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श्री गरुड जी के द्वादश नामो का माहात्म्य

Byadmin

May 4, 2021

श्रीहरिः

श्री गरुड जी के द्वादश नामो का माहात्म्य –

सुपर्णं वैनतेयं च नागारिं नागभीषणम् ।
जितान्तकं विषारिं च अजितं विश्वरूपिणम्।
गरुत्मन्तं खगश्रेष्ठं ताक्ष्र्यं कश्यपनन्दनम् ।
द्वादशैतानि नामानि गरुडस्य महात्मन: ।
य: पठेत् प्रातरुत्थाय स्नाने व श्यनेऽपिवा ।।
विषं नाक्रामते तस्य न च हिंसन्ति हिंसका: ।
सग्रामे व्यवहारे च विजयस्तस्य जायते।।
बन्धनान्मुक्तिमाप्नोति यात्रायां सिद्धिरेव च ।। (बृहद्तन्त्रसार)

महात्मा गरुड के बारह नाम इस प्रकार हैं
( १ ) सुपर्ण (सुन्दर पंखो वाला ) ,
( २ ) वैनतेय (विनता के पुत्र),
(३) नागारि (नागोके शत्रु),
(४) नागभीषण (नागो के लिये भयंकर) ,
(५) जितान्तक (काल को भी जीत लेनेवाले) ,
(६) विषारि ( विषके शत्रु) ,
(७) अजित (अपराजेय),
(८) विश्वरूपी (सर्वस्वरूप) ,
( ९ ) गरूत्मान् ( अतिशय पराक्रमसम्पन्न) ,
( १० ) खगश्रेष्ठ (पक्षियो मे सर्वश्रेष्ठ) ,
( ११ ) ताक्ष्र्य (गरुड) तथा
( १२ ) कश्यपनंदन (महर्षि कश्यप के पुत्र)

इन बारह नामो का जो नित्य प्रात:काल उठकर स्नान के समय या सोते समय पाठ करता है, उसपर किसी भी प्रकार के विष का प्रभाव नहीं पडता, उसे कोई हिंसक प्राणी मार नहीं सकता, युद्ध में तथा व्यव्हार में उसे विजय प्राप्त होती है, वह बंधन से मुक्ति प्राप्त कर लेता है और उसे यात्रा मे सिद्धि मिलती है ।

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