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शायरी की ढाल जिहाद की तलवार

Byadmin

Dec 18, 2020

शायरी की ढाल जिहाद की तलवार

एक शायर ने मेरे घर पर कब्जा कर लिया है और जब मैं उससे कहता हूँ कि मेरा घर छोड़ दो तो वो कहता है… ‘किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़े ही है !’

एक इंदौरी मेरे घर के बरामदे में कब्जा जमाए बैठा है और अपने साथ घुसपैठियों को भी बुला रखा है.. और जब मैं उससे कुछ कहता हूँ तो वो मुझे एक शेर सुना देता ह।

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं उससे कहता हूँ कि भई तुमको रहने को जगह दी है तो इसका ये मतलब थोड़े ही है कि घुसपपैठियों को भी बुला लोगे । तो वो जवाब में एक और शेर सुना देता है…

मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है

मैंने फिर उनसे कहा जनाब आप जान हथेली पर रखते हैं मुझे आपका इतिहास पता है लेकिन मेरे घर का हिस्सा भी आपने छीन लिया है और अब आप घुसपैठियों को बुलाकर मेरे घर पर कब्जा करना चाहते हैं । तो शायर कुछ सीधा जवाब नहीं देता है । एक और शेर सुना दिया….

जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है

फिर मैंने उनसे कहा अरे जनाब ये गुंडागर्दी क्यों कर रहे हैं ? ये मकान जिसके बरामदे में आप सदियों से कब्जा जमाए बैठे हैं ये हमारा है हम किराएदारे नहीं हैं । तो फिर वो शायर एक और शेर सुना देता है…

सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है

तो मैंने उनको याद दिलाया कि जनाबे आली याद कीजिये जब आपने रक्तपात और गुंडागर्दी मचाई थी तब 1947 में हमने आपको अपनी जमीन अपने कलेजे का टुकड़ा काट कर दिया था जिसको आपने पाकिस्तान नाम दिया । तो फिर जनाब ने अपने एक दोस्त का शेर सुना दिया।

पैदा यहीं हुआ हूँ यहीं पर मरूँगा मैं, वो और लोग थे जो कराची चले गए।

अब जब मैंने पुलिस बुलवाई कि घुसपैठियों को यहां से निकाल कर ही मानेंगे तो वही शायर तिरंगा लेकर खड़े हो गए और बोले

वो अब पानी को तरसेंगे जो गंगा छोड़ आये हैं, हरे झंडे के चक्कर में तिरंगा छोड़ आये हैं।

उन्होंने राष्ट्रगान भी गाना शुरू कर दिया अब तक तराना-ए-मिल्ली उनका प्रिय गीत था लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी । लेकिन अचानक उनको टैगोर का राष्ट्रगान जन गण मन प्रिय लगने लगा । पूरी दुनिया से उनको सहानुभूति मिल रही है।अहा शायर तो गजब देशभक्त है ! लेकिन मुझे अपने घर की चिंता सता रही है । (कुछ लोग अपने बेडरूम को ही देश की सीमाएँ समझते हैं हम पूरे देश को अपना घर समझते हैं)

ये कबीले के शायर हैं निर्लज्ज हैं । इनसे निर्लज्जता से ही बात करनी होगी । इनके सामने ये कटु सत्य रखना ही होगा कि जनाब आपके बादशाह और सुल्तान.. छत्रपति शिवाजी महाराज की तलवार के डर कर भाग चुके हैं । लेकिन हमने आपको जमाने भर की मुसीबतों से बचाकर रखा है । वहां जहां से आपके बाप-दादा आए थे वहां आज मुसलमान ही मुसलमान का कत्ल करता है । ये हिंदुओं की उदारता है कि हमने इस देश का संविधान सबके लिये बनाया है तभी आप यहां आराम से रह पा रहे हैं आपको चार बीवियाँ और चालीस बच्चे पैदा करने की आजादी हमने दी हुई है । इतनी आजादी आपको पाकिस्तान में भी नहीं है ।

तो हुजूर इस देश में रहिए और शायरी भी कीजिए लेकिन तमीज़ और शराफ़त के साथ..

ब्यूरो चीफ

दिनेश सिंह

आजमगढ़

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