहता हु आओ बैठो दिल्ली में बैठो जगह तुम्हें बता दी है बैठो जब तक बैठना है बिरियानी का जुगाड़ तो कर ही लिया है तुमने तो बैठो. इंदिरा को ठोक दिया था ना चलो अब अगली कोशिश कर के भी देख लो. पूरा समय मिलेगा तुम्हे…!

तुम किसान नहीं हो ये भी सबको पता चल चुका है क्योंकि किसान तो खेत में काम कर रहा है।तुम वही हो पांच सौ रुपये दिहाड़ी वाले मजदूर वही जो कश्मीर में पत्थर मारते थे।वही जो शाहीन बाग में बैठे थे और तुम्हारे साथ हैं वो दलाल बिचौलिये जिनकी कमाई पर हथौड़ा मारा गया है।

असली किसान तो खुश है और तुम से ज्यादा संख्या में किसान बाकी जगहों पर हैं उनको तो कोई तकलीफ नहीं हैं फिर तुम्हें क्या तकलीफ है।तकलीफ इसलिए है कि तुम किसान हो ही नहीं तुम हो किसान का हक मार कर डकार भी ना लेने वाले दलाल तुम हो गद्दार कांगिये,वामीये और आपिये झंडु झंड पार्टी के भाड़े के टट्टू बैठो बैठो जितने दिन मर्जी बैठो…

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