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श्री गणेशाय नमः

Byadmin

Sep 10, 2021

:-: श्रीगणेशाय नम: :-:
गणेशजी ,बुद्धि यानि मस्तिष्क के प्रतीक हैं और मस्तिष्क में लगभग 80% जल होता हैं,इसलिये जल तत्व के प्रतीक और पूरी दुनिया में सबसे पहले जल ही था,इसलिये जलतत्व के प्रतीक होने के कारण प्रथम पूजनीय हैं।

  • गणेश प्रतिमा की दाई ओर सूंड का मतलब कि दिमाग़ का दायां भाग creative, imagination, visualization, solutions जैसे कार्य करता हैं, इन कार्यो के को करने वाले लोग सिद्ध यानि वैज्ञानिक,कलाकार आदि होकर प्रसिद्धि ,धन को पाते हैं, इसलिये दाएं सूंड वाली प्रतिमा सिद्धिविनायक कहलाती हैं और दाई ओर लक्ष्मी जी बैठती हैं।
  • गणेशप्रतिमा की बाई ओर सूंड का मतलब कि दिमाग़ का बायां भाग logical,analysis, computation, sequencing जैसे कार्य करके विघ्नों को हरने का कार्य करता हैं, इसलिये ऐसी प्रतिमा विघ्नविनाशक कहलाती हैं और यह सब क्षमता अनुभव और ज्ञान यानि सरस्वती से आती हैं, इसलिये बाई ओर सरस्वती जी हैं।अगर बच्चों से यानि कि 14 वर्ष की आयु तक,अगर योग क्रियाएं करवाकर, उनके दिमाग़ के दाएं बाएं भाग को साथ में activate करके ,उन्हें एक सफ़ल जीवन दे सकते हैं, इसलिये गणेशजी का बालस्वरूप अधिक प्रसिद्ध हैं।जिसके पास बुद्धि हो उसे ही सर्वप्रथम सम्मान और महत्व मिलता हैं।सनातन धर्म की सभी मूर्तियां गूढ़ वैज्ञानिक रहस्यों की प्रतीक हैं और मंदिर प्रयोगशालाएं हैं।गणेशचतुर्थी की शुभकामनाएं
    धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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